Monday, June 25, 2018

सीएम मनोहरलाल ने क्यों कहा, कुलदीप बिश्नोई भजनलाल की अच्छाइयों का फल लेने का हकदार नहीं





चंडीगढ़(abtaknews.com) 25 जून। रविवार को आदमपुर विधानसभा के गांव सीसवाल, सदलपुर व बालसमंद में महाग्राम सम्पर्क अभियान के तहत ग्रामीण जनसभाओं को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि भजनलाल ने राजनीतिक और सामाजिक जीवन में जो नाम कमाया, वह उनके वारिस पुत्र ने खराब कर दिया। वह भजनलाल की अच्छाइयों का फल लेने का हकदार नहीं है। कुलदीप बिश्नोई से तो उनके पिता ही अच्छे थे, जिन्होंने ठीक से शासन किया और वे हर एक के सुख-दुख की चिंता करते थे और प्रदेश के हर क्षेत्र में जाया करते थे। मुख्यमंत्री मनोहरलाल द्वारा कुलदीप बिश्नोई पर टिप्पणी करने से बिश्नोई परिवार भडक गया। उनकी पत्नी रेणूका बिश्नोई ने मुख्यमंत्री को जमकर बुरा-भला कहा। जबकि पूर्व उपमुख्यमंत्री चंद्रमोहन बिश्नोई ने सीएम को मंदबुद्वि कहा। लेकिन, क्या आपको पता है कि ऐसा मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने क्यों कहा। 

क्या है पूरी सच्चाई--दरअसल, 2009 में हजकां और बसपा का गठबंधन टूट चुका था। मुख्यमंत्री बनने की चाहत में कुलदीप बिश्नोई ने भाजपा के आला नेताओं के घर पर डेरा डालना शुरू कर दिया। उस समय वर्तमान मुख्यमंत्री मनोहरलाल भाजपा चुनाव प्रबंधन का काम देख रहे थे। जबकि प्रभारी विजय गोयल थे। उस दौरान हजकां प्रमुख कुलदीप बिश्नोई ने भाजपा नेताओं के सामने गठबंधन की बात कही। इसपर भाजपा नेता राजी हो गए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ऐसा अनुभवी आदमी हो जिसका जनता में कोई न कोई रसूख हो, उसको मुख्यमंत्री बनाएंगे। भाजपा भजनलाल को मुख्यमंत्री के रूप में पेश करना चाहती थी। अपने पिता का नाम सुनकर बेटा कुलदीप बिफर गया और कहने लगा कि मैं बाप को नहीं मानता, मुझे मुख्यमंत्री बनाओ। तभी समझौता करूंगा, नहीं तो नहीं करूंगा। 

रविवार को इसका खुलासा मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने आदमपुर की जनता के बीच कर दिया। जिससे बिश्नोई परिवार परेशान है। दूसरी सच्चाई ये भी है कि जो कुलदीप बिश्नोई सदा ठंडी हवाओं में रहकर राजनीति करने की सोचते है। खुद का आदमपुर हरियाणा के सबसे पिछड़े हुए हलकों में से एक है। वह कैसे हरियाणा का मुख्यमंत्री बन सकता है। बल्कि सही मायने में कुलदीप का मन दक्षिण अफ्रीका के सबसे बड़े खदान मालिक और डायमंड में रमता है। हरियाणा की जनता से कोसों दूर है। इसका अंदाजा विधानसभा मंे सबसे कम मात्र 20 प्रतिशत हाजिरी से लगाया जा सकता है। अक्सर आदमपुर के इनके कार्यकर्ता तो उनके फोन नंबर बदलने से ही परेशान रहते हैं। आदमपुर हलके में कहावत है कि कुलदीप से बात करना भगवान से भेंट करने जैसा है। 

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