Thursday, February 15, 2018

बिजली के बेकार तारों से बनाई लाजवाब पेंटिंग, मेले में दर्शकों को पसंद आ रही है वायर पेंटिंग

Wonderful painting made from useless wires of electricity, the audience is enjoying the fair in the fair Wire painting

फरीदाबाद(abtaknews.com-दुष्यंत त्यागी) 15 फरवरी,2018 ; सूरजकुंड मेेले में बिजली की बेकार तारों से फरीदाबाद के एक शिल्पकार ने नरेन्द्र मोदी, योगी आदित्यनाथ और मनोहर लाल खट्टर की आकर्षक पेंटिंग बनाकर सबको चोंका दिया है, बेकार बिजली की तारें, प्लास्टिक टेप और लोशन के इस्तेमाल से आकर्षित पेंङ्क्षटग बनाई जा सकती है, यह बात सुनने में बिल्कुल अजीब लगती हो, लेकिन गांव एतमादपुर, फरीदाबाद निवासी उदित नारायण बैंसला ने वुडन के सहारे ऐसी पेंङ्क्षटग बनाने में महारत हासिल कर लिया है। ऐसा करके शिल्पकार न केवल पर्यावरण सरंक्षण का संदेश दे रहे हैं बल्कि बेकार प्रदूषित चीजों का उपयोग भी कर रहे हैं। लेकिन सबसे बडी बात तो यह है कि ऐसा करने वाले शिल्पकार को मेले में स्टाल लेने के लिये चंडीगढ तक चक्कर काटने पडे हैं तब जाकर उन्हें 7 फरवरी को मेले में स्टॉल दी गई है वो भी ऐसी जगह जहां दर्शक पहुंच नहीं पा रहे हैं।
Wonderful painting made from useless wires of electricity, the audience is enjoying the fair in the fair Wire painting

सूरजकुंड में चल रहेे मेले में सभी कलाकार अलग अलग अपनी शिल्पकारी दिखा रहे हैं वहीं फरीदाबाद के एक छोटे से गांव के रहने वाले शिल्पकार उदित नारायण बैसला ने कुछ अलग हटकर शिल्प करने की सोची है यह सोच लोगों को खूब भा रही है, बैंसला ने बेकार पडी हुई बिजली की तारों से आकर्षित करने वाली पेंटिंग बनाकर लोगों को हैरत में डाल दिया है। शिल्पकार बैंसला ने बताया कि उनके मन में लंबे समय से समाज के लिए कुछ करने की चाह थी। जगह-जगह बिखरी बिजली की तारों तथा प्लास्टिक टेप देखकर उनके मन में विचार आया कि पर्यावरण संरक्षण के लिए कुछ किया जाए। करीब दो वर्ष पहले उन्होंने इन तारों के उपयोग से पेंङ्क्षटग बनाना शुरू कर दिया। जगह-जगह सराहना होने लगी तो उन्हें बल मिला। 

पेंटिंग बनाने का तरीका बताते हुए बैंसला ने बताया कि सबसे पहले लकड़ी का बोर्ड लेते हैं। इस पर पेंसिल से डिजाइन तैयार कर लेते हैं। फिर इसके बाद बिजली की बारीक तारों को बोर्ड में सेट कर देते हैं। जैसे पहले नरेन्द्र मोदी और योगी की मूर्ति को पेंसिल से तैयार कर लिया। उसी मुताबिक बिजली की तारों को व्यवस्थित तरीके से सजाया जाता है। इस काम में लोशन तथा प्लास्टिक टेप का प्रयोग करते हैं। बोर्ड पर पेड़-पौधों की पेंङ्क्षटग भी की जाती है। साथ ही स्वच्छता अभियान का भी संदेश दिया जाता है। सबसे बडी बात ये हैं कि इन पेंटिंगों में न तो रंग का प्रयोग किया जाता है और न ही किसी प्रकार के मेटेरियल का, ये पेंटिंगे सालों साल चलने वाली पेंटिंगे हैं। वहीं शिल्पकार उदित नारायण पर्यटन विभाग ये कुछ नाराज नजर आ रहे हैं और हो भी क्यों न एक शिल्पकार को फूडकोर्ट के पीछे बिठा दिया गया है जहां दर्शक पहुंच ही नहीं पा रहे हैं। उन्हें स्टाल नंबर 1057 दी गई है। यह स्टाल फूडकोर्ट के आखिरी हिस्से में है। इतना ही नहीं ये स्टॉल प्राप्त करने के लिये शिल्पकार ने बहुत पहले से चंडीगढ के चक्कर काटना शुरू कर दिये थे मगर उसके बाद भी मेले के करीब 7 दिन गुजर जाने के बाद उन्हें ये स्टॉल दी गई। 

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