Saturday, February 10, 2018

सराय ख्वाजा सरकारी स्कूल में स्वामी दयानंद सरस्वती जयंती पर संगोष्ठी का आयोजन



Organizing a seminar on Swami Dayanand Saraswati Jayanti at Sarai Khwaja Government School

फरीदाबाद(abtaknews.com) 10 फ़रवरी,2018 ; सराय ख्वाजा की जूनियर रेड क्रॉस और संत जॉन एम्बुलेंस ब्रिगेड ने प्राचार्या  श्रीमती नीलम कौशिक की अध्यक्षता और इंग्लिश प्रवक्ता रविंदर कुमार मनचंदा के नेतृत्व में स्वामी दयानंद सरस्वती जयंती पर संगोष्ठी का आयोजन किया।   रविंदर कुमार मनचंदा ने बताया कि  स्वामी दयानंद सरस्वती का जन्म एक हिंदु धर्म के नेता के रूप में हुआ, वे आर्य समाज के संस्थापक थे. हिन्दुओ में वैदिक परंपरा को मुख्य स्थान दिलवाने के अभियान में उनका मुख्य हात था. वे वैदिक विद्या और संस्कृत भाषा के विद्वान थे, वह पहले व्यक्ति थे जिन्होंने स्वराज्य की लड़ाई शुरू की जिसे 1876 में भारतीयों का भारत नाम दिया गया, जो बाद में लोकमान्य तिलक  ने अपनाया. उस समय हिन्दुओ में मूर्ति पूजा काफी प्रचलित थी, इसलिए वे उस समय वैदिक परंपरा को पुनर्स्थापित करना चाहते थे.परिणामस्वरूप महान विचारवंत और भारत के राष्ट्रपति एस. राधाकृष्णन ने उन्हें  आधुनिक भारत के निर्माता कहा, जैसा की उन्होंने श्री अरबिन्दो को कहा था जिनपर दयानंद का बहुत  प्रभाव पड़ा, और उनके अनुयायियों की सूचि में  पंडित लेख राम, स्वामी श्रद्धानंद, पंडित गुरु दत्त विद्यार्थी, श्याम कृष्णन वर्मा, जिन्होंने इंग्लैंड में भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों का घर निर्मित किया था, लाला हरदयाल, मदन लाल धींगरा, राम प्रसाद बिस्मिल ,लाला लाजपत रॉय , महादेव गोविन्द, महात्मा हंसराज और कई लोग शामिल थे। दयानंद सरस्वती द्वारा किया गया सबसे प्रभावी कार्य मतलब ही उनकी किताब “सत्यार्थ प्रकाश” थी. जिसमे भारतीय स्वतंत्रता की नीव रखी गयी. वे लकड़पन से ही सन्यासी और विद्वान थे, जो वेदों की अपतनशील शक्तियों पर भरोसा रखते थे। महर्षि दयानंद कर्म और पुनर्जन्म के सिद्धांत के अधिवक्ता थे. वे वैदिक क्रिया जैसे ब्रह्मचर्यं और भगवान की भक्ति पर ज्यादा ध्यान देते थे. अध्यात्म विद्या विषयक समाज और आर्य समाज को 1878 से 1882 तक एकजुट किया गया. जो बाद में आर्य समाज का ही भाग बना।  महर्षि दयानंद के महान कार्यो में महिलायों के हक्को के लिए लड़ना भी शामिल है. महिलाओ के हक्क जैसे- पढाई करने का अधिकार, वैदिक संस्कृति पढने का अधिकार इन सब पर उन्होंने उस समय ज्यादा जोर दिया, ताकि सभी लोग हिंदु संस्कृति को अच्छी तरह से जान सके. दयानंद वो पहले व्यक्ति थे जिन्होंने दलितों को स्वदेशी और हरिजन अजिसे नाम दिए और महात्मा गाँधी  से भी पहले अछूत परंपरा को दूर किया था।  भारतीय स्वतंत्रता के अभियान में महर्षि दयानंद सरस्वती का बहोत बड़ा हात था. उन्होंने अपने जीवन में कई तरह के समाज सुधारक काम किये. और साथ ही लोगो को स्वतंत्रता पाने के लिए प्रेरित भी किया। इस अवसर पर संजय मिश्रा ने भी  महर्षि दयानंद सरस्वती  के जीवन से परिच करवाया।   प्राचार्या  श्रीमती नीलम कौशिक,  रविंदर कुमार मनचंदा, मौलिक मुख्याध्यापक ईश कुमार , ब्रह्मदेव यादव, अधिवक्ता श्री नरेंदर कुमार ,  संजय मिश्रा, बिजेन्दर सिंह   और सुनील पराशर  ने  महर्षि दयानंद सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण किया और और उन के सिद्धांतों पर चलने की सीख दी।  
प्राचार्या नीलम कौशिक ने कहा की आर्य समाज को स्थापित कर के उन्होंने भारत में डूब चुकी वैदिक परम्पराओ को पुनर्स्थापित किया और विश्व को हिंदु धर्म की पहचान करवाई. उनके बाद कई स्वतंत्रता सेनानियों ने उनके काम को आगे बढाया. और आज ऐसे ही महापुरुषों की वजह से हम स्वतंत्र भारत में रह रहे है। 
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सराय ख्वाजा के सरकारी स्कूल में राष्ट्रीय कृमि दिवस पर छात्रों को खिलाई टेबलेट 
Late tablets to students on national worm day at Government School of Sarai Khwaja

