Friday, July 20, 2018

भाजपा सरकार की पेन्शन नीति के विरोध में कर्मचारियों ने बैठक कर रोष प्रकट किया


फरीदाबाद(abtaknews.com)20 जुलाई,2018 ;हरियाणा कर्मचारी महासंघ की जिला कार्यकारिणी  ने कई विभागों के कर्मचारियों की बैठक हरियाणा कर्मचारी महासंघ के जिला प्रधान महेंद्रसिंह की अध्यक्षता में जिला कर्मचारी महासंघ के कार्यालय सेक्टर-11 पर प्रदेशीय आगामी कार्यक्रमों के बारे में कर विस्तार से चर्चा की। जिसमे कर्मचारियों से जुड़ी मुख्य बातों पर गहनता से विचार विमर्श किया गया । कर्मचारी की ओर से अपने वक्तव्य में जिला महासंघ के प्रेस प्रवक्ता लेखराज चौधरी व चेयरमैन सुनील खटाना ने बताया कि इस देश मे नेताओं के लिये पेन्शन देने का प्रावधान है फिर चाहे वह मन्त्री हो, साँसद हो या विधायक क्यों ना हो ? इनके लिये निवृत पद पश्चात पेन्शन का मिला जाना उचित माना जाता है । परन्तु कर्मचारी वर्ग को देने के लिये पेन्शन का प्रावधान नही है । क्यों ? आज एक साँसद व विधायक यदि एक दिन के लिये भी निर्वाचित होने पर पेन्शन के अधिकारित बन जाते हैं ? और इस देश का मुलाजिम 25, 30 व 35 वर्ष तक जनसेवा के बाद भी पेन्शन से वंचित रहता है । सरकार की नजरों में अगर यह NPS पॉलिसी (नैशनल पेन्शन स्कीम) इतनी अच्छी योजना है तो यह देश के मन्त्री, साँसद व विधायक के लिए ही क्यों है कर्मचारियों के लिये क्यों नही । जो अपना इतना लम्बा समय सेवा में देता है फिर भी पेन्शन ना मिलना कर्मचारियों के अधिकारों का हनन हुआ व इससे यह दर्शाया है कि आमजन मानस को अलग करके कुछ राजनीतिक लोगों को ही फायदा होता है । लोकतन्त्र में सभी के लिये समानता का हक है पर पेन्शन मामले में यह असमानता अलग क्यों ? जब देश एक है, इसका कानून भी सभी नागरिकों के लिये एक समान है । तो एक ही देश मे ये दो कानून आखिर क्यों और किस लिये ? एक ही चूल्हे पर दो हांडी होने का यह प्रश्न उठता है कि जनसेवाओं के लिये राजनेताओं को पेन्शन का प्रावधान है तो किस लिये, आखिर जनसेवा कर्मचारी भी करता है तो इसे इस पेन्शन से वंचित रखना कहाँ का न्याय व लोकतंत्रीय है । इसी तरह एक्सग्रेसिया पॉलिसी का हाल है जबकि यह पॉलिसी रोजगार की जननी है । कर्मचारी के मरनेउपरांत उसके आश्रितों के परिवारों के भरण-पोशण हेतू परिवार के एक सदस्य को नौकरी देकर रोजगार मिलता था इसे भी कर्मचारी विरोधी नीतियों के चलते यज्ञ की आहुति देकर सरकारों दवारा निरस्त किया गया । सरकार को चाहिये ऐसी पॉलिसियाँ जो जनहितकारी हैं इन्हें यथाशीघ्र लागू करना चाहिये जिससे कि कर्मचारीयों के आश्रितों को रोजगार मिले इस पर किसी भी दल ने अपनी अग्रसरता जाहिर ना कर रुचि दिखाई जिससे आज प्रदेश के अनेकों विभागों में लाखों पद रोजगार विहीनता के चलते रिक्त (खाली) पड़े हैं । जो कि जनता जनार्दन व कर्मचारियों के लिये चिन्ताजनक बात है । उपप्रधान सन्तराम लाम्बा ने कहा कि कर्मचारियों को देने के नाम पर सरकार ने हमेशा से ही बजट न होने का रोना रोया है लेकिन इन्हें अपने दैनिक भत्ते या कोई अन्य साजो-सुख सुविधा के भत्ते बढ़ाने हों तो कोई दुविधा नही, तब एक कलम से फैसले लिये जाते हैं पर आजतक माननीय सर्वोच्चय न्यायालय के आदेश समान काम समान वेतनमान दाम को लागू करना, कच्चे कर्मियों को पक्का करना आदि अनेकों कर्मचारियों की मुख्य माँगे हैं जिन्हें उस कलम से पक्का करने में यह सरकार अबतक लीपापोती ही करती आई है । सचिव जयसिंह गिल ने बताया कि एनडीए की सरकार युवाओं को रोजगार देने असहाय जान पड़ी दिखी है अपने वर्तमान साढे चार साल के कार्यकाल में सिर्फ कर्मचारी विरोधी दमनकारी नीतियाँ लागू करने व आउटसोर्सिंग की ठेकेदारी प्रथा को बढ़ावा देने में ही सक्षम दिखी है । आज प्रदेश का हर कर्मचारी वर्ग जागरूक है वह भी अपने वोट का उपयोग करना जानता है । आने वाले समय मे अपने सही वोट बल का प्रयोग कर कर्मचारी इसका माकूल जवाब देने से भी पीछे नही हटेगा । इसलिये कर्मचारी वर्ग मन्त्रियों, साँसदों व विधायकों से यह अपील करता है कि आगामी विधानसभा सत्र की बैठक में प्रदेश के लाखों कर्मचारियों की इन डिमांड्स को प्रमुखता से उठायें व इन्हें लागू कराने में अपना सहयोग करें । हरियाणा महासंघ कर्मचारी यूनियन की इस बैठक में हरियाणा कर्मचारी महासंघ के जिला सहसचिव जयभगवान आंतिल, राजसिंह सौरौत, योगेश कुमार, रामसरन, भरतसिंह नेगी, मैडम मूर्ति कटारिया, दयानन्द पांचाल, शैलेन्द्र सिंह, रणवीर सिंह, बजरंगलाल जांगड़ा, ओमप्रकाश भुक्कल, कर्मवीर यादव, मदनगोपाल शर्मा, बृजपाल तँवर, राजेश तेजपाल, करीम खान, बलबीर कटारिया, आजाद सिंह, नरेश, जगदीश पेरवाल, वीरसिंह रावत, मौजेलाल आदि अनेकों कर्मचारी मौजूद रहे । 

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