Wednesday, October 31, 2018

सबसे ऊँचा सबसे न्यारा लौह पुरुष है सरदार हमारा, जन्मदिन पर विशेष

The tallest person is the iron man, Sardar, our special birthday

चंडीगढ़(अंशुल गर्ग) देश के पहले गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की १४३वीं जयंती के मौके पर देशवासियों को दुनिया की सबसे बड़ी प्रतिमा, यानी स्टैच्यू ऑफ यूनिटी की सौगात मिली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के नर्मदा जिले स्थित केवडिया में विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा का उद्घाटन किया है। हम इस प्रतिमा के साथ साथ सरदार पटेल के संपूर्ण व्यक्तित्व को आपके सामने रख रहे हैं आज का विश्लेषण देखने के बाद आपको ऐसा लगेगा कि दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा भी सरदार पटेल के व्यक्तित्व के सामने छोटी है। भारत सरकार ने सरदार पटेल के सम्मान में दुनिया की सबसे ऊँची प्रतिमा – स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का निर्माण किया है। १८२ मीटर ऊँची यह प्रतिमा देश को एक सूत्र में पिरोने वाले इस माहन नेता के लिए एक उचित सम्मान है।

लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल--देश में ५६२ रियासतों का एकीकरण करने वाले लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल का जन्म ३१ अक्टूबर, १८७५ को गुजरात के नाडियाड में उनके ननिहाल में हुआ था । वे खेड़ा जिले के कारमसद  निवासी झावेर भाई पटेल की चौथी संतान थे। उनकी माता का नाम लाडबा पटेल था।  उन्होंने प्राइमरी शिक्षा कारमसद में ही प्राप्त की. बचपन से ही उनके परिवार ने उनकी शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया।  उनके पिता जव्हेरभाई पटेल एक साधारण किसान और माता लाडबाई एक गृहिणी थी। वे बचपन से ही वे परिश्रमी थे, शुरू से ही खेती में अपने पिता की सहायता करते थे। सरदार पटेल ने पेटलाद की एन.के. हाई स्कूल से शिक्षा ली।सरदार वल्लभभाई पटेल का नाम लौह पुरुष कैसे पड़ा--सरदार वल्लभभाई पटेल स्वतंत्र भारत के उप प्रधानमंत्री के रूप में,भारतीय संघ के साथ सैकड़ों रियासतों का विलय किया। सरदार वल्लभभाई पटेल वकील के रूप में हर महीने हजारों रुपये कमाते थे। लेकिन उन्होंने देश की स्वतंत्रता के लिए लड़ने के लिए अपनी वकालत का काम छोड़ दिया। किसानों के एक नेता के रूप में उन्होंने ब्रिटिश सरकार को हार को स्वीकार करने के लिए मजबूर किया। ऐसे बहादुरी भरे कामो के कारण ही वल्लभभाई पटेल को लौह पुरुष कहा जाता है। बारडोली सत्याग्रह में अपने अमूल्य योगदान के लिये लोगो ने उन्हें सरदार की उपाधि दी। सरदार पटेल एक प्रसिद्ध वकील थे। उन्होंने अपनी पूरी ज़िन्दगी भारत को आजादी दिलाने में बितायी। आजादी के बाद ही सरदार वल्लभभाई पटेल भारत के उपप्रधानमंत्री बने और भारत को एक बंधन में जोड़ने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।स्कूल के दिनों से ही वे हुशार और विद्वान थे। घर की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बावजूद उनके पिता ने उन्हें १८९६ में हाई-स्कूल परीक्षा पास करने के बाद कॉलेज भेजने का निर्णय लिया था लेकिन वल्लभभाई ने कॉलेज जाने से इंकार कर दिया था।  फिर लगभग तीन साल तक वल्लभभाई पटेल घर पर ही थे और कठिन मेहनत करके बॅरिस्टर की उपाधी की और साथ ही में देशसेवा में कार्य करने लगे।वल्लभभाई पटेल एक भारतीय बैरिस्टर और राजनेता थे, और भारतीय राष्ट्रिय कांग्रेस के मुख्य नेताओ में से एक थे और साथ ही भारतीय गणराज्य के संस्थापक जनको में से एक थे। वे एक सामाजिक कार्यकर्ता थे जिन्होंने देश की आज़ादी के लिये कड़ा संघर्ष किया था और उन्होंने भारत को एकता के सूत्र में बांधने और आज़ाद बनाने का सपना देखा था।गुजरात राज्य में वे पले बढे। पटेल ने सफलतापूर्वक वकिली का प्रशिक्षण ले रखा था। बाद में उन्होंने खेडा, बोरसद और बारडोली के किसानो को जमा किया और ब्रिटिश राज में पुलिसकर्मी द्वारा किये जा रहे जुल्मो का विरोध उन्होंने अहिंसात्मक ढंग से किया।

