Wednesday, March 21, 2018

सराय ख्वाजा के सरकारी स्कूल में विश्व वानिकी दिवस पर जूनियर रेड क्रॉस द्वारा पौधरोपण

Planting by the Junior Red Cross on World Forestry Day in Government School of Sarai Khwaja

फरीदाबाद (abtaknews.com)सराय ख्वाजा राजकीय आदर्श वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय की जूनियर रेड क्रॉस और  सैंट जॉन एम्बुलेंस ब्रिगेड  द्वारा आज विश्व वानिकी दिवस मनाया गया इस अवसर पर विद्यालय के जूनियर रेड क्रॉस व् सैंट जॉन एम्बुलेंस ब्रिगेड अधिकारी रविंदर कुमार मनचंदा ने बच्चों और अध्यापकों के साथ पौधरोपण किया।  मनचंदा ने पौधरोपण करते हुए बच्चों को बताया कि  विश्व वानिकी दिवस पहली बार वर्ष 1971 में इस उद्देश्य से मनाया गया था कि दुनिया के तमाम देश अपनी मातृभूमि की मिट्टी और वन . सम्पदा का महत्व समझे तथा अपने . अपने देश के वनों और जंगलों का संरक्षण करें। अगर हम अपने देश भारत की बात करें तो 22ण्7ः भूमि पर ही वनों और जंगलों का अस्तित्व रह गया है । वर्तमान में केवल 19ण्39: भूमि ही वन युक्त रह गई है। भारत में 19ण्39: भूमि पर वनों का विस्तार है और छत्तीसगढ़ राज्य में सबसे अधिक वन सम्पदा है  उसके बाद क्रमशरू मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश राज्य मेंए  भारत में वन महोत्सव तो जुलाई 1950 से ही मनाया जा रहा है। परन्तु वानिकी दिवस की शुरुआत तत्कालीन गृहमंत्री कुलपति कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी ने की थी।1952  में निर्धारित ष्राष्ट्रीय वन नीतिष् के तहत देश के 33ण्3: क्षेत्र पर वन होने चाहिए। लेकिन वर्तमान समय में ऐसा नहीं है। वन.भूमि पर उद्योग.धंधों तथा मकानों का निर्माणए वनों को खेती के काम में लाना और लकड़ियों की बढती माँग के कारण वनों की अवैध कटाई आदि वनों के नष्ट होने के प्रमुख कारण है। इसलिए अब समय आ गया है कि देश की ष्राष्ट्रीय निधिष् को बचाए और इनका संरक्षण करें। हमें वृक्षारोपण यानि पेड़.पौधे लगाने को बढ़ावा देना चाहिए। इसके सम्बन्ध में प्रसिद्ध पर्यावरणविद  कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी ने कहा था कि .ष्वृक्षों का अर्थ है जलए जल का अर्थ है रोटी और रोटी ही जीवन है।

विद्यालय के इंग्लिश प्रवक्ता  रविंदर कुमार मनचंदा ने कहा की इस दि‍न दक्षि‍णी गोलार्ध में रात और दि‍न बराबर होते हैंण् यह दि‍न वनों और वानि‍की के महत्त्व और समाज में उनके योगदान के तौर पर मनाया जाता हैण् रि‍यो में भू.सम्‍मेलन में वन प्रबंध को मान्‍यता दी गई थी तथा जलवायु परि‍वर्तन और पृथ्‍वी के तापमान में वृद्धि‍ से नि‍पटने के लि‍ए वन क्षेत्र को वर्ष 2007 में 25 प्रति‍शत तथा 2012 तक 33 प्रति‍शत करने की आवश्‍यकता पर बल दि‍या गया था  वन.भूमि पर उद्योग.धंधो तथा मकानों का निर्माणए वनों को खेती के काम में लाना और लकड़ियों की बढती माँग के कारण वनों की अवैध कटाई आदि वनों के नष्ट होने के प्रमुख कारण हैण् जिसमें विगत नौ वर्शों में 2ण्79 लाख हेक्टेयर वन क्षेत्र विकास की भेंट चढ़ गये जबकि 25 हजार हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रत्येक साल घट रहा है। पेड़ों की अंधाधुध कटाई एवं सिमटते जंगलों की वजह से भूमि बंजर और रेगिस्तान में तब्दील होती जा रही है जिससे दुनियाभर में खाद्य संकट का खतरा मंडराने लगा है। यूएनईपी के मुताबिकए विष्व में 50.70 लाख हेक्टेयर भूमि प्रतिवर्ष  बंजर हो रही है वहीं भारत में ही कृषि .योग्य भूमि का 60 प्रतिषत भाग तथा अकृषित भूमि का 75 प्रतिशत भाग हास हो रहा है भारत में पिछले नौ सालों में 2ण्79 लाख हेक्टेयर वन क्षेत्र विकास की भेंट चढ़ गए जबकि यहां पर कुल वन क्षेत्रफल 6ए90ए899 वर्ग किलोमीटर है। वन न केवल पृथ्वी पर मिट्टी की पकड़ बनाए रखता है बल्कि बाढ़ को भी रोकता और मृदा को उपजाऊ बनाए रखता है।  मानव को अपनी गतिविधियों पर सोच.समझकर काम करना होगा जिससे कि इंसान प्रकृति से दुबारा जुड़कर उसका संरक्षण कर सके अन्यथा वह दिन अब ज्यादा दूर नहीं जब जैव विविधता पर मंडराता यह खतरा भविश्य में हमारे अस्तित्व पर भी प्रश्न चिह्न लगा दे।  इस मौके पर प्राचार्या नीलम कौशिकए  रविंदर कुमार मनचंदाए शारदाए प्रज्ञा देवीए सरोज दलालए विनोद अग्रवालए विनोद शर्माए वीरपालए रूपकिशोरए संजय शर्माए श्रीनिवासए लीलूए ईश कुमारए ब्रह्मदेव यादव ए बिजेन्दर सिंहए वेदवती  और  रमाकांत गुप्ता ने  जूनियर रेड क्रॉस  के माध्यम से घर  में आफिस में जहाँ भी अवसर मिले पौधे लगा कर प्रदूषण दूर कर वन क्षेत्र बढाने का निवेदन किया। 

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