Thursday, February 15, 2018

त्रिमूर्ति सूरजकुंड मेला की खूबसूरती को लगा रही चार चांद


सूरजकुण्ड, 14 फरवरी(abtaknews.com)- फरीदाबाद के सूरजकुण्ड में चल रहे 32वें अंतर्राष्ट्रीय सूरजकुण्ड षिल्प मेला में मुंबई की प्रसिद्ध ऐलिफेंटा गुफा की त्रिमूर्ति सूरजकुंड मेला की खूबसूरती को चार चांद लगा रही है और हर आने-जाने वाले को अपनी ओर आकर्षित कर रही हैं। इस त्रिमूर्ति पर दूर से ही नजरें पड जाती है और इस मूर्ति की नायाब खूबसूरती पर आकर ठहर जाती है। 
एलिफेंटा की गुफाएं कलात्मक कलाकूतियों की श्रृंखला है जो कि एलिफेंटा आईलैंड में स्थित है। मुंबई के गेटवे आफ इंडिया से लगभग 12 किमी की दूरी पर अरब सागर में स्थित यह छोटा सा टापू है। भगवान शिव के कई रूपों को उकेरा गया है। यहां भगवान शंकर की बड़ी-बड़ी मूर्तियां हैं। यहां का शिल्प दक्षिण भारतीय मूर्तिकला से प्रेरित है। 
हरियाणा के फतेहाबाद जिला से सूरजकुंड मेला देखने आए प्रदीप गोयल ने बताया कि उन्होंने मुम्बई यात्रा के दौरान ऐलिफेंटा की गुफाओं में इस प्रकार की मूर्ति के दर्षन किए थे। उन्होंने बताया कि त्रिमूर्ति देखते हुए उन्हें ऐसा प्रतीत हो रहा है मानो वे ऐलिफेंटा की गुफाओं में आ गए हों। इस त्रिमूर्ति की सुंदरता देखकर हर कोई मंत्रमुग्ध हो जाता है। सूरजकुंड मेला में इस मूर्ति के प्रति आकषर्ण देखते ही बनता है और मेला देखने वाले इस त्रिमूर्तिक के साथ सेल्फी लेने के साथ-साथ फोटो खींचने के लिए ललायित हो जाते हैं। 
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सांस्कृतिक संध्या पर पहुंचे पद्मविभूषण सम्मानित पंडित बिरजू महाराज
फरीदाबाद जिला के सूरजकुंड में चल रहे 32वें अंतर्राष्ट्रीय सूरजकुंड षिल्प मेला में आज की सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ पद्मविभूषण से सम्मानित भारतीय शास्त्रीय नृत्य कत्थक के मशहूर कलाकार पंडित बिरजू महाराज ने किया।इस मौके पर कत्थक नृत्यांगना इलिशा दीप गर्ग ने अपने साथी कलाकार सन्नी सिशोदिया के साथ मिलकर कत्थक नृत्य की बेहतरीन प्रस्तुतियों से दर्षकों का दिल जीत लिया। दर्शकों ने भी बेहद संजीदगी के साथ उनकी प्रस्तुतियों का आनंद लिया और जमकर तालियां बजाईं। 
इस अवसर पर पर्यटन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री विजय वर्धन ने कहा कि पंडित बिरजू महाराज ऐसी शख्सियत है जो घुंघरू की झंकार से दर्शकों का मन मोह लेते हैं। ताल और घुंघरु की तालमेल करना एक नर्तक के लिए आम बात हैं लेकिन अपनी घुंघरु की झनक पर दर्शकों को सम्मोहित करने की बात हो तो बिरजू महाराज का नाम सबसे पहले आता है। उन्होंने कथक को ना सिर्फ भारत बल्कि पूरे विश्व में एक अलग मुकाम पर पहुंचाया और कथक को और आगे ले जा रहे हैं। इसके लिए वे बधाई के पात्र हैं। 
इसके उपरांत मषहूर पंजाबी गायक शंकर साहनी ने षिवरात्रि महत्व पर चर्चा करने के साथ ही महामृत्युंजय जाप प्रस्तुत किया। षिव स्तुति के बाद शंकर साहनी ने पंजाबी गीतों से धूम मचाई और दर्षकों को झूमने पर मजबूर कर दिया।
इस मौके पर सूरजकुंड मेला प्राधिकरण के मुख्य प्रषासक समीरपाल सरो, एसीएस विजय वर्धन की धर्मपत्नी संगीता वर्धन सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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