वो हमेशा कहते थे –च्च्आपकी अच्छाई आपके मार्ग में बाधक है, इसलिए अपनी आँखों को क्रोध से लाल होने दीजिये, और अन्याय का सामना मजबूत हाथों से कीजिये।ज्ज्इस कार्य के साथ ही वे गुजरात के मुख्य स्वतंत्रता सेनानियों और राजनेताओ में से एक बन गए थे। उन्होंने भारतीय राष्ट्रिय कांग्रेस में भी अपने पद को विकसित किया था साथ ही उन्होंने  १९३४ और १९३७ के चुनाव में उन्होंने एक पार्टी भी स्थापित की थी। उन्होंने लगातार वे भारत छोडो आन्दोलन का प्रसार-प्रचार कर रहे थे।

ऐसे मिली सरदार की पदवी --बारडोली आन्दोलन की सफलता के उपलक्ष्य में ११ और १२ अगस्त को विजय दिवस मनाया गया। जिसमें वल्लभ भाई पटेल की सूझ-बूझ की भी प्रशंसा की गई। इसी आन्दोलन से जुड़ी महिलाओं ने वल्लभ भाई पटेल को च्च्सरदारज्ज् की उपाधि दी और इस तरह से वे  सरदार पटेल के नाम से प्रसिद्ध हुए।भारतीय के पहले गृहमंत्री और उप-प्रधानमंत्री के पद पर रहते हुए उन्होंने पंजाब और दिल्ली से आये शरणार्थियो के लिये देश में शांति का माहोल विकसित किया था। इसके बाद पटेल ने एक भारत के कार्य को अपने हाथो में लिया था और वो था देश को ब्रिटिश राज से मुक्ति दिलाना।भारतीय स्वतंत्रता एक्ट १९४७ के तहत पटेल देश के सभी राज्यों की स्थिति को आर्थिक और दर्शनिक रूप से मजबूत बनाना चाहते थे। वे देश की सैन्य शक्ति और जन शक्ति दोनों को विकसित कर देश को एकता के सूत्र में बांधना चाहते थे।पटेल के अनुसार आज़ाद भारत बिल्कुल नया और सुंदर होना चाहिए। अपने असंख्य योगदान की बदौलत ही देश की जनता ने उन्हें च्च्आयरन मैन ऑफ़ इंडिया – लोह पुरुषज्ज् की उपाधि दी थी। इसके साथ ही उन्हें च्च्भारतीय सिविल सर्वेंट के संरक्षकज् भी कहा जाता है। कहा जाता है की उन्होंने ही आधुनिक भारत के सर्विस-सिस्टम की स्थापना की थी।सरदार वल्लभभाई पटेल एक ऐसा नाम एवं ऐसे व्यक्तित्व है जिन्हें स्वतंत्रता संग्राम के बाद कई भारतीय युवा प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहते थे। लेकिन अंग्रेजो की निति, महात्मा गांधी जी के निर्णय के कारण देशवासियों का यह सपना पूरा नही हो सका था। आज़ादी के समय में एक शूरवीर की तरह सरदार पटेल की ख्याति थी। सरदार वल्लभभाई पटेल के जीवन से यह बात तो स्पष्ट हो गया थी की मुनष्य महान बनकर पैदा नही होता। अपने कर्मो से ही महान बनता है।   

नमन--सरदार पटेल मन, वचन तथा कर्म से एक सच्चे देशभक्त थे। वे वर्ण-भेद तथा वर्ग-भेद के कट्टर विरोघी थे। वे अन्तःकरण से निर्भीक थे। अपूर्व संगठन-शक्ति एवं शीघ्र निर्णय लेने की क्षमता रखने वाले सरदार पटेल, आज भी युवा पीढी के लिये प्रेरणा स्रोत हैं। कर्म और संघर्ष को वे जीवन का ही एक रूप समझते थे। भारत के देशभक्तों में एक अमूल्य रत्न सरदार पटेल को भारत सरकार ने सन १९९१ में च्भारत रत्नज् से सम्मानित किया आज सरदार वल्लभ भाई पटेल हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उन्हें हमेशा याद किया जाता रहेगा। 

मृत्यु: १५ दिसंबर १९५० को उनका निधन हुवा। सरदार वल्लभभाई पटेल की मृत्यु के बाद भारत ने अपना नेता खो दिया। सरदार वल्लभभाई पटेल जैसे दूसरे नेता को ढूंढना मुश्किल होगा, जिन्होंने आधुनिक भारत के इतिहास में इतनी सारी भूमिकाएं निभायीं। सरदार पटेल एक महान व्यक्ति थे, प्रदर्शन में महान, व्यक्तित्व में महान -भारत के इतिहास में रचनात्मक राजनीतिक नेता थे। महान नेता सरदार पटेल को शत शत नमन करते हैं।

loading...
SHARE THIS

0 comments: