Sunday, May 6, 2018

हरियाणा के गांव लतीपुर में न बिजली, न पानी, न स्कूल, न स्वास्थ्य केन्द्र, मुख्यमंत्री पधारो इस गांव

No villages, no water, no school, no health center in Latipur village of Haryana, can be found in this village

फरीदाबाद (abtaknews.com) 06 मई,2018 ; अंत्योदय योजना की बात करने वाली हरियाणा सरकार में आज भी फरीदाबाद की पृथला विधानसभा का एक अंतिम गांव लतीपुर ऐसा भी है जिसमें आजादी के 70 साल बीत जाने के बाद भी गांव बंजारों की जिंदगी जीने को मजबूर है, यह गांव जगमग योजना के अंतर्गत को आता है मगर अभी तक गांव में एक भी बिजली का खंबा नहीं है, 70 के दशक में बसे गांव के रास्ते कच्चे हैं, गांव में एक दो पक्के मकानों को छोडकर सभी मकान कच्चे घास फूंस के बने हुए हैं। गांव में न स्कूल है और न ही कोई आंगनबाडी, इतना ही नहीं गांव में दूर - दूर तक कोई स्वास्थ्य केन्द्र भी नहीं है। हैरानी की बात तो यह कि गांव के लोगों का किसी सरकार दस्तावेज में जन्म व मृत्यु का कोई रिकार्ड तक नहीं है। 

70 के दशक में बसा गांव लतीपुर देश में हरियाणा नम्बर 1 की दुहाई देने वाले हरियाणा प्रदेश का ही एक गांव है,, जो कि आजादी के 70 साल बाद भी गुलामी की जिंदगी जी रहा है, गांव की हालत देखकर ऐसा लगता है कि हम 21वीं सदी में नहीं 19वीं सदी में वापिस पहुंच गये हों। लतीपुर गांव बल्लभगढ शहर से करीब 20 किलोमीटर दूर पृथला विधानसभा का अंतिम गांव है, गांव में प्रवेश करने के लिये कच्चे धूल भरे रास्ते से होकर गुजरना पडता है, उसके बाद गांव कब शुरू होता है पता ही नहीं लगता क्योंकि गांव एक बंजारों की बस्ती की तरह नजर आता है, क्योंकि गांव में एक दो पक्के मकानों को छोडकर बाकी सभी मकान कच्चे घास फंूस के बने हुए हैं, जिनमें कोई भी बुनियादी सुविधायें नही हैं। गांव में आज भी ट्रैक्टर व बाईक की बैैट्री से मोबाईल फोन चार्ज किये जाते हैं तो वहीं मनोरंजन की बात तो दूर की है। क्योंकि गांव जगमग योजना के तहत कागजों में तो आता है मगर धरातल पर गांव में एक भी बिजली का खंबा नहीं लगा हुआ है, गांव अभी भी 19वीं सदी की तरह अंधेरे में डूबा रहता है। 

ग्रामीणों ने बताया कि गांव हरियाणा में होने के बाद भी मूलभूत सुविधाओं के लिये तरस रहा है, गांव हरियाणा और उत्तर प्रदेश सीमा पर बसा हुआ है, शायद इसलिये सरकार की कोई योजना उनके गांव तक नहीं पहुंचती, गांव में देश का भविष्य कहे जाने वाले बच्चों को भी उत्तर प्रदेश के शहरों में शिक्षा ग्रहण करने जाना पडता है क्योंकि  गांव में कोई भी पाठशाला नही हैं, इतना ही नहीं हरियाणा में होने के बाबजूद उन्हें हर जनबुनियादी सुविधाओं के लिये उत्तर प्रदेश जाना पडता है, गांव में कोई भी स्वास्थ्य केन्द्र तक मौजूद नहीं है। 

गांव के सरपंच ताराचंद भाटी ने बताया कि गांव के विकास और  जन सुविधाओं को लेकर खुद उन्होनें मुख्यमंत्री से मुलाकात की थी जिन्होंने अधिकारियों की ड्यूटी लगाई थी मगर अभी तक कोई भी अधिकारी गांव की सुध लेने नहीं पहुंचा है। गांव पूरी तरह से पिछडा गांव है, गांव में कोई भी जन सुविधा नहीं है, सबसे बडी बात तो है कि गांव के लोगों को किसी भी सरकारी कागजों में जन्म व मृत्यु का रिकार्ड तक नही हैं। वह कोशिश कर रहे हैं कि गांव को सुविधायें दे सके अगर नहीं दे पाये तो वह अपने आपको सरपंच के काबिल नहीं समझेंगे।

गांव की दुर्दशा के बारे में क्षेत्र के विधायक टेकचंद शर्मा ने मीडिया के सामने स्वंय स्वीकार किया है कि गांव में कोई भी सुविधा नहीं हैं मगर वह पहले ऐसे विधायक हैं जो उस गांव में गये थे इससे पहले कोई भी विधायक आज तक अभागे गांव लतीपुर में नहीं गया। उन्होंने गांव के विकास के लिये कुछ ग्रांट पास करवाई है उम्मीद है कि जल्द गांव की दशा और दिशा सुधरेंगी।


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