Friday, March 9, 2018

हरियाणा का बजट बेरोजगार युवाओं को रोजगार दिलाने वाला होगा साबित ; विपुल गोयल


चंडीगढ़, 9 मार्च,2018(abtaknews.com )हरियाणा के कौशल विकास एवं औद्योगिक प्रशिक्षण मंत्री विपुल गोयल ने हरियाणा के वित्त मंत्री द्वारा आज विधानसभा में पेश किए गए बजट 2018-19 को बेरोजगार युवाओं को रोजगार दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया और कहा कि इस बजट में कौशल विकास और औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग के लिए 657.94 करोड़ रुपये के परिव्यय का प्रस्ताव किया गया जोकि संशोधित अनुमान 2017-18 के 458.71 करोड़ रुपये से 43.43 प्रतिशत अधिक है।

श्री गोयल ने बताया कि राज्य सरकार सक्षम युवा योजना के तहत सहायता के साथ बेरोजगारों तक पहुंची है। हरियाणा के शिक्षित बेरोजगार युवाओं के लिए हर महीने 100 घंटें का वैतनिक कार्य सुनिष्चित करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। इस योजना के तहत, पात्र स्नातकोत्तर और स्नातक उम्मीदवारों को 100 घंटे के कार्य के लिए 6,000 रुपये का मानदेय और स्नातकोत्तर उम्मीदवार को बेरोजगारी भत्ता के रूप में 3,000 रुपये और स्नातक उम्मीदवार को 1,500 रुपये वितरित किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत फरवरी, 2018 के अन्त तक 29,123 स्नातकोत्तर और 19,947 स्नातकों के पंजीकरण को मंजूरी दी गई है। फरवरी, 2018 में इनमें से 10,106 (स्नातकोत्तर) और 4877 (स्नातक) सक्षम युवाओं को विभिन्न विभागों में मानद कार्य उपलब्ध करवाया गया। अब तक उन्हें मानदेय के रूप में 51.43 करोड़ रुपये और बेरोजगारी भत्ता और अन्य भत्तों के रूप में 78.77 करोड़ रुपये की राशि वितरित की गई है।
उन्होंने बताया कि हरियाणा राज्य ने हाल ही में प्रति लाख पर प्रशिक्षुओं का सबसे अधिक नामांकन करने के लिए भारत सरकार से सर्वश्रेष्ठ राज्य के रूप में ‘चैम्पियन ऑफ चेंज’ की उपाधि हासिल की है। उन्होंने बताया कि कौशल विकास एवं औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग में एक समर्पित प्रशिक्षुता प्रोत्साहन प्रकोष्ठ की स्थापना, सभी जिलों में जिला प्रशिक्षुता समितियों के गठन और सभी हितधारकों के साथ नियमित कार्यषालाएं आयोजित किए जाने से यह संभव हुआ है। प्रशिक्षु अधिनियम के तहत फरवरी, 2018 के अन्त तक 8,695 प्रतिष्ठानों को पंजीकृत किया गया हैं और 30,456 प्रशिक्षुओं को काम दिया गया है। 
उन्होंने आगे बताया कि इसके अतिरिक्त, सभी सरकारी और राज्य के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में प्रशिक्षुता की शुरुआत की गई है और आशा है कि राज्य जून, 2018 तक सरकारी/अर्ध सरकारी प्रतिष्ठानों में 15,000 प्रशिक्षुओं को काम प्रदान कर सकेगा। 
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चंडीगढ़, 9 मार्च- हरियाणा के कौशल विकास एवं औद्योगिक प्रशिक्षण मंत्री श्री विपुल गोयल ने बताया कि हरियाणा सरकार द्वारा वर्ष 2018-19 में प्रदेश में 20 नए राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान खोले जाने तथा 22 राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों को आदर्श आई.टी.आई के रूप में अपग्रेड किए जाने का प्रस्ताव है। श्री गोयल आज हरियाणा के वित्त मंत्री द्वारा आज विधानसभा में पेश किए गए बजट 2018-19 के बाद प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे थे। उन्होंने बताया कि युवाओं के कौशल विकास के लिए प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना की तर्ज पर राज्य सरकार द्वारा ‘हरियाणा कौशल विकास मिशन’ शुरू किया गया है, जिसके तहत वर्ष 2018-19 में 1.15 लाख युवाओं को प्रशिक्षण प्रदान करने का लक्ष्य है। पलवल के दुधोला में विश्वकर्मा कौशल विकास विश्वविद्यालय स्थापित किया जा रहा है। बहरहाल, गुरुग्राम में अस्थायी परिसर से इसका संचालन शुरू भी हो चुका है। 
उन्होंने बताया कि वर्ष 2018-19 में गांव जाखल (फतेहाबाद), सिकरोना (फरीदाबाद), बराना (पानीपत), इंद्री (करनाल), सहलांग (महेंद्रगढ़), सतनाली (महेंद्रगढ़), मुसेदपुर (गुरुग्राम), हसनपुर (अंबाला), नहोनी (अंबाला), राई (सोनीपत), नचरों (यमुनानगर), महाराजा जस्सा सिंह सफीदों (जीन्द), अलिका (सिरसा), खिजराबाद (यमुनानगर), जाखंदादी (फतेहाबाद), खेवड़ा (सोनीपत), जीवन नगर (सिरसा), सिसाय (हिसार), दारसुलकलां (फतेहाबाद) और जुआं (सोनीपत) में 20 राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान स्थापित करने का प्रस्ताव है। 
