Sunday, March 25, 2018

नौ हत्याओं के आरोपों से बरी लापता ब्रह्मजीत की ह्त्या, महिला सहित बिजनेस पार्टनर गिरफ्तार

Bramjit's business partner arrested along with woman, killing of missing Brahmjit, accused of nine murders

फरीदाबाद(abtaknews.com) 24 मार्च,2018; थप्पड से नहीं प्यार से डर लगता है साहब यह दबंग फिल्म का मशहूर डायलॉग लेकिन रील लाइफ और रियल लाइफ में बहुत अंतर होता है। असल जिंदगी में एक थप्पड़ किसी की जान भी ले लेता है और किसी को कुख्यात अपराधी भी बना देता है। ऐसा ही कुछ ब्रह्मजीत हत्याकांड में हुआ जिस्मे आरोपी को थप्पड़ मारने पर उसने ब्रह्मजीत की हत्या करवा दी।  पिछली 27 फ़रवरी को नेशनल हाइवे के बाटा चौक के पास लापता हुए फरीदाबाद के बुढ़ैना गांव निवासी ब्रमजीत भड़ाना की ह्त्या होने की पुष्टि करते हुए क्राइम ब्रांच डीसीपी सुखबीर सिंह बताया कि ब्रह्मजीत  की ह्त्या 27 फ़रवरी को ही कर दी गयी थी और उसकी लाश पलवल जिले में एक फ़ार्म हाउस में ज़मीन में दस फुट गहरे खड्डे में दबा दी गयी थी। इस ह्त्या के आरोप में पुलिस ने राजीव भाटी और उसकी एक महिला  साथी को गिरफ्तार किया है जिनकी निशानदेही पर 25 दिन बाद पुलिस ने ब्रह्मजीत की लाश बरामद की है. फिलहाल आरोपियों को पुलिस ने सात दिन के रिमांड पर लिया है। चर्चित बुढ़ैना कांड में नौ हत्याओं के आरोपों में सजा पाने वाले और बाद में बरी होने वाला ब्रह्मजीत अपनी आदत को नहीं छोड़ पाया और अपने ही बिज़नेस दोस्त के हाथों जिंदगी की जंग हार गया।
Bramjit's business partner arrested along with woman, killing of missing Brahmjit, accused of nine murders

मृतक ब्रह्मजीत पर वर्ष 1996 में नौ लोगो की ह्त्या का मामला दर्ज हुआ था और वर्ष 2004 में अदालत ने बरमजीत सहित तीन लोगो को मौत की सजा सुनाई थी. लेकिन हाईकोर्ट में वर्ष 2013 में ब्रह्मजीत इन हत्याओं के मामले में बरी  हो गया था और बीती 27 फ़रवरी को ब्रह्मजीत नेशनल हाइवे के बाटा चौक के पास लापता हो गया था और उसकी कार लावारिस खड़ी मिली थी। पुलिस को मिले सीसीटीवी फुटेज में ब्रह्मजीत एक लाल रंग की गाडी में बैठकर जाता दिखाई दिया था लेकिन उसके बाद उसकी कोई सूचना नहीं मिल पा रही थी जिसके चलते ब्रह्मजीत का मामला मिसिंग सेल को दे दिया गया था और इसी पर जांच करते हुए पुलिस ने राजीव भाटी और उसकी अकाउंटेंट महिला साथी से जब गहन पूछताछ की तो ब्रह्मजीत की ह्त्या का खुलासा हो गया। 

ब्रह्मजीत द्वारा अपने साथी राजीव भाटी  को थप्पड़ मारना बहुत महंगा पड़ा और इस थप्पड़ की गूँज राजीव भाटी  के दिमाग में लगातार गूँज रही थी तभी से राजीव भाटी ने ब्रह्मजीत को मारने का प्लान बना  लिया था।  क्राइम ब्रांच डीसीपी सुखबीर सिंह ने अबतक न्यूज़ पोर्टल टीम को बताया कि ब्रह्मजीत और राजीव भाटी के बीच करोडो का लेनदेन था और पिछले दिनों किसी बात को लेकर कहासुनी में ब्रह्मजीत ने राजीव भाटी को थप्पड़ मार दिया था। बस उसी समय ब्रह्मजीत की ह्त्या की पटकथा लिख दी गयी. इसी को लेकर राजीव भाटी ने उसे नेशनल हाइवे के बाटा चौक पर यह कहकर बुलाया की कही फायदेमंद ज़मीन का सौदा है. ऐसे में ब्रह्मजीत बाटा चौक के नेशनल हाइवे स्थित मिलन वाटिका के सामने पहुंचा और अपनी कार पार्क करके बाहर टहलने लगा।  इसी दौरान राजीव भाटी अपनी अकाउंटेंट महिला दोस्त के साथ लाल रंग की ब्रेजा गाडी में वहां पहुंचा और ब्रह्मजीत को बैठा लिया और पलवल की तरफ गाडी मूव कर दी. रास्ते में लघुशंका के बहाने राजीव भाटी उतर  गया और उसके बाद उसकी महिला साथी कार ड्राइव करने लगी. तभी राजीव भाटी ने अपनी रिवाल्वर निकाल ब्रह्मजीत के सिर, गर्दन और छाती में एक एक करके तीन गोलियां दाग दी. इसके बाद राजीव भाटी अपने पलवल जिले में स्थित फ़ार्म हाउस पहुंचा जहां प्लान के अनुसार पहले ही दस फुट से ज्यादा गहरा गड्ढा खुदा हुआ था. जिसमे ब्रह्मजीत की लाश को दफ़न कर दिया गया।  डीसीपी ने बताया की जब अगले दिन राजीव भाटी  को सीसीटीवी फुटेज की जानकारी मिली तो उसने जयपुर में जाकर कार को जला दिया ताकि सबूत खत्म किया जा सके. लेकिन पुलिस ने कॉल डिटेल के आधार पर राजीव भाटी और उसकी महिला साथी को गिरफ्तार कर लिया। फिलहाल पुलिस ने आरोपियों को कोर्ट में पेश कर सात दिन के रिमांड पर लिया है।
ब्रह्मजीत का क्या है पूरा मामला...

चर्चित ब्रह्मजीत कभी बेचता था साईकल से दूध, आज 100 करोड़ की संपत्ति 
बुढ़ैना गांव निवासी हरपाल और ब्रह्मजीत में गहरी दोस्ती थी। वर्ष 1997 में पार्किंग के ठेके लेने को लेकर दोनों में विवाद हो गया, जोकि खूनी संघर्ष में बदल गया था। उनका झगड़ा इतना बढ़ा कि हत्याओं का दौर शुरू हो गया। इस हत्याकांड में नौ लोगों की हत्या हुई थी। वर्ष 1998 में हुए चौहरे हत्याकांड में ब्रह्मजीत सहित कई लोगों को जिला अदालत ने वर्ष 2005 फांसी की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ ब्रह्मजीत वगैरहा ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी, जिसे हाईकोर्ट ने पुर्नविचार के लिए जिला अदालत में भेज दी थी। इस मामले में 16 नवंबर 2013 को जिला अदालत ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया था।


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