Friday, November 23, 2018

ना तो कोई हिंदू है और ना मुस्लमान - गुरु नानक देव


चंडीगढ़(abtaknews.com (अंशुल गर्ग 23 नवम्बर ,2018 ; हरियाणा सरकार द्वारा श्री गुरु नानक देव जी का 550वां जन्म शताब्दी दिवस 23 नवम्बर  को बड़े श्रद्धा, धूमधाम और उत्साह से मनाया जा रहा है। इस पवित्र अवसर पर हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर   लाल जिला नूंह में संगतों को श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश उत्सव की बधाई देंगे। इसके अलावा,सभी मंत्री, सांसद,विधायक और सभी विभागों के उपाध्यक्ष प्रदेश के अलग-अलग गुरुद्वारों में जाकर श्रद्धालुओं को श्री गुरु नानक देव जी के प्रकाश उत्सव के कार्यक्रमों में सम्मलित होंगे।
       (अंशुल गर्ग

सिख धर्म का सबसे बड़ा त्यौहार जगत गुरु व कलियुग के अवतार के रुप में पहचान रखने वाले सिखों के प्रथम गुरू नानक देव जी का गुरु पर्व 23 नवंबर  शुक्रवार गुरु प्रकाश पर्व के रूप में पंजाब के साथ पूरे भारत में धूमधाम से मनाया जाता है । गुरु नानक देवजी का जन्म 1469 ई में तलवंडी रायभोय नामक स्थान पर हुआ । सिख धर्म के अनुयायी गुरु नानक देव का जन्म प्रकाश उत्सव एवं गुरु पर्व के रूप में कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता हैं । तलवंडी अब ननकाना साहिब के नाम से भी जाना जाता है।
गुरु नानकदेव जी का प्रकाश ऐसे समय में हुआ था जब देश इतिहास के सबसे अँधेरे युगों में था।  उस समय अंधविश्वास एवं आडंबरों का बोलबाला था और धार्मिक कट्टरता तेजी से बढ़ रही थी।  गुरु नानक देव बचपन से ही आध्यात्मिक ज्ञान के प्रवर्तक थे उनका मानना था की यह संसार ईश्वर द्वारा बनाया गया है और हम सब ईश्वर के ही सन्तान है और ईश्वर का निवास हर किसी के नजदीक ही है जो हमे गलत सही का बोध कराते है।  गुरु नानकदेव एक समन्वयवादी संत थे। गुरु ग्रंथ साहब में सभी संतों एवं धर्मो की उक्तियों को सम्मिलित कर उन्होंने समन्वयवादी दृष्टिकोण का परिचय दिया। वह आजीवन परोपकार एवं दीन-दुखियों की सेवा में लगे रहे।
 गुरु नानक देव जी को अनेक नामों से जैसे  गुरु नानक, बाबा नानक और नानकशाह नामों से संबोधित करते हैं। गुरु नानक अपने व्यक्तित्व में दार्शनिक, योगी, गृहस्थ, धर्मसुधारक, समाजसुधारक, कवि, देशभक्त और विश्वबंधु - सभी के गुण समेटे हुए थे। इस पवित्र प्रकाश पर्व के दिन पंजाब सहित देश के सभी गुरुद्वारों में श्रद्धालु भक्त मत्था टेकने जाते है । इस दिन श्रद्धालु कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर पवित्र नदियों में स्‍नान भी करते हैं
गुरुनानक देव का प्रकाश पर्व---सिख धर्म के संस्थापक गुरुनानक देव के जन्मदिवस को प्रकाश पर्व उत्सव के रूप में मनाते हैं । प्रकाश पर्व की के दो दिन पहले से ही देश के सभी गुरुद्वारों से नगर कीर्तन निकाला जाता हैं, गुरु द्वारों को भरपूर फूलों और रोशनी से सजाया जाता हैं । श्री अखण्ड पाठ साहब की शुरूआत दो दिन पहले से ही प्रारंभ कर देते हैं जिसका समापन गुरुनानक देव गुरु पर्व यानी की कार्तिक पूर्णिमा को भोग डलेगा के साथ होता हैं । पूरे दिन भजन कीर्तन, कथा व्याख्यान, सेवा धर्म के बाद लंगर भी किया जाता हैं।
गुरु नानक साहिब की शिक्षाएं --नानक देव जी की दी हुई शिक्षाएं गुरुग्रंथ साहिब में मौजूद हैं। गुरु नानक साहिब का मानना था कि प्रत्येक व्यक्ति के समीप भगवान का निवास होता है इसलिए हमें धर्म, जाति, लिंग, राज्य के आधार पर एक दूसरे से भेदभाव नहीं करना चाहिए। उन्होंने बताया कि सेवा-अर्पण, कीर्तन, सत्संग और एक सर्वशक्तिमान परमेश्वर ही सिख धर्म की बुनियादी धारणाएं हैं।गुरु नानक जी ने अपने जीवन काल में एक उदार पथ की स्थापना की जिसे आज सिख धर्म के नाम से जाना जाता है। 38 साल की उम्र में सुल्तानपुर लोधी के पास स्थित वेन नदी में नहाते समय गुरु नानक ने भगवान का उपदेश सुना कि वह मानवता की सेवा करने के लिए खुद को समर्पित कर दें। उसके बाद जो पहला वाक्य उनके मुंह से निकला वह यह था कि ना तो कोई हिंदू है और ना मुसलमान  है। उसके बाद अपने जीवन काल में नानक ने दुनिया के कई धर्म स्थलों की यात्रा की थी जिसे चार उदासी के नाम से भी जाना जाता है। उपदेश दिया कि हर किसी को अपना जीवन ईमानदारी और किसी को भी किसी तरह का दर्द न देते हुए, धोखाधड़ी के बिना जीना चाहिए। गुरु नानक जी ने अपनी अन्य शिक्षाओं में यह कहा कि सत्य को बिनी किसी झिझक और भय के बोलना चाहिए।गुरु नानक जी ने अपने सभी अनुयायियों को यह सलाह दी थी कि किसी में भी मृत्यु का डर नहीं होना चाहिए, क्योंकि यह एक अटल सत्य है।
जैसा कि गुरु नानक देव जी का जन्म महान असमानताओं की अवधि के दौरान हुआ था और उस समय के दौरान महिलाओं को पुरुषों की तुलना में हीन समझा जाता था, लेकिन फिर भी गुरु नानक जी ने पुरुषों और महिलाओं की समानता के उपदेश दिए थे। गुरुजी ने यह भी कहा कि अहंकार बहुत खतरनाक है, इसलिए इसका त्याग कर देना चाहिए।

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