Friday, February 2, 2018

सिरसा में चला जागरूकता अभियान, ऊर्जा के संसाधन सीमित संरक्षण की मांग

Awareness campaign launched in Sirsa, resource conservation limited demand for protection

सिरसा-फरवरी  02,2018(abtaknews.com) दुनिया में तेजी से हो रहे विकास के चलते ऊर्जा की मांग लगातार बढ़ रही है। आज उद्योग, स्वास्थ्य सेवाएँ, शिक्षा, विज्ञान, रिसर्च आदि क्षेत्रों में हो रहे विकास और लोगों की बढ़ती महत्वकांक्षाओं को मूर्त रूप देने के लिए प्राकृतिक संसाधनों का तेजी से दोहन हो रहा है। ऊर्जा के अधिकतर संसाधन सीमित हैं। हमें यह समझना होगा कि हम जितना ज्यादा से ज्यादा ऊर्जा स्रोतों की बचत करेंगे, भविष्य में वह उतना ही काम आएंगी। यह बात सीएमके पी जी काॅलेज सिरसा में आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला (ऊर्जा का संरक्षण समय की मांग) के दौरान कार्यक्रम के संचालक संदीप पाल ने कही। कार्यशाला का आयोजन भारत सरकार के उपक्रम (एनपीसीआईएल) द्वारा किया गया था।
Awareness campaign launched in Sirsa, resource conservation limited demand for protection

श्री पाल ने कहा कि आजादी के सात दशकों के बाद भी हिन्दुस्तान के करोड़ों घरों को एक अदद रौशनी की दरकार है। हालाँकि देश में बिजली का उत्पादन बढ़ा है लेकिन जिस प्रकार से जनसंख्या तीव्र गति से बढ़ रही है, और संसाधनों का दोहन हो रहा है।
आज संपूर्ण विश्व में थर्मल पावर से निर्मित बिजली, ग्लोबल वॉरमिंग और वातावरण में उत्सर्जित होने वाली कई हानिकारक गैसों के चलते होने वाले वायु प्रदूषण के कारण एक गहन चिंता का विषय बनी हुई है, यहाँ तक कि जीवाश्म ईंधन होने के कारण कोयले के भंडार भी सीमित हैं, हाइड्रो को भी हमने पूरी तरह से लगभग दोहन कर लिया है, साथ ही पवन और सौर ऊर्जा की अपनी अपनी सीमायें हैं। सौर और पवन की उत्पादन क्षमता, ज्यादा जगह, धूप और हवा के प्रवाह की समुचित उपलब्धता पर निर्भर हैं। ऐसे में परमाणु ऊर्जा एक स्वच्छ और हरित ऊर्जा का किफायती विकल्प साबित हो रहा हैै। 
इस अवसर पर सीएमके पी जी काॅलेज की प्राचार्या डा. विजया तोमर ने छात्राओं से कहा कि आज हमें कुछ और उपायों पर भी ध्यान देना होगा ताकि हम बिजली बनाने के साथ-साथ इसका संरक्षण भी भली भांति कर सकें। उदाहरण के तौर पर हमे आज ज्यादा से ज्यादा एलईडी बल्बों को उपयोग में लाना चाहिए ताकि एक तरफ हमें कम वाट पर अच्छी रौशनी मिल सके और दूसरी तरफ बिजली की भी खपत कम हो सके। जहाँ जरूरी न हो वहां दिन में बल्ब का इस्तमाल न करें। जिस जगह आप न बैठें हो वहां व्यर्थ में एसी, पंखे या फिर अन्य उपकरणों को बंद कर के रखें। घरों और कार्यालयों का भी निर्माण आधुनिक पद्यति से इस प्रकार से किया जाये जहाँ प्राकृतिक रूप से ज्यादा से ज्यादा सूर्य की रौशनी और हवा मिल सके। सड़कों के किनारे लगे हुए लैंप पोस्टों को दिन में बंद रखा जाये, स्कूल्स, मॉल एवं मल्टी पलेक्सेस में रूफ टॉप पर सोलर पैनल्स को अनिवार्य करना चाहिए, घरों में अगर संभव हो तो सौर ऊर्जा पर आधारित गीजर और कुकर का इस्तमाल करके हम काफी हद बिजली बचा कर ऊर्जा का संरक्षण कर सकते हैं।
कार्यशाला के दूसरे दिन (कहानी बुधिया की) विशेष एनिमेटेड फिल्म भी प्रदर्शित की गयी। तथा प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। जिसमें सर्वाधिक सही उत्तर देने वाली छात्राओं को काॅलेज की प्राचार्या डा. विजेता तोमर ने सर्टिफिकेट व एक था बुधिया काॅमिक व सीडी पदान की देकर सम्मानित किया। 

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