Tuesday, March 27, 2018

स्वच्छ ऊर्जा से अर्थव्यवस्था को मिलेगी बढ़त ; संदीप पॉल

Clean energy will give rise to the economy; Sandeep Paul

मध्य प्रदेश (abtaknews.com) 27 मार्च,2018 ; भारत पिछले कुछ वर्षों से एक क्षेत्रीय शक्ति होने के साथ विश्व पटल पर भी एक मजबूत देश के तौर पर उभर रहा है। भारत विश्व के उन देशों में शामिल है जहां आर्थिक विकास वृद्धि ;जीडीपीद्ध दर सबसे अधिक हैए और जहां वैश्विक मंदी के बावजूद अर्थव्यवस्था में मजबूती लगातार बनी हुई है। इस तथ्य के पीछे कई कारण हैं।भारत की जनसँख्या में एक विशाल मध्यम वर्ग शामिल है जो हमारी अर्थ व्यवस्था की रीढ़ हैए क्योंकि यह वर्ग हमारी आर्थिक व्यवस्था में आन्तरिक उत्पादन की मांग बनाये रखता है। भारत की लगभग 127 करोड़ की जनसँख्या का करीब दो.तिहाई हिस्सा उम्र में 35 वर्ष से कम हैए और इस दर से आने वाले समय में भारत एक युवा देश के तौर पर उभरेगा क्योंकि औसत भारतीय की आयु और कम होगी। ऐसा अनुमान है कि वर्ष 2020 में औसत भारतीय की आयु 29 वर्ष होगीए जबकि चीन में यह 37 वर्ष और जापान में 48 वर्ष होगी।जनसँख्या में इस प्रकार के युवा और अधिक शिक्षित समाज का उदय यह संकेत है कि भारतीय अर्थ व्यवस्था को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सहयोग के अधिकाधिक मौके मिलेंगे जिससे भारत में उत्पादन के क्षेत्र के विस्तार एवं आधुनिकीकरण को बढ़ावा मिलेगा। इस प्रकार भारत अंतर्राष्ट्रीय स्तर के उत्पादन केंद्र के तौर पर स्थापित हो सकता है। इससे भारत न केवल वैश्विक अर्थ व्यवस्था में बड़े स्तर पर प्रतिभागी बनेगाए बल्कि रोजगार के अनन्य अवसर भी सृजित होंगेए जो ष्मेक इन इंडियाष् का वास्तविक उद्देश्य है।

इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए एक सबसे बड़ी जरूरत है भारत में बिजली की निर्बाध उपलब्धता। अर्थ व्यवस्था में वृद्धि के लिए भारत में विद्युत उत्पादन भी उतनी ही तेज गति से बढ़ना आवश्यक है क्योंकि इसके बिना दुनिया के बड़े उत्पादक संगठन भारत में दीर्घ.कालीन निवेश करने में हिचकेंगे। यह कहा जा सकता है कि ष्मेक इन इंडियाष् की सफलता के लिए स्वच्छ और शीघ्र बिजली उत्पादन बढाने की आवश्यकता है।
भारत के आर्थिक विकास के इस स्वप्न को सार्थक करने के लिए हमें ऊर्जा संसाधनों के वर्तमान परिदृश्य पर नजर डालनी होगी। हमारे देश में फॉसिल ;जीवाश्मद्ध इंधन के भंडार बहुत अधिक नहीं हैंए हमें अपने आवश्यकता के इंधन की अधिक मात्रा का आयात करना पड़ता है। भारत में उपलब्ध बिजली का बड़ा हिस्सा देश में उत्पादित कोयले को जलाने से ही पैदा होता हैए और कोयला आयात भी करना पड़ता है। पर्यावरण सम्बन्धी चिंताओंए विशेषकर ग्लोबल वार्मिंग और प्रदूषण के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव के कारण आने वाले समय में बिजली उत्पादन के लिए कोयले पर निर्भरता कम करें। हाल ही में संपन्न हुए अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण सम्मलेन सीण्ओण्पीण्.23 में भी प्रतिभागियों ने दुनिया के देशों में कोयले पर निर्भरता पर चिंता व्यक्त की थी।

भारत में दुनिया का तीसरा सबसे अधिक विद्युत उत्पादन होता हैए और देश में विद्युत उत्पादन क्षमता 334ण्39 गीगावाट है ;जनवरी 2018 के आंकड़ेद्ध। इसमें तापीय विद्युत ;थर्मलद्ध का हिस्सा 219ण्8 गीगावाटए जल विद्युत का 44ण्9 गीगावाट और नाभिकीय ऊर्जा का अंश केवल 6ण्78 गीगावाट है। इससे यह स्पष्ट है कि नाभिकीय ऊर्जा में वृद्धि के असीम संभावनाएं हैं जिससे आर्थिक विकास को बढ़ावा मिल सकता है और देश समृद्धि के नए आयाम प्राप्त कर सकता है। इससे प्रति व्यक्ति ऊर्जा खपत भी बढ़ेगीए जिससे देश में विद्युत की मांग और आपूर्ति के बीच अंतर कम होगा।

भारत विश्व में तेल का तीसरा सबसे बड़ा आयातक हैए और यहाँ अन्य पेट्रोलियम पदार्थों व एलएनजी का आयात भी बहुत अधिक होता है। देश में ही उपलब्ध अक्षय ऊर्जा के संसाधनों का अधिक उपयोगए और नाभिकीय ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा दे कर भारत की निर्भरता महंगे आयातित जीवाश्म इंधन पर घटाई जा सकती है। भारत के समक्ष पर्यावरण सम्बंधित ऐसे लक्ष्य भी हैं जिन्हें पूरा करने के लिए फॉसिल इंधन के उपयोग में लगातार कमी लाना जरुरी है। चुनौती यह है कि पारंपरिक इंधन के स्त्रोतों के इस्तमाल को कम करने के साथ ही तेज़ी से बढती अर्थ व्यवस्था की मांग को कैसा पूरा किया जाये। निश्चित तौर पर स्वच्छ और सतत ऊर्जा ही भविष्य की मांग है।

भारत के समक्ष उपलब्ध स्वच्छ ऊर्जा के विकल्पों में एक नाभिकीय ऊर्जा है। भारत में नाभिकीय ऊर्जा 48 वर्षों से प्रयोग में लायी जा रही है। वर्ष 1969 में महाराष्ट्र में स्थित तारापुर एटॉमिक पॉवर स्टेशन में सबसे पहली बार भारत में वाणिज्यिक तौर पर बिजली का उत्पादन प्रारंभ हुआ थाए और तबसे अब तक इस क्षेत्र में सुरक्षा का त्रुटिहीन रिकॉर्ड रहा है। भारत में प्रेशराईज्ड हैवी वाटर रिएक्टर ;पीण्एचण्डब्लूण्आरण्द्ध तकनीक में कुशलता हासिल की जा चुकी है जिससे नाभिकीय ऊर्जा से स्वच्छ विद्युत का उत्पादन किया जा सकता है। आगामी वर्षों में पीण्एचण्डब्लूण्आरण् तकनीक के कई नाभिकीय ऊर्जा रिएक्टर स्थापित किये जा रहे हैं और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के साथ बड़ी संख्या में लाइट वाटर रिएक्टर ;एलण्डब्लूण्आरण्द्ध भी स्थापित किये जा रहे हैं। इस प्रयास से देश में पहले से चल रहे रिएक्टर से पैदा की गयी नाभिकीय ऊर्जा में वृद्धि होगीए जिससे अगले दो.तीन दशकों में नाभिकीय ऊर्जा की स्थापित उत्पादन क्षमता बढ़ेगी। भारत.रूस सहयोग से स्थापित कुडनकुलम न्यूक्लियर पॉवर प्रोजेक्ट इस श्रृंखला का पहला संयंत्र है। देश में बिजली उत्पादन बढ़ाना भारत सरकार की प्राथमिकताओं में हैए जिससे मांग और उपलब्धता के बीच के अंतर को कम किया जा सके और इसी की कड़ी में उत्पादन बढाया जा सके। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए भारत ने कई देशों के साथ समझौते किये हैं जिसके अंतर्गत नाभिकीय ऊर्जा का शांतिपूर्ण उपयोग दृ विशेषकर बिजली उत्पादन के लिए . किया जा सके।

मई 2017 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने उस प्रस्ताव को पारित किया जिसके अंतर्गत देश में 10 स्वदेश.निर्मित परमाणु रिएक्टर स्थापित किये जाएँगेए और यह इस प्रकार का पहला निर्णय था। इन 700 मेगावाट क्षमता के 10 रिएक्टर से देश के नाभिकीय उद्योग में तेजी आएगी। इसके कारण आने वाले कई सालों तक देश के स्वदेशी और निजी क्षेत्र में उत्पादन में तेजी बनी रहेगी।इन विशाल परियोजनाओं की वजह से न केवल देश में आर्थिक समृद्धि आएगीए बल्कि भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में सतत विकास की प्रक्रिया कोए ऊर्जा आत्मनिर्भरता और जलवायु परिवर्तन से निबटने के वैश्विक प्रयासों को भी बल मिलेगा।


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