Monday, August 20, 2018

हरियाणा के कर्मचारी 10 सितम्बर को विधानसभा कूच करेंगे ; सुभाष लाम्बा


फरीदाबाद, 20 अगस्त(abtaknews.com)सरकार की वादाखिलाफी और कर्मचारियों की मांगों की अनदेखी से खफा हरियाणा के कर्मचारी 10 सितम्बर को विधानसभा कूच करेंगे। सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के बैनर तले आयोजित इस कूच में सभी सरकारी, अर्ध सरकारी, सहकारी विभागों, बोर्डों, निगमों, विश्वविद्यालयों, नगरपालिकाओं, नगर परिषदों, सहकारी समितियों, पंचायत समितियों, पंचायती राज संस्थाओं और केन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा संचालित परियोजनाओं में कार्यरत कर्मचारी बड़ी संख्या में भाग लेंगे। यह जानकारी देते हुए सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के महासचिव सुभाष लाम्बा ने बताया कि सरकार की वादाखिलाफी और प्रदेश के कर्मचारियों की लंबित जायज मांगों के प्रति सरकार के घोर उपेक्षापूर्ण रवैये की जानकारी कर्मचारियों को देने के लिए 25 अगस्त से 7 सितम्बर तक प्रदेश में व्यापक जन संपर्क अभियान चलाया जाएगा, जिसमें सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा व इससे सम्बंधित विभागीय संगठनों के पदाधिकारी शामिल होंगे। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव ने 21 जुलाई को सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के शिष्टमंडल को आश्वासन दिया था कि 31 मई, 2018 के हाईकोर्ट के निर्णय से प्रभावित कर्मचारियों की नौकरी बचाने और विभिन्न विभागों में कार्यरत अनियमित कर्मचारियों को नियमित करने के लिए मानसून सत्र में हरियाणा रेगूलाईजेशन ऑफ सर्विस बिल-2018 को पेश कर पारित किया जाएगा। लेकिन अब सरकार ने यू टर्न लेते हुए ऐसा करने की बजाय हाईकोर्ट के निर्णय के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर करने का निर्णय लिया है। जिसको लेकर प्रभावित कर्मचारियों में बड़ी भारी नाराजगी है। सरकार की इस वादाखिलाफी के खिलाफ 23 अगस्त को सभी जिलों मे कन्वेंशन आयोजित कर प्रदर्शन किए जाएंगे। 
क्या है कर्मचारियों की प्रमुख मांगें : कर्मचारियों की प्रमुख मांगों मे विधायी शक्तियों का प्रयोग करते हुए हाईकोर्ट के निर्णय से प्रभावित कर्मचारियों की सेवाएं सुरक्षित करने और 240 दिन की सेवा पूरी कर चुके सभी प्रकार के अनियमित कर्मचारियों को नियमित करना, पुरानी पैंशन स्कीम व एक्सग्रेसिया रोजगार स्कीम को बहाल करना, बिना किसी देरी के मकान किराए भत्ते में जनवरी, 2016 से बढ़ोतरी करने, पंजाब के समान वेतनमान व पैंशन देने, सभी प्रकार के नियमित व अनियमित कर्मचारियों व उनके आश्रितों को वास्तविक खर्च पर आधारित कैशलेस मेडिकल सुविधा प्रदान करने, बिना किसी भेदभाव के समान काम-समान वेतन लागू करने, विभागीय यूनियनों के साथ किए गए समझौतों को हूबहू लागू करने, शिक्षा, स्वास्थ्य, जनस्वास्थ्य, परिवहन, बिजली आदि जनसेवा के विभागों में लागू की जा रही निजीकरण की नीतियों पर रोक लगाना, सरकारी विभागों में खाली पड़े लाखों पदों को भर्ती व प्रमोशन से भरना, आरक्षित श्रेणियों के बैकलॉग को विशेष भर्ती के द्वारा भरने, ठेकेदारों को बीच से हटाकर ठेकाकर्मियों को सीधा विभागों के रोल पर रखना, पैंशनर्ज को केन्द्र के समान पैंशन बढ़ोतरी के आदेश को लागू करते हुए उम्र बढऩे के साथ पैंशन बढ़ाने के फैसले को लागू करना आदि है।

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