Saturday, September 1, 2018

गुर्जर प्रतिहारो की धरोहर है मुरैना के बटेश्वर मंदिर :- के के मुहम्मद

नई दिल्ली 01 सितंबर,2018 (abtaknews.com)इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज के द्वारा कंज़र्वेशन ऑफ़ टेम्पल्स इन चम्बल वैली पर सेमिनार रखा गया । कार्येक्रम की अध्यक्ष्ता इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज के चेयरमैन रिटायर्ड मेजर जनरल एल.के.गुप्ता ने की । इस सेमिनार में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के पूर्व क्षेत्रीय निदेशक (उत्तर) के के मुहम्मद ने बताया की इन मंदिरो का निर्माण गुर्जर प्रतिहारो ने नौवीं शताब्दी में करवाया था । भूकंप और विदेशी आक्रांताओ के कारन ये खंडर में तब्दील हो गए थे। ये देश की सबसे बड़ी 200  मंदिरो की श्रंखला है  । इनके जीर्णोद्धार में डाकू निर्भय सिंह गुर्जर ने उनकी सहायता की । मंदिर परिसर के पुनर्निर्माण में कई समस्याएं थीं  सबसे बड़ी समस्या ये थी कि मंदिर के अवशेष एक बड़े क्षेत्र में फैले हुए थे । मंदिर के हिस्सों को ढूंढना और उनको एक दूसरे के साथ जोड़ना अपने आप में एक चुनौती थी । उन्होंने बताया की दस साल पहले 80 मंदिरो का पुनर्निर्माण हो चूका था मगर अब भी 120 मंदिर शेष बचे है जिनके लिए गुर्जर प्रतिहार समाज के लोग प्रयास कर रहे है ।
Gurjar Prataharo is the heritage of Murarena's Bateshwar Temple - K. Muhammad

इस अवसर पर सेमिनार के दुसरे वक्ता अखिल भारतीय वीर गुर्जर महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुराग गुर्जर ने बताया की भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने उन्हें चिट्ठी देके बताया है की बाकि बचे हुए 120 मंदिरो का पुनर्निर्माण कार्य साल 2018 -19 में शुरू हो जायेगा ।  इस अवसर पर गुर्जर प्रतिहार समाज के आर्टिस्ट उदित नारायण बैसला ने  के के मुहम्मद को उनकी तारो से बानी हुई पेंटिंग भेंट की । के के मुहम्मद ने समस्त गुर्जर समाज को अन्तरराष्ट्रीय गुर्जर दिवस गुर्जर प्रतिहार सम्राट मिहिर भोज की जयंती की हार्दिक शुभकामनाये दी । इस अवसर पर जिला फरीदाबाद से इतिहासकार त्रिभुवन सिंह पंवार, गौरव तंवर , पार्षद हेमा बैसला, दीपक गुर्जर ,महेश फागना,शैलेन्द्र कसना ,शेखर तंवर ,सतीश बैसला , मित्रपाल भड़ाना ,संतोष मावी,महेश लोहमोड़,मोहित बैसला , सोनी दायमा आदि मुख्या रूप से उपस्थित थे l 

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