Thursday, April 5, 2018

फरीदाबाद में बल्लबगढ़ का महिला थाना बना महिलाओं के लिए अत्याचार का अड्डा


बल्लबगढ़(abtaknews.com) 05 अप्रैल,2018; महिला थाने में अगर किसी पीड़ित महिला की कोई शिकायत गई तो समझो उसको आत्महत्या करनी पड़ेगीये हम नहीं कह रहे बल्कि महिला थाने में आई पीड़ित महिलाएं अपनी शिकायत पर कार्रवाई ना होने के चलते कह रही हैं। कोई महिला यहां पर 1 हफ्ते सेकोई 3 महीने से कोई 6 महीने से तो कई सालों से अपने लिए न्याय की उम्मीद लगाए बैठी हैंपीड़ित महिलाओं का ये भी आरोप है कि थाने में उनको डराया-धमकाया और मारापीटा भी जाता है यहां तक कि शिकायतकर्ता होने के बावजूद उनको थाने में बुलाकर पूछताछ के नाम पर घंटों बिठाया जाता है लेकिन जिन आरोपियों की शिकायत वो करती हैं उनको एक बार भी बुलाकर उनसे किसी भी तरह की पूछताछ नहीं की जाती बल्कि उनसे सांठगांठ करके समझौते का दबाव बनाया जाता है।
बल्लबगढ़ महिला थाने पर इक्टठी हुई ये महिलाएं ये आस लगाके आई हैं कि आज इनको न्याय मिल जाएगा और इनके ऊपर अत्याचार करने वाले आरोपियों को सजा। लेकिन बल्लबगढ़ के महिला थाने में तैनात पुलिस कर्मियों का ये हाल है कि अगर कोई पीड़ित महिला वहां शिकायत करने चली गई तो उनको न्याय मिलना तो दूर उसको इतने चक्कर कटवा देते हैं कि वो आत्महत्या करने तक की बात कहने को मजबूर हो रहीं हैं। पीड़ित महिलाओं के मुताबिक शिकायत देने के बाद ना तो आरोपियों को बुलाकर पूछताछ की जाती है और ना ही किसी तरह की छानबीन बल्कि खुद उन्हीं को थाने में पूछताछ के नाम पर बुलाकर घंटों बिठाया जाता है और उनको मानसिक तौर पर प्रताड़ित किया जाता है।
सिर्फ अकेली संध्या, दीपिका(काल्पनिक नाम) ही नहीं है जो महिला थाने से पीड़ित है एक और पीड़ित की बातें सुने तो पता चलेगा कि किस तरह से बल्लबगढ़ का महिला थाना आरोपियों के लिए आरामगाह बनी हुई है और शिकायतकर्ता महिला के लिए कब्रगाह। सिर्फ संध्या और दीपिका तक सीमित नहीं रह जाती इसके अलावा एक रेप पीड़िता कितने दिनों से आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रही है लेकिन पीड़िता का आरोप है कि शिकायत करने के बावजूद ना तो कोई कार्रवाई की गई उल्टा थाने में बुलाकर इसको गालियां दी गई जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया गया और थाने में तैनात महिला पुलिसकर्मियों ने इसकी जबरदस्त पिटाई भी की।बल्लबगढ़ महिला थाने के अत्याचारों का सिलसिला यहीं नहीं थम रहा कुछ और भी पीड़ित महिलाएं (सीमा पुष्पा काल्पनिक नाम) है जो इस थाने के दिए गए घावों पर मरहम लगाने की कोशिश खुद ही कर रही हैं।
इन सभी पीड़ित महिलाओं के बारे में संबंधित एसएचओ वूमैन सैल और डीसीपी से बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने इन सभी मामलों में कुछ भी कहने से साफ मना कर दिया।फाइनल- सरकार ने महिला थाने इसलिए बनाए थे कि महिलाओं को ज्यादा से ज्यादा न्याय मिले और उन्हें दर-दर की ठोकरें ना खानी पड़ें, लेकिन इन पीड़ित महिलाओं का दर्द सुनकर लगता है कि बल्लबगढ़ का ये महिला थाना महिलाओं को न्याय देने के लिए नहीं बल्कि आरोपियों की मदद के लिए बनाया गया है, शायद यही वजह है कि महिला थाने की पीड़ित महिलाएं खुदकुशी करने जैसी बातें करने को मजबूर हो रही हैं । काबिले गौर और सराहनीय है इन महिलाओं का जज्बा जो पुलिस के किए गए इतने अत्याचारों को सहकर भी न्याय की आस लगाए खड़ी हुई हैं। शायद सरकार का बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का नारा इस महिला थाने की दिवारों में सर पटक-पटक कर दम तोड़ चुका है ।

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