Thursday, January 11, 2018

सर्दियों में स्वस्थ रहने के सूत्र बता रहे हैं डॉ प्रताप चौहान

 Dr. Pratap Chauhan is telling the sources of healthy living in winter


फरीदाबाद (abtaknews.com) जहां सर्दियों को आमतौर पर स्वास्थ्यवर्धक ऋतु कहा गया हैवहीं यह मौसम बच्चोंवृद्धोंकमजोरदमाजोड़ों के दर्दहदय रोगीउच्च रक्तचाप (हाई ब्लडप्रैशर) एवं एलर्जी के रोगियों के लिए कष्टदायक भी होता है। अतः सर्दियों में स्वस्थ रहने के लिए विशेष आयुर्वेदिक उपचारआहारविहार एवं आयुर्वेदिक औषधियों का सेवन करना चाहिए।

सर्दियों के मौसम में ठण्ड एवं रुक्षता के कारण वात दोष की वृद्धि होती है। जिसके कारण अनेक प्रकार की वेदनाएं जैसे कमर दर्दगर्दन दर्दजोड़ों में दर्दमांसपेशियों में अकड़न जैसे रोग उग्र रूप धारण कर लेते हैं। वात को सम रखने के लिए उष्ण एवं स्निग्ध भोजन का सेवन करना चाहिए। ऐसे रोगियों को नियमित रूप से गुनगुने तिल के तेल से मालिश करनी चाहिए। सौंठमेथी एवं हल्दी को बराबर मात्रा में मिलाकर चूर्ण बनाएं और इस मिश्रण में से एक-एक चम्मच चूर्ण सुबह-शाम गरम पानी या दूध के साथ लेना चाहिए। इसके अतिरिक्त आयुर्वेदिक पंचकर्म चिकित्सा से भी अनेक प्रकार के दर्दों में विशेष लाभ मिलता है।

जिन लोगों के नाकगला व फेफड़े कमजोर है उन्हें सर्दियों में अपना विशेष ख्याल रखना चाहिए। जिन लोगों के फेफड़े एवं श्वसन संस्थान कमजोर होते हैं उन्हें थोड़ी सी ठण्ड लगने या कुछ शीतल भोजन खाने से नाक बहनाछीकंे आनाखांसीगले में खराश या बलगम जमना एवं सांस फूलना जैसे लक्षण शरू हो जाते हैं। ऐसे लोगों को हर रोज एक बड़ा चम्मच च्यवनप्राश खाना चाहिए। अदरक,मेथीकाली मिर्चलौंग एव तुलसी के पत्तों को पानी में उबाल कर शहद मिलाकर पीना चाहिए। इसके अतिरिक्त गर्म कपड़े पहननाउष्ण जल से स्नान एंव अदरकलहसुन और अजवायन डाल कर सब्जियों के सूप बनाकर पीने से अत्यन्त लाभ मिलता है।

सर्दियों के मौसम में ठण्ड के प्रभाव से रक्त वाहिनियां संकुचित हो जाती हंै जिससे रक्तचाप या ब्लड प्रैशर बढ़ सकता है। उच्च रक्तचाप एव हृदय रोग से पीड़ित रोगियों को सर्दियों में विशेष रूप से सतर्क रहना चाहिए। दिन में एक या दो बार अर्जुन की छाल का काढ़ा (अर्जुन चाय) पीने से बहुत लाभ मिलता है। एक चम्मच लहसुन का रस, 1 चम्मच प्याज का रसएक चम्मच शहद मिलाकर दिन में एक या दो बार पीने से ब्लड प्रैशर को सामान्य रखने में सहायता मिलती है। इसके अतिरिक्त नियमित रूप से सैरयोगासनप्राणायाम एंव हल्का व्यायाम करना चाहिए।

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