Sunday, July 29, 2018

राज्य स्तरीय कार्यशाला में मनोचिकित्सकेां ने जानी रिकवरी तकनीक

Recovery technique known by psychiatrists at state level workshop
गुरुग्राम 29 जुलाई,2018(abtaknews.com) मानसिक बीमारी से ग्रस्त लोगों के स्वास्थ्य लाभ और पुनर्वास की आवश्यकताओं को समझने और ऐसी सेवाएं प्रदान करने की योजना विकसित करने के लिए हरियाणा के 15 जिलों के सरकारीअस्पताल के मनोचिकित्सकों और नैदानिक मनोवैज्ञानिकों का गुरुग्राम के संबंध हेल्थ फाउंडेशन (एसएचएफ) में एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गयाजिसमें सभी मनोचिकित्सकेंा कोमनोरोग के उपचार में काम  रही रिकवरी तकनीकी की जानकारी दी गई।

कार्यशाला की शुरूआत हरियाणा सरकार की स्वास्थ्य सेवाओं की निदेशक डॉ वीणा सिंह ने की।  डावीणा का विजन है कि हरियाणा में ऐसी सेवाएं प्रदान की जाएं। कार्यशाला का आयोजन संबंध हेलथ फाउंडेशन(एसएचएफद्वारा गुरुग्राम सेक्टर 31 में पॉलीक्लिनिक में किया गया।  वर्ष 2014 से एसएचएफ  और हरियाणा सरकार के  बीच एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए हैं।  इस एमओयू के अनुसार एसएचएफ स्किजोफ्रेनियाऔर द्वि-ध्रुवीय गंभीर मानसिक बीमारी वाले लोगों के लिए विभिन्न रिकवरी सेवाएं चला रहा है। हरियाणा शायद कुछ राज्यों में से एक है जो इस तरह की सामुदाय-आधारित सेवाओं का संचालन करता है।
डॉसिंह ने कहा कि अनुमान है कि  भारतीय आबादी का 1.9 प्रतिशत (राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण - 2016, निमहंससे अधिक लोग अपने जीवनकाल में गंभीर मानसिक विकार से पीड़ित हैं। हरियाणा में 5 लाख सेज्यादा लोग प्रभावित होते हैं। उन्होंने कहा कि मस्तिष्करसायनिक परिवर्तनों के कारणये बीमारियां लोगों के व्यवहार में प्रकट हेाती हैं और इसलिए इन्हें पहचानने में काफी समय लगता है। समाज में मानसिक बीमारीको कलंक माना जाता है। इसे बीमारी के रूप में  देख कर बुरे व्यवहारखराब लालन-पालन  या चरित्र की कमजोरी के रूप में देखा जाता है जिससे लोग इलाज के लिए आगे नहीं आते। समाज की पुरानी रुढ़वादी परंपरावाली सोच लोगों को इलाज कराने से रोकती है। एक बार इलाज शुरू करने के बाददवालोगों को उनकी स्थिति को स्थिर करने में मदद करती है। लेकिन तब तक मानसिक बीमारी से पीड़ित व्यक्ति कई वर्षों तक समाज सेअलग रह चुके होते हैं और अपने घरों और समुदाय के हिस्से के रूप में कार्य करने की अपनी क्षमता खो चुके होते हैं। पीड़ितों को परिवार और देखभाल करने वालों को व्यवहार में बदलावों का सामना करना मुश्किल लगता हैऔर उन्हें अपने आप को समाज से अलग करना पड़ता है। कई लोगों को जीवनभर ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ता हैजो उनके प्रियजनों की देखभाल करते हैं उन्हें शारीरिकभावनात्मकवित्तीय और सामाजिकजरूरतों का सामना करना पड़ता है।
