Wednesday, September 5, 2018

आरक्षण विरोधी पार्टी ने 6 सितम्बर को भारत बंद का किया आवाहन



फरीदाबाद- 05 सितंबर(abtaknews.com)एससी एक्ट को 1989 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गाँधी ने लागू किया था जिसमे दो गवाहों के साथ घटना की जाँच होना आवश्यक था उसके बाद ही FIR दर्ज होने एवं 3 माह की कैद का प्रावधान था। मोदी सरकार द्वारा अप्रेल 2016 में एस एक्ट को मजबूत बनाने के लिए महत्त्व पूर्ण बदलाव किये गए जिसमे अपराधों की संख्या 22 से बढाकर 47 की गयी एवं गवाहों या जाँच अथवा मेडिकल कराने की आवश्यकता को समाप्त किया गया , इस संशोधन के अनुसार शिकायत मिलते ही गिरफ्तार कर सीधे जेल भेजने का प्रावधान किया गया। सुप्रीम कोर्ट ने मोदी सरकार के अध्यादेश पर रोक लगाते हुए विभिन्न पहलुओं पर विचार करने के बाद 20 मार्च को फैसला सुनाया किसी निर्दोष को जेल न भेजा जाए पर इसलिए सुचना मिलने के बाद DSP लेवल का अधिकारी जाँच करेगा तथा एक हफ्ते में जाँच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के विरुद्ध ही अभियोग दर्ज किया जाए। 
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 2 अप्रेल को कुछ संगठनो द्वारा भारत बंद का आवाहन किया गया और इस दौरान लगभग पुरे देश को बंधक बना लिया गया कई शहरो में तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएँ हुयी जिसपर मोदी जी ने स्वयं पहल कर अध्यादेश लाने और एससी एक्ट को और भी अधिक मजबूत बनाने का वायदा किया। प्रधानमंत्री मोदी जी ने इस बिल को और मजबूत बनाते हुए कई प्रावधान जोड़े जिनमे-शिकायत मिलते ही बिना किसी जांच, बना किसी की अनुमति, बिना मेडिकल करवाए गिरफ्तार कर सीधे जेल बेजा जाए,यदि शिकायत करता अपनी शिकायत वापस भी लेता है तो भी याची को 6 महीने तक जमानत न दी जाए,अपराध की गंभीरता या आरोपों की कटुता के अनुसार शिकायत करता को 25 हजार से 8 लाख 50 हजार तक की प्रोत्साहन राशी केंद्र सरकार द्वारा प्रदान की जाएगी जैसे प्रावधान कर प्रधानमंत्री मोदी जी ने स्वयं अगुवाई करते हुए 3 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को रद्द करने के लिए लोक सभा में एससी एसटी विधेयक पेश किया जिसे बिना चर्चा या बहस के बीजेपी /कांग्रेस / सपा/ बसपा/ TMC/ JDU/ RJD/शिव सेना/ अकाली सभी पार्टियों के सांसदों ने अपना वोट देकर 100 % बहुमत से पास कर दिया तथा 9 अगस्त को राज्यसभा में पेश कर राज्य सभा से भी पूर्ण बहुमत से बिना चर्चा या बहस सभी राजनितिक दलों ने पूर्ण बहुमत से पास कर दिया।  
आरक्षण विरोधी पार्टी ने 9 अगस्त को संसद मार्ग पर इस बिल का विरोध प्रदर्शन आयोजित किया और प्रधानमंत्री एवं महामहिम राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपे सरकार द्वारा आरक्षण विरोधी पार्टी के विरोध को कुचलने के लिए कुछ दलित संगठनो, बीएसपी नेताओं और बीजेपी सरकार में बैठे मंत्रियों द्वारा 10 अगस्त को संसद मार्ग थाना में एक झूठी FIR दर्ज कर आरक्षण विरोधी पार्टी के राष्ट्रिय संयोजक दीपक गौड़ सहित 11 लोगों के विरुद्ध एससी एक्ट में अभुयोग दर्ज कर 10 अगस्त की रात्रि को ही निर्दोष दीपक गौड़ को हिरासत में ले लिया जहाँ से 11 अगस्त को तिहाड़ जेल भेज दिया गया था
अदालत के मांगे जाने के बाद भी संसद मार्ग थाना पुलिस ने अभीतक कोई साक्ष्य पेश नहीं किया है की किस आधार पर एससी एक्ट के तहत मुकद्दमा दर्ज किया गया, पुलिस तफ्तीश में दी गयी रिपोर्ट के अनुसार जो घटना स्थल व् समय दिया जा रहा है वहां उस घटना के समय आरक्षण विरोधी पार्टी के राष्ट्रिय संयिजक दीपक गौड़ मौजूद ही नहीं थे वे उसी संसद मार्ग थाने के ड्यूटी आफिसर की पुलिस जीप में बैठ कर प्रधान मंत्री कार्यालय ज्ञापन देने गए हुए थे परन्तु बिना cctv फुटेज चेक किये या अपने ही थाने के संसद मार्ग मौके पर तैनात ड्यूटी आफिसर से भी बिना पूंछे जाँच अधिकारी ने आरक्षण विरोधी पार्टी के राष्ट्रिय संयोजक का नाम शामिल कर उनको एससी एक्ट में गिरफ्तार कर जेल भेजा है। 
आरक्षण विरोधी पार्टी ने एससी एक्ट के काले कानून को समाप्त किये जाने के लिए 6 सितम्बर को भारत बंद का आयोजन किया है आरक्षण विरोधी पार्टी के पदाधिकारी विभिन्न सामाजिक संगठनों के साथ बिहार, राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, हिमाचल, उत्तरप्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, महाराष्ट्र, पश्चिमी बंगाल, जम्मू कश्मीर में शांतिपूर्ण बंद का आवाहन कर रहे हैं और समाज से स्वेच्छा से इस बंद को सहयोग करने की अपील कर रहे हैं आरक्षण विरोधी पार्टी के कार्यकर्ताओं को हिंसा और आक्रोश से बचने और किसी भी दुकानदार को दबाब नहीं देने और शांति पूर्ण प्रदर्शन करने के निर्देश पार्टी के राष्ट्रिय अध्यक्ष संजय शर्मा द्वारा दे दिए गए हैं। साथ ही मोदी सरकार और सभी विपक्षी दलों को चुनौती दी गयी है कि यह बंद सिर्फ एक दिवसीय नहीं है बल्कि लगातार इस प्रतिरोध को जारी रखा जायेगा यदि 2 महीने के अन्दर एससी एक्ट और जातिगत आरक्षण पर सरकार सकारात्मक रुख नहीं अपनाती है तो आरक्षण विरोधी पार्टी के पुरे देश में अपने उम्मीदवार खड़े करेगी और जहाँ आरक्षण विरोधी उम्मीदवार नहीं होगा वहां नोटा का प्रचार किया जाएगा और आरक्षण विरोधी पार्टी खुद इतनी ताकत हासिल करेगी तथा संसद में पहुंचकर आरक्षण और एससी एक्ट का अध्याय समाप्त करेगी

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