Saturday, June 16, 2018

सतयुग दर्शन ट्रस्ट द्वारा आयोजित मानवता-2018 उत्सव के दूसरे दिन भी हुए सांस्कृतिक कार्यक्रम

Cultural program on the second day of Humanity-2012 festival organized by Satyug Darshan Trust

फरीदाबाद(abtaknews.com) 16 जून।  सतयुग दर्शन ट्रस्ट द्वारा अपने ही विशाल परिसर सतयुग दर्शन वसुन्धरा में दिनाँक १४ जून से दिनाँक १७ जून तक मानवता-फेस्ट २०१८, का आयोजन किया गया है।  कार्यक्रम के दौरान ट्रस्ट के मार्गदर्शक श्री सजन जी ने उपस्थित बच्चों से कहा कि  समय के आवाहन् को समझो 1योंकि समय बदलाव की कगार पर खड़ा है यानि कलियुग जा रहा है और सतवस्तु आ रही है। सतवस्तु के कुदरती ग्रन्थ के अनुसार च्सतवस्तु में विचार ते सतज़बान होसी, एक दृष्टि, एकता महान होसी। न जप, न तप, न भजन, न बन्दगी एक अवस्था ओ जगत जहान होसी।ज् वक्त की नजाकत को समझते हुए वक्त से ही स्वयं में आवश्यक स्वाभाविक परिवर्तन ले आओ 1योंकि ऐसा करने पर ही समय की र3तार के साथ कदम मिला, प्रसन्नचित्तता से जीवन के उन्नति पथ पर प्रशस्त हो सकोगे।

Cultural program on the second day of Humanity-2012 festival organized by Satyug Darshan Trust

इस लक्ष्य की सिद्धि हेतु उन्होने उपस्थित बाल युवाओं से प्रार्थना की कि अपने आधार स्वरूप परमात्मा को जानो और उस संग एकरस अटूट प्रीत जोड़, उसके प्रति विशुद्ध व अपार स्नेह बनाए रखो यानि ऐसे पुरुषार्थी बनो कि सुरत-श4द के अटूट प्रेम व समबन्धों में किसी कारण भी कोई बदलाव न आने पाए। ऐसा करने पर ही आत्म साक्षात्कार कर पाओगे और अपने यथार्थ दिव्य गुणों व शक्ति का बोध कर समपूर्णता को प्राप्त हो पाओगे। इस संदर्भ में उन्होने कहा कि जानो साक्षात्कार यानि जहाँ देखी हुई बात को स्मृति में रख उसका स्पष्टतया वर्णन करना सहज होता है, वही सुनी हुई बात के परिप्रेक्ष्य में ऐसा करना थोड़ा कठिन होता है। इस बात को दृष्टिगत रखते हुए सुनने-सुनाने से अधिक आत्म साक्षात्कार को महत्ता दो।
श्री सजन जी ने आगे सजनों को बताया कि अगर हकीकत में जितेन्द्रिय बन आनन्द का अनुभव करना चाहते हो तो सत -चिंतन करो और ध्यान रखो कि आपका ख़्याल व बुद्धि छोटी-छोटी बातों में न उलझे अपितु दृढ़ता की शक्ति से अपने निज शाश्वत स्वरूप को अर्थात् च्ईश्वर है अपना आपज् इस सत्य को अपनी स्मृति में प्रबलता से ठहराए रखें। ऐसा करने पर ही अपने वास्तविक ज्ञान और शक्ति को बुद्धि में अटलता से धारण करने में सक्षम बन पाओगे और आपका शारीरिक-मानसिक व आत्मिक बल प्रबल व शक्तिशाली हो पाएगा। ऐसा होने पर आज जो कुछ भी करना असंभव लगता है वह सब कुछ करना संभव लगने लगेगा और ह्मदयगत संकीर्णताओं से उबर उदारता व विशालता को धारण कर लोगे। फिर ह्मदय जब विशाल हो गया तो दृष्टि में व्यापकता आएगी और इस तरह दिव्य नेत्रों द्वारा अलौकिक छवि का दर्शन कर नवीनता का अनुभव कर पाओगे। आशय यह है कि फिर दृष्टि शरीर को नहीं अपितु आत्मा-आत्मा को देखेगी और जीने का वास्तविक आनन्द प्राप्त हो जाएगा।
अंत में श्री सजन जी ने उपस्थित युवाओं को कहा कि खुद पर खुद नजर रखते हुए इसी ओर आगे बढ़ो और अपने सभी गुणों व शक्तियों से भरपूर होकर ऐसा उच्च कोटि का पुरुषार्थ दर्शाओ कि मन-वचन-कर्म द्वारा परमात्मा समान होकर इस जगत में विचरने में  सक्षम हो जाओ। इस हेतु याद रखो जब तक जीना है दिल से नहीं हारना। दिल से न हारे तो समझो मन और इन्द्रियों द्वारा अकर्मण्य भाव से कर्म करने में निपुण हो जाओगे और इस तरह समस्त कर्म बंधनों व देह बंधनों से मुक्त हो अपना जीवन सफल बना लोगे। इस तरह अपने असली घर परमधाम पहुँच विश्राम को पा लोगे।


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