Friday, November 30, 2018

भारी भरकम स्कूल बैग के बोझ से बेहाल बचपन, सरकारी स्कूल ही उडा रहे आदेशों की धज्जियां

फरीदाबाद(Abtaknews.com दुष्यंत त्यागी )30 नवंबर,2018; किताबों के तनाव में बचपन मुरझा रहा है। भारी भरकम स्कूल बैग के तले मासूमों की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही है। केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद स्थिति बदली नहीं है। केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्रालय ने देश के सभी राज्यों को स्कूलों में बैग का बजन कम करने और पहली व दूसरी क्लास के बच्चों को होमवर्क न देने का निर्देश दिया है, मगर फरीदाबाद में सरकारी स्कूल ही सरकारी आदेशों की धज्जियां उडा रहे हैं। यहां सरकारी स्कूलों में छोटे- छोटे बच्चे आज भी बडे बडे बैग कंधों पर लटकाकर ले जाते हुए दिखे तो वहीं पहली और दूसरी क्लास के बच्चों को अध्यापकों ने होमवर्क दे डाला। 
दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी एनसीआर का अहम शहर फरीदाबाद जहां सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के कोई मायने नहीं हैं। यहां नियम भी हस्कूल वालों के और कानून भी इन्ही का चलता हैं। आपको आज भी समूचे जिला फरीदाबाद में छोटे-छोटे बच्चों की पीठ पर लदे हुए भारी भरकम बड़े-बडे बैग दिखाई दे जाएंगे। केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय के सख्त निर्देष के बाद भी सरकारी स्कूल ही सरकार के आदेशों की धज्जियां उडा रहे है। स्कूलों में बच्चों के पीठ पर बस्ते का बोझ एक बड़ा मुद्दा रहा है। अभिभावकों ने जहां इसे लेकर चिंता जताई है, वहीं डॉक्टरों ने भी बच्चों की सेहत की दृष्टि से इसे सही नहीं बताया है। बस्ते के बोझ को कम करने को लेकर समय-समय पर संबंधित विभागों की ओर से निर्देश भी जारी होते रहे हैं। केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय ने इस संबंध में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश जारी किए हैं। इसमें राज्य सरकारों व केंद्र शासित प्रदेशों से कहा गया है कि वे स्कूलों में विभिन्न विषयों की पढ़ाई और स्कूल बैग के वजन को लेकर भारत सरकार के निर्देशों के अनुसार नियम बनाएं। इसमें कहा गया है कि पहली से दूसरी कक्षा के छात्रों के बैग का वजन 1.5 किलोग्राम से अधिक नहीं होना चाहिए। इसी तरह तीसरी से 5वीं कक्षा तक के विद्यार्थियों के बैग का वजन 2-3 किलोग्राम, छठी से 7वीं के बच्चों के बैग का वजन 4 किलोग्राम, 8वीं तथा 9वीं के छात्रों के बस्ते का वजन 4.5 किलोग्राम और 10वीं के छात्र के बस्ते का वजन 5 किलोग्राम होना चाहिए।
जिला फरीदाबाद में इन सरकारी आदेशों को किसी भी निजी स्कूल तो दूर की बात खुद सरकारी स्कूलों पर भी कोई फर्क नहीं पडा है, आज भी बच्चे भारी बैग लेकर स्कूल आ रहे हैं जहां पहली और दूसरी कक्षा के बच्चों को होमवर्क भी दिया जा रहा है। इस बारे में जब बच्चों से बात की गई तो उन्होंने अबतक न्यूज़ पोर्टल टीम को बताया कि उनके बैग में अभी भी वजन होता है जिससे उन्हें सडक पार करने और चलने में खासी दिक्कत होती है। केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय के निर्देष पर सरकार स्कूल की अध्यापिका ने जबाब देते हुए कहा कि सरकार के नियम तो बदलते रहते हैं, बच्चों के बैग अभी भी भारी है क्योंकि चार विषयों की किताबें, उनके साथ काॅपियां औैर फिर एक्सट्रा क्लासों की किताबें मिलाकर बजन बढ जाता है।
शहर के एक स्कूल के प्रिंसीपल कुंवरपाल ने अपनी पीठ थपथपाते हुए कहा कि उन्होंने सरकार के निर्देषों के बाद बच्चों के बैग का बजन कम कर दिया है, जब प्रिंसीपल साहब से पूछा गया कि सरकार के बच्चों के लिये कौन कौन से नियम आए एक बार बताएंगे तो उनकी बोलती बंद हो गई और कहने लगे कि उनकी डायरी में लिखे हुए हैं।


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