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Sunday, February 11, 2018

सूरजकुंड मेले में गुलाब देवी युवा पीढ़ी को आटा चक्की के बारे में बता रहीं

Gulab Devi has been telling the younger generation about the dough mill at Surajkund Fair.

फरीदाबाद 11 फरवरी(abtaknews.com)पुराने जमाने में घरों में अनाज पीसने के लिए हाथ से चलने वाली आटा चक्की का प्रयोग किया जाता था, लेकिन अब इसका प्रयोग लगभग समाप्त सा हो गया है। चक्की अब सिर्फ अतीत की एक वस्तु होकर रह गई है, लेकिन 32वें सूरजकुंड मेले में आईं गुलाब देवी बच्चों को अपनी इस अतीत की आटा-चक्की के बारे में बता रही हैं। उनकी यह आटा चक्की विदेशी टूरिस्ट के साथ-साथ बच्चों व युवाओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। बच्चे व पर्यटक इसके साथ फोटो खिंचवाते हैं। वे इसके बारे में जानकारी लेती हैं। इस चक्की को मेले में लेकर आई हैं राजस्थान से गुलाब देवी व उनके पति मदन। उन्होंने कहा कि 1987 से जब से मेला शुरू हुआ, तब से यह चक्की मेले में आ रही है।
शिल्प कला का कुंभ माने जाने वाले सूरजकुंड मेला विरासत संभालने का गवाह बन रहा है। नई पीढिय़ां तेजी से अपने मां-पिता के पुश्तैनी कामों को संभाल रही हैं। विभिन्न कला को पीढ़ी दर पीढ़ी संजोने का यहां नायाब उदाहरण देखने को मिल रहा है। मदनलाल और पुत्रवधू गुलाब देवी बताते हैं कि बेकार कपड़ों से राजस्थानी खिलौने बनाने का काम है। एक चरखा लेकर दोनों आए हैं। यह आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। मदनलाल कहते हैं कि हरियाणा पर्यटन विभाग की बदौलत उनकी मां को हर साल अपनी कला दिखाने का मौका मिलता था। उसे बेसब्री से मेले का इंतजार रहता था। लेकिन आज वे हमारे बीच नहीं हैं, उनकी यादें हैं। मैं अपने आप को अन्य से थोड़ा भाग्यशाली समझता हूूं कि इस तरह मेले में कला प्रदर्शन का मौका मिल जाता है। मैं इसके लिए हरियाणाा सरकार व पर्यटन विभाग का आभारी हूं।

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