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Monday, August 20, 2018

फरीदाबाद कोर्ट में युवा वकीलों को कानून और पत्रकारों को आईटी एक्ट की पुस्तकें फ्री में बांटी

  
फरीदाबाद-20 अगस्त(abtaknews.com)न्यायिक प्रक्रिया में सुधार के लिए फरीदाबाद जिला अदालत में बड़ी पहल की गई। न्यायिक सुधार संघर्ष समिति के अध्यक्ष और बार एसोसिएशन के पूर्व प्रधान एलएन पाराशर ने युवा वकीलों को कानून की किताबें बांटी गई। इसके साथ ही अदालत की खबरों को कवर करने वाले पत्रकारों को भी आईटी एक्ट की पुस्तकें वितरित की गई। इस अवसर पर बार एसोसिएशन के प्रधान बॉबी रावत सहित दर्जनों युवा वकील मौजूद रहे।
सेक्टर 12 स्थित फरीदाबाद बार एसोसिएशन के चेंबर में न्यायिक सुधार संघर्ष समिति के अध्यक्ष और बार एसोसिएशन के पूर्व प्रधान एलएन पाराशर एडवोकेट ने अदालत में पीड़ितों का केस लड़ने के लिए प्रेक्टिस कर रहे युवा वकीलों के लिए ढाई सौ क़ानून की पुस्तकें मुफ्त में वितरित की। पुस्तकें लेने पहुंचे युवा वकीलों में पुरुषों के साथ साथ काफी संख्या में युवा महिला वकील भी शामिल हुई।
इसके अलावा अदालत की खबरें कवर करने वाले पत्रकारों को भी आईटी एक्ट से संबंधित किताबें बांटी गई। ताकि अदालत की खबरों को प्रकाशित करने या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में दिखाने में उन्हें मदद मिल सके।
न्यायिक सुधार संघर्ष समिति के अध्यक्ष एलएन पाराशर का कहना है कि शुरू में जब युवा वकील केस लड़ने के लिए अदालत में पहुंचते हैं तो कई बार कानून की जानकारी पूरी ना होने के चलते सही ढंग से अपने मुवक्किल की पैरवी नहीं कर पाते। इसी को ध्यान में रखते हुए फरीदाबाद जिला अदालत में समिति की तरफ से पहल की गई है और उन्हें कानून की पुस्तक देकर युवा वकील सही पैरवी कर सकें, इसके लिए उन्हें प्रेरित भी किया गया है। इसके साथ ही कई बार पत्रकारों के सामने भी अदालत की खबरों को लेकर असमंजस की स्थिति होती है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए आईटी एक्ट की पुस्तकें पत्रकारों को भी दी गई हैं ताकि अदालत की खबरों को सही ढंग से पेश किया जा सके।
कानून की किताबें लेने पहुंचे युवा वकीलों ने न्यायिक सुधार संघर्ष समिति के इस पहल को सराहते हुए कहा कि कई बार अनुभव ना होने के चलते युवा वकील अदालत में सही ढंग से केस लड़ नहीं पाते थे लेकिन अब आईपीसी और अन्य कानून से संबंधित जानकारी इन किताबों के द्वारा युवा वकील हासिल कर सकेंगे। इन्होंने कहा कि अदालत में बनी लाइब्रेरी में रखी किताबों का अदालत के समय पर तो उपयोग किया जा सकता था लेकिन अब मुफ्त में किताबें मिलने के बाद वे उन्हें घर ले जाकर भी उनका अध्ययन कर पाएंगे ताकि न्यायिक प्रक्रिया को और सही ढंग से आगे बढ़ाया जा सके।

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