Tuesday, September 4, 2018

जीवन को उद्देश्यपूर्ण बनाओ, जीवन का लक्ष्य निर्धारित करोः मुकुल कानिटकर



फरीदाबाद, 4 सितम्बर।  वाईएमसीए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, फरीदाबाद द्वारा बीटेक प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों के लिए चलाये जा रहे इंडक्शन कार्यक्रम को भारतीय शिक्षण मंडल के राष्ट्रीय संगठन मंत्री मुकुल कानिटकर ने संबोधित किया तथा अपने प्रेरक व्याख्यान में उन्होंने विद्यार्थियों को शिक्षा के माध्यम से जीवन उद्देश्यों को पूरा करने के लिए प्रेरित किया।
कुलपति प्रो. दिनेश कुमार की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुकुल कानिटकर ने विद्यार्थियों को जीवन लक्ष्य खोजने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का लक्ष्य परीक्षा नहीं अपितु ज्ञान अर्जित करना होना चाहिए। कानिटकर ने कहा कि विश्वविद्यालय में शिक्षा ग्रहण करने आया प्रत्येक विद्यार्थी अपने जीवन के उस पड़ाव में है, जहां से जीवन का उद्देश्य तय होता है। इसलिए, प्रत्येक विद्यार्थी को अपने जीवन का उद्देश्य अथवा लक्ष्य पता होना चाहिए। उन्होंने कहा कि उद्देश्य कभी भी स्वार्थ-पूर्ण नहीं होना चाहिए। निःस्वार्थ उद्देश्यों से किया गया कार्य ही व्यक्ति को मूल्यवान बनाता है। राष्ट्रवाद से प्रेरित अपने व्याख्यान में कानिटकर ने महात्मा गांधी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, एपीजे अब्दुल कलाम तथा वीर सावरकर जैसे महापुरूषों के प्रसंगों का हवाला भी दिया।
विद्यार्थियों को इनोवेशन और उद्यमशीलता के लिए प्रेरित करते हुए कानिटकर ने कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी में कुछ नया करने की अनंत संभावनाएं है और इन संभावनाओं की खोज करना व पता लाना पहला कदम है। प्रत्येक विद्यार्थी का प्राकृतिक गुण उनकी विशिष्टता है। इस विशिष्टता का पता लाना दूसरा कदम है। इसके बाद, विद्यार्थी जीवन का उद्देश्य तय करें कि समाज में किस प्रकार योगदान दे सकते है।इस कार्यक्रम का संचालन डीन स्टूडेंट वेलफेयर डाॅ. नरेश चैहान की देखरेख में कार्यक्रम संयोजक डाॅ. सोनिया बंसल द्वारा किया जा रहा है। इस अवसर पर कुलसचिव डाॅ. संजय कुमार शर्मा भी उपस्थित थे।

लैंगिक समानता को लेकर बने संवेदनशील, करें खुलकर बातः प्रो. रंजना अग्रवाल
वाईएमसीए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, फरीदाबाद में चल रहे इंडक्शन कार्यक्रम के दूसरे सत्र को कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय के महिला अध्ययन अनुसंधान केन्द्र की निदेशक प्रो. रंजना अग्रवाल ने संबोधित किया तथा विद्यार्थियों को लैंगिक समानता को लेकर संवेदनशीलता अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि समाज में लैंगिक समानता को लेकर खुलकर बात करने की आवश्यकता है।
‘शांति एवं विकास के लिए लैंगिक समानता तथा महिला सशक्तिकरण’ विषय पर बोलते हुए प्रो. रंजना अग्रवाल ने विद्यार्थियों को कार्यस्थल पर महिला यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध तथा निवारण) अधिनियम 2003 के प्रावधानों से भी अवगत करवाया तथा लैंगिक समानता विषय पर विद्यार्थियों के प्रश्नों को उत्तर भी दिया। उन्होंने बताया कि महिलाओं तथा बालिकाओं के लिए विज्ञान में पूर्ण पहुंच, समानता तथा भागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से 11 फरवरी को अंतर्राष्ट्रीय महिला एवं बालिका विज्ञान दिवस का आयोजन किया जाता है। प्रो. रंजना अग्रवाल ने विश्वविद्यालय प्रशासन से आग्रह किया कि विश्वविद्यालय में महिलाओं की विज्ञान में भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए यह दिवस वार्षिक रूप मनाया जाये।

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