इसके अतिरिक्त, 22 राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों नामत: अंबाला शहर, भिवानी, खुद्दान, कुरुक्षेत्र, महेंद्रगढ़, नूह, पलवल, पंचकूला, पानीपत, रिवाड़ी, सिरसा, सोनीपत, टोहाना, यमुनानगर, चरखी दादरी (महिला), फरीदाबाद (महिला), गुरुग्राम (महिला) हिसार (महिला), जींद (महिला), पुंडरी (महिला), करनाल (महिला) और रोहतक (महिला) को आदर्श आई.टी.आई के रूप में अपग्रेड करने का भी प्रस्ताव है।
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चंडीगढ़, 9 मार्च- हरियाणा के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री श्री विपुल गोयल ने बताया कि राज्य में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में प्रगतिशील विकास को बढ़ावा देने के लिए ‘हरियाणा कृषि-व्यवसाय और खाद्य प्रसंस्करण नीति 2018’ तैयार की जा रही है। इस नीति का प्रमुख उद्देश्य प्रभावी फॉरवर्ड एवं बैकवर्ड लिंकेज स्थापित करके समस्त फूड वैल्यू चैन में और अधिक रोजगार के अवसर सृृजित करना है, जिससे कृषि और ग्रामीण समृद्धि को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा इस नीति का लक्ष्य 3500 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित करना और इस क्षेत्र में 20,000 नए रोजगार के अवसर सृृजित करना है।
श्री गोयल ने हरियाणा के वित्त मंत्री द्वारा आज विधानसभा में पेश किए गए बजट 2018-19 के बाद यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राज्य में बुनियादी ढांचे को सुदृृढ़ बनाने और रोजगार के अवसर सृृजित करने में उद्योगों का विशेष महत्व है। राज्य को विकास के अगले स्तर पर अग्रसर करने के लिए ‘मेक इन इंडिया’, ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘स्किलिंग इंडिया’ अभियानों के साथ संरेखित करते हुए एक अनूठी ‘उद्यम प्रोत्साहन नीति-2015’ (ईपीपी) लागू की गई। 
उन्होंने बताया कि हरियाणा में निवेशकों को आकर्षित करने के लिए, राज्य सरकार ने फरवरी, 2017 में ‘हरियाणा उद्योग प्रोत्साहन केन्द्र’ नामक सिंगल रूफ मैकेनिज्म की स्थापना की है। एकल खिडक़ी की अवधारणा के साथ आगे बढऩे और सभी औद्योगिक स्वीकृृतियां/लाइसेंस देने के लिए एकल कार्यालय की परिकल्पना करने वाला हरियाणा भारत का एकमात्र राज्य है। इस केन्द्र के माध्यम से सभी औद्योगिक स्वीकृृतियां समयबद्ध तरीके से ऑनलाइन दी जा रही हैं। नई उद्यम प्रोत्साहन नीति ने राज्य में उद्योगों के विकास के लिए अनुकूल वातावरण बनाया है। वर्ष 2016 में ईज ऑफ डुइंग बिजनेस रैंकिंग में हरियाणा देश में 14वें स्थान पर था। उद्यमियों के लिए अनुकूल माहौल सृृजित करने के लिए राज्य सरकार द्वारा किए गए प्रयासों के फलस्वरूप हरियाणा आज भारत सरकार के ईज ऑफ डुइंग बिजनेस फेमवर्क की रैकिंग में देश के सभी राज्यों में पहले स्थान पर आ गया है। 
श्री गोयल ने बताया कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल के दौरान 29,121 करोड़ रुपये का नया निवेश हुआ, जिससे निजी औद्योगिक उद्यमों में 2,03,359 लोगों के लिए रोजगार के अवसर सृृजित हुए। चल रही परियोजनाओं में 45,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त निवेश हो रहा है। राज्य सरकार ने हाल ही में ‘हरियाणा टेक्सटाइल पॉलिसी 2018’ को मंजूरी दी है, जो पांच प्रमुख स्तंभों नामत: बुनियादी ढांचों के संवर्धन के लिए पहल, राजकोषीय प्रोत्साहन, कौशल प्रशिक्षण/उद्यमशीलता के लिए समर्थन, खादी उद्योग को बढ़ावा और राज्य भर में नए टेक्सटाइल पार्क एवं समूहों की सुविधा पर आधारित है। इस नीति का मुख्य उद्देश्य टेक्सटाइल क्षेत्र में पांच हजार करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित करना, टेक्सटाइल क्षेत्र में 50,000 नई नौकरियां सृृजित करना, कपड़ा निर्यात को बढ़ावा देना और संतुलित क्षेत्रीय विकास करना है।  

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