Wednesday, November 14, 2018

पार्क अस्पताल में इलाज के दौरान मरीज की मौत, वीडियो वायरल, जांच शुरू


फरीदाबाद(abtaknews.com) 14 नवंबर,2018;  दिल्ली से रेफर होकर फरीदाबाद के एक बड़े अस्पताल में भर्ती होने आए मरीज डॉक्टरों की लापरवाही से हुई मौत। ऐसा आरोप परिजन फरीदाबाद के पार्क हॉस्पिटल के डॉक्टरों पर लगा रहे हैं। पीड़ित परिजनों ने अस्पताल की आईसीयू से एक वीडियो भी वायरल किया है, जो इन दिनों सो शल मीडिया पर फरीदाबाद में अच्छा खासा वायरल हो रहा है। मरीज की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ लापरवाही बरतने की शिकायत पुलिस व सीएमओ को दी है। जहां पुलिस अधिकारी इस मामले में सीएमओ की रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई किए जाने की बात कह रहे हैं, वही निजी अस्पताल के एमडी अपने ऊपर लगे इन सभी आरोपों को नकार रहे हैं। हालांकि मामला कुछ दिन पुराना है, लेकिन पीड़ित इस मामले में अभी भी न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं। 
अस्पताल के आईसीयू से बोल रही यह दिल्ली में रहने वाली ज्योति भट्ट है, जो यहां फ़रीदाबाद के सेक्टर-10 स्थित पार्क अस्पताल में भर्ती मनोज भट्ट के इलाज के बारे में स्थानीय डॉक्टरों द्वारा मरीज के मरने के बाद भी ऑक्सीजन लगाए जाने का आरोप लगा रही है।दिल्ली के ही पार्क अस्पताल से मनोज भट्ट नामक इस मरीज को वहां से फरीदाबाद के पार्क अस्पताल में रेफेर किया गया था। लेकिन अगले ही दिन इलाज के दौरान मनोज भट्ट की मौत हो गई। वायरल वीडियो में ज्योति यह भी बता रही है कि मौके पर खड़े डॉक्टरों से मदद भी मांगने की बात कह रही हैं, लेकिन उनकी कोई मदद नहीं कर रहा। 
इस मामले की जांच कर रहे हरियाणा पुलिस के जांच अधिकारी प्रदीप कुमार ने बताया कि मनोज भट्ट को निमोनिया की हालत में सेक्टर-10 के पार्क अस्पताल में भर्ती कराया था, जहां इलाज के दौरान मनोज की मौत हो गई। पुलिस की मानें तो इस मामले की शिकायत परिजनों ने अस्पताल के खिलाफ पुलिस और सीएमओ को दी है।  सीएमओ की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पुलिस कोई कार्रवाई कर सकेगी।  फिलहाल पोस्टमार्टम करवाकर शव परिजनों को सौंप दिया गया है। 
पार्क अस्पताल के एमडी डॉ पीएस यादव ने बताया कि जब दिल्ली स्थित उनके हीअस्पताल से मनोज को फरीदाबाद के उनके अस्पताल में रेफर किया गया था तो उस समय मनोज के फेंफड़े सही ढंग से काम नहीं कर रहे थे।  फिर भी उनके अस्पताल में मनोज का इलाज अच्छा किया गया, लेकिन उनके अस्पताल के डॉक्टरों की और से किसी तरह की कोई लापरवाही नहीं बरती गई। उनकी मानें तो यह आरोप भी गलत है कि मरीज के मरने के बाद भी ऑक्सीजन लगाया गया था। 



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