Thursday, August 2, 2018

तिगांव की गऊशालाओं में एक साल में हुई 225 गायों की अकाल मौत; ललित नागर

Due to the famine of 225 cows that occurred in one year in the Gauhas of Tigaon; Lalit Nagar

फरीदाबाद(abtaknews.com ) तिगांव विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली पांच गऊशालाओं में गायों की निरंतर हो रही मौत और उनके शवों को गऊशालाओं में दबाए जाने की मिल रही शिकायतों के मद्देनजर आज क्षेत्रीय कांग्रेसी विधायक ललित नागर ने गांव मोठूका स्थित राधेकृष्ण गऊशाला का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान विधायक श्री नागर को वहां पर 4 गायें मृत अवस्था में मिली, जबकि 3 गायें अंतिम सांसें ले रही थी, जबकि कई गायों की हड्डियां गऊशाला परिसर में फैली हुई नजर आई। विधायक उस समय हरप्रभ रह गए, जब उन्होंने गऊशाला का रजिस्टर चैक किया तो उसमें पाया कि इस गऊशाला में 215 गायें थी, जिनमें से एक वर्ष के दौरान केवल 60 गायें ही जीवित बची है, जबकि 146 गायें मर चुकी है।  इस पर विधायक ने वहां मौजूद कर्मचारियों को जमकर लताड़ते हुए गायों की मौतों का कारण पूछा तो कर्मचारियों ने बताया कि यहां पर गायों के चारे, भूसे व तूड़े की काफी कमी रहती है वहीं गायों की देखभाल के लिए डाक्टरों व दवाईयों का भी अभाव है और इसको लेकर वह कई बार केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर के साथ-साथ गौरक्षा प्रकोष्ठ के चेयरमैन भानीराम मंगला सहित प्रशासनिक अधिकारियों को इस बारे में अवगत करवा चुके है परंतु किसी ने भी गऊशाला की सुध तक नहीं ली है, यहां तक कि उन्हें भी तीन-तीन माह से वेतन नहीं दिया जा रहा है। विधायक ललित नागर ने जब गऊशाला का बारीकि से निरीक्षण किया तो वहां देखा कि गायों के रखरखाव की यहां कोई उचित व्यवस्था नहीं है, गऊशाला में चारों ओर दलदल बना हुआ है और गाय जहां बैठी है वहीं भूसा पड़ा है, उसी पर वह गोबर कर देती है और उसी भूसे को खा लेती है। गायों की इतनी दयनीय हालत देखकर विधायक ललित नागर ने भाजपा पर बड़ा प्रहार करते हुए कहा कि गाय, गंगा और गीता पर राजनीति करने वाली भाजपा सरकार में गऊओं का संरक्षण करने में पूरी तरह से नाकाम साबित हो रही है। सरकार ने वोट बैंक की खातिर गऊशालाएं तो खोल दी परंतु इन गऊशालाओं में चारें व गायों के रखरखाव की कोई व्यवस्था तक नहीं की, जिसके चलते यह गऊशालाएं गायों के लिए किसी जेल से कम नहीं है, इससे अच्छा तो हमारी गायें माता अगर जंगल में घूमे तो वहां ज्यादा दिन जीवित रहेंगी। उन्होंने कहा कि केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर ने 11 महीने पहले इस गऊशाला का उद्घाटन तो कर दिया परंतु उसके बाद आज तक यहां रहने वाली गायों की सुध तक नहीं ली। यहां तैनात कर्मचारी भी बार-बार मंत्री जी के यहां गायों की दुर्दशा का रोना रो चुके है परंतु इसके बावजूद किसी प्रकार की कार्यवाही न होना भाजपा के झूठे गऊप्रेम को दर्शाता है, जिसके लिए प्रदेश की जनता इन्हें कभी माफ नहीं करेगी। विधायक ललित नागर ने कहा कि उनके विधानसभा क्षेत्र में मोठूका, फज्जूपुर, भूपानी, तिगांव व मंझावली सहित पांच गऊशालाएं बनी हुई है, जिनमें पिछले एक वर्ष के दौरान रखरखाव व चारे की कमी के चलते लगभग 200-225 गायों की मौत हो चुकी है और हैरानी की बात तो यह है कि अपने इन कृत्यों को छुपाने के लिए इन मरने वाली गायों को गऊशालाओं में गड्ढा खोदकर दबा दिया जाता है। इससे ज्यादा शर्म की बात भाजपा सरकार के लिए और कोई नहीं हो सकती। विधायक ललित नागर ने इन गऊओं की मौत के लिए सीधे तौर पर खट्टर सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए महामहिम राज्यपाल से मांग की कि खट्टर सरकार पर तुरंत गऊ हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए और नैतिकता के आधार पर मुख्यमंत्री मनोहर लाल और केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर को अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे देना चाहिए।  उन्होंने कहा कि आगामी 17 अगस्त से शुरु हो रहे विधानसभा के मानसूत्र सत्र के दौरान वह इन गायों की अकाल मौतों का हिसाब का मुद्दा जोरशोर से उठाकर मुख्यमंत्री से पूछेंगे कि जब सरकार गऊओं को चारा तक उपलब्ध नहीं करा सकती तो फिर इन गऊशालाओं को क्यों खोला गया। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि अगर सरकार ने इस मुद्दे पर उच्चस्तरीय जांच नहीं करवाई तो कांग्रेस पार्टी सडक़ों पर उतरकर जनांदोलन करने से भी गुरेज नहंी करेगी। 


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