फरीदाबाद(abtaknews.com) 10 फ़रवरी,2018 ;  राजकीय आर्दश वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सराय ख्वाजा, फरीदाबाद की जूनियर रेेेेैड क्रास तथा सेंट जान एबुंलैंस बिग्रेड के संयुक्त तत्वाधान में प्राचार्या श्रीमति नीलम कौशिक की अध्यक्षता में राष्ट्रीय कृमि दिवस पर विद्यालय के एक से उन्नीस वर्ष के सभी बच्चों को कृमि नष्ट करने की दवा के रुप में अलबेन्डाजोल टेबलेट खिलाई गई।
विद्यालय के जूनियर रेेेेैडक्रास व सेंट जान एबुंलैंस बिग्रेड अधिकारी रविन्द्र कुमार मनचन्दा ने बताया कि स्वास्थय विभाग के  सहयोग से प्राचार्या श्रीमति नीलम कौशिक, स्वंय उन्होनें, जूनियर रेेेेैडक्रास के सदस्यों, रेनु शर्मा, शारदा, वीरपाल पीलवान, बिजेन्द्र सिंह और तथा सभी कक्षाओं में अध्यापकों नें बच्चों को अलबेन्डेन्जोल की टेबलेट निःशुल्क खिलवाई। इस अवसर पर रविन्द्र कुमार मनचन्दा ने कहा कि स्वास्थय विभाग द्वारा सभी सरकारी, प्राईवेट स्कूलों, आंगनवाडी और प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर सभी बच्चों जिन में स्कूल न जा पाने वाले बच्चें भी है, टेबलेट खिलाई जा रही है। सब बच्चों को बताया जा रहा है कि वें इस गोली को चबाकर ही खाएं और चलते समय पैरों में चप्पल या शूज अवश्य पहने और नंगे पांव ना चलें अंग्रेजी प्रवक्ता रविन्द्र कुमार मनचन्दा ने कहा कि यह अलबेन्डाजोल टेबलेट बच्चों में कुपोषण, थकान, अनीमिया को दूर करने में तथा शारीरिक एवम मानसिक विकास करने में सहायक होगी। उन्होनें छात्रांे को आगाह करते हुए बताया कि राष्ट्रीय महत्व के इस कार्य को हमें जिम्मेदारी से करने की जरुरत है हमें खुले में शौच से परहेज करना, अपने आस पास को साफ सुथरा रखना, फलों व सब्जियों को साफ पानी से धोना, साफ एवम ढके हुए बर्तन वाला पानी पीना, अपने नाखूनों को काट कर छोटे रखना, पैरों में चप्पल व जूते पहनना तथा खाना खाने से पहले व बाद में अपने हाथों को साफ रखना जैसी आदतों को विकसित करना है उन्होनें बताया कि विद्यालय की जूनियर रेेेेैडक्रास और सेंट जान एबुंलैंस बिग्रेड राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के सहयोग से सभी बच्चों में अच्छा स्वास्थ्य और अच्छी आदतें विकसित करने के प्रति कार्यरत एवम दृढसंकल्पित है। श्रीमति नीलम कौशिक, रविन्द्र मनचन्दा, रेणु शर्मा, शारदा, सरोज, अंजना मनचन्दा, कान्ता अग्रवाल, रुप किशोर शर्मा, वीरपाल पीलवान, देशराज गोला, बांके बिहारी गोस्वामी, यशा, रेखा, अनीता गांधी, संजय यादव, विनोद अग्रवाल, संजय शर्मा, ब्रहम्देव यादव तथा बिजेन्द्र सिंह ने भी छात्रांे से अपील की कि वे सब कृमि नष्ट करने की दवा के रुप में अलबेन्डाजोल टेबलेट चबा कर खाएं और नंगे पैर बिल्कुल ना घूमें ताकि सभी स्वस्थ रहें।


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