Monday, March 19, 2018

मेट्रो अस्पताल के डॉ रोहित गुप्ता ने कहा कि स्लीप पैरालिसिस का समय पर इलाज जरूरी


फरीदाबाद 19 मार्च(abtaknews.com)  बदलती जीवनशैली के कारण स्लीप पैरालिसिस के मरीजों में तेजी से इजाफा हो रहा है। इसकी वजह से जहां मरीज रात में सही से नींद नहीं ले पाता वहीं दिनभर परेशान रहता है। यह कहना है कि सेक्टर 16ए स्थित मेट्रो अस्पताल के वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट डॉ रोहित गुप्ता का। उन्होंने यह जानकारी एक सेमिनार में दी।  

डॉ रोहित गुप्ता ने बताया कि कभी कभी व्यक्ति सोते समय अचानक जग जाता और अपने शरीर को हिलाने-डुलाने की कोशिश करता है, लेकिन ऐसा कर पाने में वह असमर्थ होते हैं। वह ऐसा महसूस करते हैं कि कोई चीज है जो उन्हें हिलने से रोक रही है। जबकि सही मायने में यह कोई भूतप्रेत का चक्कर नहीं होता। ऐसे व्यक्ति स्लीप पैरलिसिस यानी निद्रा लकवा के शिकार होते हैं। स्लीप पैरालिसिस एक ऐसी अवस्था है जब व्यक्ति का दिमाग तो जगा रहता है लेकिन शरीर सुप्त अवस्था में होता है। ऐसे में जब वह हिलने या फिर उठने की कोशिश करते हैं तब ऐसा लगता है कि कोई चीज आपको ऐसा करने से रोक रही है। 

क्या है स्लीप पैरालिसिस --न्यूरोलॉजिस्ट डॉ रोहित गुप्ता ने बताया कि स्लीप पैरालिसिस एक ऐसी अवस्था है जब कोई नींद से उठता है और देखता है कि उसका पूरा शरीर लकवाग्रस्त हो गया है। ऐसे में वह अपने शरीर के किसी भी अंग को हिला-डुला नहीं पाता। ऐसा अक्सर उन लोगों के साथ बार बार होता है जो नार्कोलेप्सी या निद्रा रोग से ग्रस्त होते हैं। कोई भी व्यक्ति जब सोता है तब दिमाग शरीर और मन को शक्तिहीन कर देता है ताकि वह आराम कर सकें।  ज्यादातर लोगों में यह कुछ ही देर में अपने आप ठीक भी हो जाता है। निद्रा लकवा किसी को भी हो सकता है लेकिन जो लोग नार्कोलेप्सी से पीडि़त होते हैं उनमें इसकी संभावना ज्यादा होती है।

जानलेवा नहीं होता स्लीप पैरालासिस--डॉ रोहित गुप्ता का कहना है कि स्लीप पैरालिसिस डरावना है लेकिन यह जानलेवा नहीं है। यह आपको परेशान कर सकता है। इसलिए आपको इसका इलाज करवाना चाहिए। स्लीप पैरालिसिस कोई बीमारी नहीं है। यह सिर्फ स्लीप पैटर्न में असंतुलन की वजह से होता है। दिमाग और शरीर में असंतुलन की वजह से स्लीप पैरालिसिस की घटना घटित होती है। अगर किसी व्यक्ति के साथ लगातार ऐसा होता है तो उसे बिना देर किए अच्छे न्यूरोलॉजिस्ट को दिखाना चाहिए। समय पर इलाज करवाने से इस बीमारी से बचा जा सकता हैं। 

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