Monday, July 30, 2018

हिसार में पर्यावरण जागरूकता को लेकर गोष्ठी का आयोजन

Organizing a Conference on Environmental Awareness in Hisar
हिसार, 30 जुलाई(abtaknews.com)प्रकृति के सभी घटक निश्चित मात्रा में  अपना कार्य करके पर्यावरण को स्वच्छ रखते हैं ।   इस कारण  जरूरी है कि  आर्थिक विकास और रहन सहन में सुधार ऐसे तरीके से हों कि प्रकृति के इस संतुलित तंत्र में विक्षोभ  उत्पन्न न हो ।  कम  इंधन या ऊर्जा की लागत में  अधिक  उत्पादन के लिए मशीनों की दक्षता बढ़ाकर, रहन सहन में  उचित बदलाव लाकर  और अधिक से अधिक वृक्ष लगा कर पर्यावरण में बढ़ते प्रदूषण और और ग्रीन हाउस गैसों के स्तर को नियंत्रित किया जा सकता है।

यह निष्कर्ष यहां सैक्टर 1---4 के सामुदायिक केंद्र में सैक्टर वासियों द्वारा आयोजित गोष्ठी में निकाला । गोष्ठी में सैक्टर 1---4 सहित सैक्टर 16 --17, सैक्टर 14, सैक्टर 3 --5 और सैक्टर 13 के कई निवासियों की  उपस्थिति में हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के कार्यकारी अभियंता  (होर्टिकल्चर) विरेन्द्र सिंह, जिला वन  अधिकारी वेद प्रकाश,  एडवोकेट यशवीर मलिक, सैक्टर 1---4 वैल्फेयर एसोसिएशन प्रधान कर्नल चतर सिंह गोयत और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम से सेवा निवृत्त चीफ कोम्यूनिकेशन्ज  आफिसर धर्मपाल ढुल ने विचार रखे ।
  गोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि विश्व में जितनी  औद्योगिकरण, नागरिकरण  और आर्थिक विकास में बढ़ोतरी हो रही है उतने ही प्रदूषण और ग्रीन हाउस गैस बढ़ रहे हैं जिसके कारण वैज्ञानिक ग्लोबल वार्मिगं से सम्भावित त्रासदियों की चेतावनी दे रहे हैं । सतरहवीं शताब्दी तक पर्यावरण में कार्बनडाईआक्साईड  का स्तर सामान्य 180 पी पी एम था, जो आवश्यक होता है, वह पिछले मात्र 300 वर्ष में बढ़ कर 280 पी पी एम के स्तर को पार कर चुकी है । ग्रीन हाउस बनाने वाली इस व  अन्य गैसों के कारण विश्व के  औसत तापमान में 1.8 डिग्री की बढ़ोतरी हो चुकी है ।
वक्ताओं ने कहा कि हम अपने  आर्थिक मुद्दों पर सोचते हैं जो जरूरी भी है । इस सोच को पूरा करने के लिए प्रत्येक उपलब्ध संसाधन, जैसे कोयला, पैट्रोलियम, बिटुमिन, वन, निर्माण सामग्री, खनिज आदि, का दोहन करते हैं और  आर्थिक विकास की प्रक्रिया में  अधिकतम सम्भव  उपयोग करते हैं । विकास की दौड़ जितनी तेज हो रही है पर्यावरण संरक्षण का महत्व  उतना ही बढ़ता जा रहा है । पर्यावरण की बिगड़ती स्थिति को सम्भालने के लिए  आम जनता की भागीदारी सुनिश्चित करनी होगी । प्रत्येक व्यक्ति अपने रहन सहन या  उत्पादन के कारण जितना प्रदूषण फैलाने के लिए जिम्मेदार है कम से कम पर्यावरण में उतनी शुद्धता के  उपाय करना  उसकी नैतिक जिम्मेदारी बनती है ।


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