स्वास्थ्य सेवाओं की निदेशक ने कहा कि एमएच अधिनियम की धारा 18 (5) (1) के अनुसार हम प्राथमिक स्वास्थ्यमाध्यमिक और तृतीयक स्वास्थ्य देखभाल सहित सभी स्तरों पर सामान्य स्वास्थ्य सेवा सेवाओं मेंमानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को एकीकृत करेंगे। उन्होंने कहा कि एमएच अधिनियम की धारा 18 (5) (डीके अनुसारहरियाणा सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि मानसिक बीमारी वाले किसी भी व्यक्ति को मानसिकस्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचने के लिए लंबी दूरी तय करने की आवश्यकता  हो। 
मरीजों और परिवारों को समुदाय के साथ एकीकृत करने में मदद करने के लिए पुनर्वास या स्वास्थ्य लाभ सेवाएं और देखभाल करने वाले की सहायता की आवश्यकता होती है। डॉ सिंह ने कहा कि एसएचएफ के साथहरियाणा के तीन साल के पायलट योजना  सफल रही है और हमने कनाडा में एक बहुत ही सफल मॉडल से प्राप्त जानकारियों का उपयोग किया है - जो उन्नत मानसिक स्वास्थ्य प्रणालियों के लिए जाना जाता है। अब हमहरियाणा के सभी जिलों में इसे सीखने पर काम कर रहे हैं।
गुरुग्राम सिविल अस्पताल पीएमओ डॉब्रह्मदीप सिंधु ने बताया कि एसएचएफ में उनके और उनके बीच की साझेदारी ने बड़ी संख्या में मरीजों को लाभान्वित किया है। उन्होंने कहा कि एसएचएफ ने गुरुग्राम के गुड़गांवगांवबसईगांधीनगर और झाड़सा के चार गांवों में सेवाओं का विस्तार किया था और इससे मदद मांगने वालों की दर में वृद्धि हुई है।
एसएचएफ में मानसिक स्वास्थ्य प्रमुख रीता सेठ ने मानसिक रोगियेां के लिए एसएचएफ में उपयोग की जाने वाली पद्धतियों और मानसिक मरीजों के स्वास्थ्य  लाभ  की कहानी,  परिवारों और ऐसी परिस्थितियों मेंमरीजों की देखभाल करने वालों और उनकी मदद करने वालों के साथ साझा किया। जैसा कि उसने कहामानसिक बीमारी कोई विकल्प नहीं हैलेकिन स्वास्थ्य लाभ ही इसका विकल्प है।
हरियाणा के मानसिक स्वास्थ्य रेाग विभाग के अतिरिक्त निदेशक डाविश्वनीत सिंह ने बताया कि मानसिक हेल्थकेयर अधिनियम, 2017 के तहत यह अनिवार्य है कि राज्य मानसिक बीमारी और उनके परिवारों के साथरहने वाले लोगों के लिए समुदाय आधारित सेवाएं प्रदान करेगा। एमएच अधिनियम की धारा 18 (4) (सीके अनुसार हरियाणा सरकार की और से सेक्टर 31 में ऐसे परिवारेा के सदस्यों के लिए देखभाल करने वालों को घरआधारित पुनर्वास (आउटरीच सेवाओंके लिए समर्थन प्रदान किया है। उन्होंने पुनर्वास सेवाएं भी प्रदान की हैं जो एमएच अधिनियम की धारा 18 (5) (बीके अनुसार समुदाय में और उनके परिवारों के साथ मानसिकबीमारी वाले व्यक्तियों का समर्थन करती हैं।
एसएचएफ ने एमएच अधिनियम की धारा 18 (4) (बीके अनुसार एक आश्रय आवास की भी सथापना की है और हरियाणा सरकार इस शिक्षा को राज्य के अन्य हिस्सों में ले जाएगी।
इस अवसर पर मानसिक बीमारी और दो देखभाल करने वालों के दो व्यक्तियों ने अपने अनुभवों को कार्यशाला में साझा किया। उन्होंने बताया कि एसएचएफ में स्वास्थ्य लाभ सेवा लेना शुरू होने से पहले उनकी जिंदगीकितनी निराशाजनक लग रही थी उन्होंने दोहराया कि इन सेवाओं का लाभ उठाने के बाद से उनके जीवन में सुधार हुआ है। फैमिली सेल्फ हेल्प ग्रुप मीटिंग में एक परिवार के सदस्य ने कहामैंने माता-पिता होने का चयनकिया थालेकिन देखभाल करने वाला नहीं था। यह भूमिका मुझ पर थोपी गई थी।

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