Monday, February 12, 2018

वाईएमसीए यूनिवर्सिटी में स्वामी दयानंद सरस्वती की जयंती के उपलक्ष्य में कार्यक्रम का आयोजन


Organizing program in the YMCA University on the occasion of Swami Dayanand Saraswati's birth anniversary

फरीदाबाद, 12 फरवरी(abtaknews.com) वाईएमसीए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, फरीदाबाद द्वारा महर्षि स्वामी दयानंद सरस्वती की 194वीं जयंती के उपलक्ष्य में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर वैदिक साहित्य के विद्वान आचार्य भद्र काम वर्णी मुख्य वक्ता रहे तथा स्वामी दयानंद सरस्वती के जीवन दर्शन पर प्रकाश डाला। 
Organizing program in the YMCA University on the occasion of Swami Dayanand Saraswati's birth anniversary

इस उपलक्ष्य में अपने संदेश में कुलपति प्रो. दिनेश कुमार ने कहा कि स्वामी दयानंद महान शिक्षाविद्, समाज सुधारक एक सांस्कृतिक राष्ट्रवादी थे, जिन्होंने भारतीय समाज का पुनजार्गरण किया और आधुनिक भारत की नींव रखी। स्वामी दयानंद सिद्धांत व आदर्श आज भी युवाओं के लिए प्रासंगिक तथा मार्गदर्शक है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को स्वामी जी के विचारों का अनुकरण करना चाहिए।
अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. नरेश चौहान की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ आचार्य वर्णी ने दीप प्रज्वलन द्वारा किया तथा स्वामी दयानंद के चित्र के समक्ष नमन करते हुए श्रद्धांजलि दी गई। प्रो. नरेश चौहान ने स्वामी दयानंद द्वारा रचित ग्रंथ ‘सत्यार्थ प्रकाश’ के माध्यम से उनके जीवन और विचारों पर प्रकाश डाला। बीटेक छात्रा संस्कृति व एकता ने भाषण व कविता के माध्यम से स्वामी दयानंद के जीवन व शिक्षाओं पर प्रकाश डाला।

विद्यार्थियों को स्वामी दयानंद सरस्वती के जीवन से प्रेरित करते हुए आचार्य भद्र काम वर्णी ने कहा कि महान समाज सुधारक तथा आर्य समाज के स्थापनक स्वामी दयानंद आधुनिक भारत के निर्माता थे, जिन्होंने देश में प्रचलित अंधविश्वास, रूढ़िवादिता तथा अमानवीय आचरणों का विरोध किया। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में राष्ट्र चेनता जागृत करने में स्वामी जी की अहम भूमिका रही। उन्होंने कहा कि स्वामी जी ने अंधविश्वास पर विज्ञान का महत्व दिया। उन्होंने हिन्दी भाषा तथा वैदिक धर्म के प्रचार प्रसार के लिए जीवन पर्यंत कार्य किया। 

आचार्य वर्णी ने कहा कि विद्यार्थियों को स्वामी दयानंद के जीवन दर्शन से सीखना चाहिए कि किसी तरह एक विचार को सुविचार में बदला जाता है तथा कैसे सही समय पर सही निर्णय लेने से बेहतर परिणाम हासिल किये जा सकते है। उन्होंने विद्यार्थियों को स्वामी जी के ग्रंथ ‘सत्यार्थ प्रकाश’ को पढ़ने तथा इससे प्रेरणा लेने का भी आह्वान किया। स्वामी विवेकानंद मंच द्वारा संचालित कार्यक्रम डॉ. प्रदीप डिमरी तथा डॉ. सोनिया बंसल की देखरेख में किया गया, जिसमें विवेकानंद मंच के विद्यार्थी संयोजक अभिषेक व दिव्यांश ने भी अपना योगदान दिया।

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