Wednesday, August 29, 2018

प्रो.सुधा भारद्वाज को भीमा कोरेगांव मामले में महाराष्ट्र पुलिस ने फरीदाबाद से किया गिरफ्तार

फरीदाबाद (abtaknews.com) 28 अगस्त।  प्रोफेसर सुधा भारद्वाज को भीमा कोरेगांव मामले में महाराष्ट्र पुलिस द्वारा फरीदाबाद से गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तारी के बाद फरीदाबाद की सुधा भारद्वाज को जिला अदालत में सिविल जज साक्षी सैनी की अदालत में पेश किया गया। महाराष्ट्र पुलिस ने ट्रांजिट रिमांड पर देने की मांग की है। सुधा भारद्वाज एडवोकेट नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी दिल्ली में प्रोफेसर हैं।भीमा कोरेगांव प्रकरण में इरोज गार्डन के एक फ्लैट से महिला अधिवक्ता सुधा भारद्वाज को देशद्रोह के आरोप में महाराष्ट्र व फरीदाबाद पुलिस ने संयुक्त रूप से गिरफ्तार किया है। 53 वर्षीय सुधा नामक महिला अधिवक्ता को फरीदाबाद कोर्ट में पेश किया।  
एडवोकेट सुधा भारद्वाज के साथ आए साथियों ने कहा कि सुधा भारद्वाज को झूठा फंसाया जा रहा है। वह एक मानव अधिकार कार्यकर्ता हैं और दलित, गरीब और मजदूरों की लड़ाई लड़ती हैं। उनकी आवाज उठाती है। सुधा को जिला अदालत में सिविल जज साक्षी सैनी की अदालत में पेश किया व ट्रांजिट रिमांड पर सौंपने की मांग की। साक्षी सैनी की कोर्ट ने पुणे पुलिस को मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) की अदालत में जाने को कहा। देर शाम को सीजेएम अशोक शर्मा के निवास पर हुई दोनों पक्षों की ओर से हुई सुनवाई के बाद अदालत ने सुधा भारद्वाज को ट्रांजिट रिमांड पर पुणे पुलिस को सौंप दिया।
देर रात हाई कोर्ट ने कहा कि ट्रांजिट रिमांड नहीं बनती है। इसके बाद सीजेएम अशोक शर्मा ने सुधा को ट्रांजिट रिमांड पर भेजने का अपना फैसला पलटते हुए उन्हें 30 अगस्त तक उनके ही घर में फरीदाबाद पुलिस की निगरानी में रखने का आदेश दिया। अदालत से बाहर आते हुए सुधा भारद्वाज ने कहा कि वे हमेशा गरीब और मजदूर वर्ग की आवाज उठाती रही हैं। उनकी आवाज दबाने का प्रयास किया जा रहा है। जिस मामले में उन्हें गिरफ्तार किया गया है, उस एफआइआर में उनका नाम भी नहीं है।
आइआइटी कानपुर से पास आउट हैं सुधा भारद्वाज
सुधा भारद्वाज गणित से एमएससी हैं। कानपुर से आइआइटी क्लीयर करने वाली सुधा बीते 30 वर्षों से ट्रेड यूनियनों और श्रमिकों के लिए काम करती रही हैं। वह भिलाई के श्रमिक नेता शंकर गुहा नियोगी के साथ जनमुक्ति मोर्चा में भी सक्रिय रहीं हैं। सुधा की मां कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में इकोनामिक्स की प्रोफेसर थीं लेकिन उन्होंने 18 वर्ष की उम्र में अमेरिकी नागरिकता छोड़ दी और भारत चली आईं। दो वर्ष पूर्व तक सुधा छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में रहती थीं, लेकिन वर्तमान में नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी दिल्ली में बतौर विजिटिंग प्रोफेसर कार्यरत हैं। वह पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज की राष्ट्रीय सचिव हैं। वर्ष 2007 से बिलासपुर स्थित छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में वकालत कर रही हैं और छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की एक सदस्य के रूप में मनोनीत हैं। इसके अलावा कई मानवाधिकार रक्षकों के पक्ष में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में भी पैरवी करती रही हैं। हाल ही में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने कोंडासावली गांव (सुकमा, छत्तीसगढ़) में एक मामले की जांच में उनकी सहायता मांगी थी।

loading...
SHARE THIS

0 comments: