Saturday, February 3, 2018

मेले के अपना घर में पगडियां पहनकर सम्मानिम महसूस कर रहे हैं दर्शक


सूरजकुण्ड, 3 फरवरी-भारत देश में सम्मान के प्रतीक के रूप में पगडी को पहनाया जाता है और हर राज्य, हर क्षेत्र, हर समुदाय तथा हर भाषा से संबंधित अलग-अलग प्रकार की पगडियां एक दूसरे को सम्मान के रूप में पहनाई जाती हैं। हरियाणा में भी कई सालों से पगडी पहनाने का रिवाज है और इसे हरियाणा में सम्मान के प्रतीक के रूप में समझा जाता है। 
इस बार फरीदाबाद में चल रहे 32वें अंर्तराष्ट्रीय सूरजकुण्ड षिल्प मेला में हरियाणा ने अपना घर स्थापित किया है तथा अपना घर में आने वाले लोगों तथा युवाओं को पगडी के प्रति जागरूक करने के लिए पगडी पहनाई जा रही हैं। उन्हें हरियाणा की इस सांस्कृतिक धरोहर से रूबरू करवाया जा रहा है ताकि वे इस पगडी परंपरा के साथ जुडे रहें। 
पगडी के बारे में और जानकारी देते हुए कुरूक्षेत्र विष्वविद्यालय से आए हुए डा. महासिंह पूनिया ने बताया कि हरियाणा में पगडी का प्रचलन पिछले 5 हजार सालों से है और ऐसा माना जाता है कि पगडी की शुरूआत आदि षिव ने अपनी जटाओं से की थी और उसके बाद योद, हूंण, शक मुगल काल तक पगडी का प्रचलन रहा। उन्होंने बताया कि हरियाणा में क्षेत्र और समुदाय के अनुसार पगडियों का प्रचलन है जैसे कि अहीरवाल में अहीरवाटी, मेवात में मेवाती, खादर, बांगर, बांगड के साथ-साथ कौरवी पगडी भी हरियाणा में प्रचलित है और इस प्रकार की पगडियों का स्वरूप हमें देखने को मिलता है।
उन्होंने बताया कि अपना घर में युवाओं को पगडी के बारे में जागरूक करने के लिए आकर्षक तौर पर यहां आने वाले लोगों को पगडी पहनाई जा रही है ताकि उनमें पगडी के प्रति और अधिक आकर्षण बढ सके और वे अपनी इस सांस्कृति धरोहर को संजोकर रख सके। 
अपना घर में गुरूग्राम से आए हुए अविनाष ने बताया कि उन्होंने आज यहां केसरिया रंग की पगडी बंधवाई है और वे काफी अच्छा अनुभव कर रहे हैं कि पहले हमारे बुजुर्ग पगडी पहनकर किस प्रकार से दिखाई देते होंगे और उनका समाज में क्या रूतबा रहता होगा। वे इस समझ को आज पगडी पहनने के बाद महसूस कर पा रहे हैं क्योंकि उनके साथ आए हुए उनके सगे संबंधी उन्हें बडे ही आकर्षक व आष्चर्य होकर देख रहे हैं। इसी प्रकार दिल्ली के पहाडगंज से आए हुए संजय त्यागी ने बताया कि उन्होंने ने भी आज यहां एक पगडी भूरे रंग की पगडी पहनी है, जिसे पहनकर वे गौरवांवित महसूस कर रहे हैं। 

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