Thursday, October 4, 2018

शिव कॉलोनी की गली नंबर-4 में चली रही श्रीमद् भागवत कथा में प्रवचन करते रामलोचन पाराशर



पलवल(abtaknews.com): श्रीधाम वृन्दावन से पधारे श्रधेय रामलोचन पाराशर जी ने कहा कि शास्त्रों के अनुसार मोक्ष प्राप्ति के तीन मार्गो में से भक्ति एक श्रेष्ठ एवं सरल मार्ग है। भक्ति का एक अर्थ पूजा भी होता है। भक्ति की उत्पत्ति ही मान सेवायाम् धातु से होती है।भक्त के अंदर तीन बातों का होना आवश्यक है, सत्संग, सेवा और सुमिरन। शिव कॉलोनी की गली नंबर-4 में चल रही श्रीमद भागवत कथा के तीसरे दिन बृहस्पतिवर को व्यास पाराशर ने कहा कि भक्तों से कहा आप ताजमहल को 1 या 2 बार से ज्यादा देखने की इच्छा नहीं होगी। परंतु वृन्दावन बांके बिहारी के दर्शन एक बार कर किए तो व्याकुलता बढ़ती चली जाएगी फिर हज़ार बार दर्शन करने पर भी व्याकुलता कम नही होती है।
इस दौरान रामलोचन पाराशर ने कपिल देवहूति का अद्भुत प्रसंग सुनाते हुए कहा कि माता देवहूति के प्रश्न करने पर की ये मेरी इंद्रियां मुझे परेशान करती है। इस पर कपिल भगवान ने कहा माता ये इंद्रियों का दोष नही इनके राजा मन का दोष है। यह मन बस में हो गया तो इंद्रियां स्वत ही बस में हो जाएंगी। मन ही क्लेश का कारण होता है मन के हारे हार है,मन के जीते जीत मन ही मिलावत श्याम सौ, मन ही करावत फजीत या मन की गति अटपटी, छटपट लखे न कोई, जब मन की खटपट मिटे तो,झटपट दर्शन होय, इस मन को संसार मे लगाओगे तो मन बंधन में फस जाएगा। यहीं मन परमात्मा में लगाओगे तो कल्याण कर देगा। जैसे एक चाबी ताले के अंदर इधर घुमाते हो तो ताला बंद हो जाता है उसी चाबी को विपरीत घुमाओ तो ताला खुल जाता है। विश्राम समय में भक्त प्रह्लाद के ऊपर नृसिंग भगवान की कृपा का वर्णन कर अद्भुत झांकी के दर्शन कराकर आरती गान हुआ।  कथा के मुख्य आयोजक रामकिशन शर्मा पत्नी तारा देवी, कामिनी यादव, लच्छो देवी गर्ग, डालचंद शर्मा, तेज़ शर्मा, मुकेश शर्मा, महेश शर्मा,प्रेमचंद शर्मा, सतवीर शर्मा, शारदा देवी शशि एवं मंजू मौजूद रहीं।

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