Wednesday, March 7, 2018

राज्य बीमित मरीजों को ईएसआई मेडिकल कॉलेज फरीदाबाद में मिल सकेगा टीबी का इलाज

State insured patients get ESI medical college in Faridabad, TB treatment



फरीदाबाद, 7 मार्च(abtaknews.com): फरीदाबाद, बल्लभगढ़, पलवल और गुरूग्राम के राज्य बीमित कर्मचारियों के लिए अब अच्छी खबर है। जल्द ही एनआइटी तीन ईएसआइ मेडिकल कॉलेज अस्पताल में संशोधित राष्ट्रीय टीबी नियंत्रण कार्यक्रम (आरएनटीसीपी) के तहत टीबी डॉट सेंटर खोला जाएगा। इससे अस्पताल में आने वाले मरीजों को राहत मिल जाएगी। डॉट सेंटर में एक मेडिकल ऑफिसर, एक टीबी हेल्थ विजिटर तथा एक लैब टेक्नीशियन हर समय मौजूद रहेगा। टीबी सेंटर खोलने के लिए ईएसआइ मेडिकल कॉलेज प्रबंधन की मदद जिला टीबी नियंत्रण कार्यक्रम अधिकारी डॉ.शीला भगत कर रही हैं। इसमें आवश्यक स्टाफ  की व्यवस्था के लिए भर्तियां की जा रही है और तैयारियां अंतिम दौर में हैं, इसके बाद ईएसआइ अस्पताल में टीबी जल्द डॉट सेंटर सेंटर शुरू कर दिया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि अब तक राज्य बीमित कर्मचारियों के लिए तीन नंबर मेडिकल कॉलेज और सैक्टर-8 के ईएसआइ अस्पताल में टीबी डॉट सेंटर नहीं है। जिसके चलते ईएसआइ अस्पताल में इलाज के लिए आने पर हजारों टीबी संदिग्ध मरीज को जिला स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत चल रहे अन्य केंद्रों पर ही इलाज लेना पड़ रहा था। बल्लभगढ़, बादशाह खान अस्पताल, पाली, पल्ला, सेक्टर-3, 30, तिगांव, खेड़ी तथा डबुआ कॉलोनी शहर डिस्पेंसरी में टीबी मरीजों का इलाज किया जाता है। इन 9 केंद्रों सहित जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में कुल 350 डॉट सेंटर हैं। ईएसआइ अस्पतालों में अगर टीबी संदिग्ध मरीज आता है तो अन्य केंद्रों में भेज दिया जाता है। एनआइटी तीन नंबर ईएसआइ अस्पताल के रिकार्ड के अनुसार हर महीने में टीबी के 150 से ज्यादा नए मरीज पहुंचते हैं।
फरीदाबाद जिले में चलाए जा रहे राष्ट्रीय टीबी नियंत्रण कार्यक्रम के अन्तर्गत पिछले 3 वर्षों में 12 हजार 973 मरीज टीबी से ग्रसित सामने आ चुके हैं। जिसमें वर्ष 2017 में 4049, 2016 में 4507 और वर्ष 2015 में 4417 मरीज टीबी का इलाज ले रहे थे। इन मरीजों में मल्टीपल डोज रजिस्टेंस (एमडीआर) से ग्रसित करीब 339 मरीज पाए गए। जिसमें 2017 में इनकी सं या 118, 2016 में 125 और 2015 में 96 रही। साल दस साल टीबी के मरीजों की सं या में इजाफा हुआ है।
जिला टीबी नियंत्रण कार्यक्रम अधिकारी.डॉ. शीला भगत ने अबतक न्यूज़ टीम को बताया कि गत सालों की अपेक्षा जिले में टीबी के मरीजों की सं या में इजाफा हुआ है। हम प्रयास कर रहे हैं कि मरीजों को उनके घर के पास ही इलाज मिल जाए ताकि उनकी स्थिति में सुधार आए। टीबी को शुरूआती लक्षणों से डिटेक्ट कर लेना इसका सबसे अच्छा इलाज है। बाकि कमी डॉट सेंटरों में पूरी हो जाती है। और लोगों की जान बचाई जा सकती है। इसी के तहत हम ईएसआइ अस्पताल में भी डॉट सेंटर खोलने की तैयारी कर रहे हैं।



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