Monday, October 22, 2018

चुनाव आते ही केन्द्र सरकार को याद आई निजी स्कूलों की मनमानी, अभिभावक मंच ने बताया चुनावी स्टंट


फरीदाबाद 22 अक्टूबर(abtaknews.com) केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा है कि स्कूलों की मनमानी रोकने पर सीबीएसई नजर रखेगी। स्कूल प्रबंधक फीस के अलावा अन्य कोई राशि नहीं वसुलेंगे। जरूरत पड़ी तो दोषी स्कूलों की मान्यता रद्द करने की कार्रवाई की जाएगी। स्कूलों के अन्दर किताब काॅपी बेचने पर या अपनी बताई गई दुकान से खरीदने के लिए कहने पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। हरियाणा अभिभावक एकता मंच ने इसे आगामी चुनाव की मद्देनजर दिया गया एक चुनावी बयान बताया है। केन्द्र में भाजपा सरकार को कार्य करते हुये 4 साल से ज्यादा हो गये है लेकिन अभी तक केन्द्र सरकार ने निजी स्कूलों की लूटखसोट व मनमानी पर रोक लगाने के लिये कोई भी ठोस कार्यवाही नहीं की है। पूरे देश में अभिभावक निजी स्कूलों की मनमानी से परेशान है और सरकार के खिलाफ रोष प्रकट कर रहे हैं। अब चुनाव नजदीक आने पर केन्द्रीय शिक्षामंत्री अभिभावकों को लुभाने के उद्देश्य से ऐसा भ्रामक बयान दे रहें है। मंच के प्रदेश महासचिव कैलाश शर्मा ने कहा है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले चुनाव प्रचार के समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नवंबर 2016 में आगरा में ऐसा ही बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि स्कूलों में प्रवेश के समय नोट मांगे जाते हैं न देने पर बच्चों को प्रवेश नहीं दिया जाता लेकिन अब ऐसी व्यवस्था नहीं चलेगी केंद्र सरकार इसके लिए कुछ करने जा रही है मंच की ओर से जब प्रधानमंत्री कार्यालय में एक आरटीआई लगा कर प्रधानमंत्री के बयान के मद्देनजर शिक्षा के व्यवसायीकरण को रोकने के लिए जो भी प्रयास केंद्र सरकार ने किए हैं उसकी जानकारी मांगी थी लेकिन पीएम आफिॅस ने आज तक आरटीआई का कोई जवाब नहीं दिया है मजबूरन मंच की और से केन्द्रीय सूचना आयोग में अपील करके पीएम आफिॅस से जवाब दिलाने की गुहार की गई है जिस पर 16 अक्टूबर को सुनवाई हो चुकी है शीघ्र ही फैसला आने वाला है। मंच ने यह भी कहा है कि जिन नियम कानूनों की बात केन्द्रीय शिक्षामंत्री कर रहे हैं ऐसे नियम कानून सीबीएसई ने पहले से ही बना रखे हैं। मंच की ओर से कई बार सीबीएसई चेयरमैन को पत्र लिखकर निजी स्कूलों द्वारा सीबीएसई नियमों के उल्लंघन की जानकारी दी गई है लेकिन आज तक दोषी स्कूलों के खिलाफ सीबीएसई ने कोई भी उचित कार्यवाही नहीं की है।

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