Tuesday, January 2, 2018

शमशान घाट से अवैध कब्जा हटाने की मांग को लेकर ग्रामीणों ने किया पाली-बडखल रोड़ जाम


फरीदाबाद 2 जनवरी। भाखड़ी गांव स्थित शमशान घाट से अवैध कब्जा हटाने की मांग को लेकर आज सैकडों गांव वालों ने समाजसेवी महेश फागना व लीलू पहलवान के नेतृत्व में जोरदार प्रर्दशन किया और बडखल पाली रोड़ पर जाम लगा दिया। ग्रामीणों का आरोप था कि अवैध कब्जाधारी अपने हरिजन होने का नाजायज फयादा उठाता है और आए दिन लोगों पर झूठे मुकदमें दर्ज करवाता रहता है। गांव वालों द्वारा की गई शिकायत के बाद आज नगर निगम का तोडफ़ोड़ दस्ता शमशान घाट पर पहुंचा लेकिन तोडफ़ोड़ करने में आनाकानी करने लगा। मौके की नजाकत को देखते हुए पुलिसकर्मी भी वहां पहुंच गए। कब्जाधारी ने नगर निगम और पुलिस को आश्वासन दिया कि उसे 10 दिन का समय दिया जाए उसके बाद वह स्वंय इस कब्जे को हटा लेगा इसके लिए वो लिखकर देने को भी तैयार है। लेकिन गांव वाले इस बात पर अड़ गए कि कब्जा आज ही हटेगा क्योकि कब्जाधारी आए दिन गांव वालों पर हरिजन एक्ट का दुरूपयोग करके उनपर मुकदमें दर्ज करवाता रहता है। इतना ही नहीं यदि कोई गांव का बुजुर्ग उसके पास जाता है तो वो उनकी बेइज्जती करके भगा देता है। समाजसेवी महेश फागना ने कहा कि गांव भाखड़ी का रहने वाला शिवदत्त पुत्र पृथ्वी सिंह ने शमशान भूमि पर पक्का कब्जा कर रखा है और तो और उसने शमशान घाट के अंदर पर गोबर का ढेर लगा रखा है। गांव के लोगों द्वारा रोकने पर उन्हें धमकी देता हैकि मेरा यहां पर  40 साल से कब्जा है,कोई मुझे नहीं हटा सकता। उन्होनें कहा कि इस कब्जे की शिकायत जब उन्होने व लीलू पहलवान ने नगर निगम में की तो उल्टा उसने उन पर गाय चोरी का मुकदमा दर्ज करवा दिया जिससे की उनकी समाज में बहुत मानहानि हुई है इसलिए आज पूरा गांव इसके खिलाफ सडक़ पर उतर आया है। इसलिए जब तक शमशान घाट से कब्जा नहीं हटता तो वो कहीं नहीं जाएंगें। लेकिन नगर निगम और पुलिस द्वारा कब्जाधारी पर नरम रवैया अखितयार करने को लेकर गांव वाले गुस्से में आ गए और उन्होनें बडखल पाली रोड़ को जाम कर दिया जिससे वाहनों का भारी जाम लग गया। कुछ देर बाद पुलिस अधिकारी पहुंचे और उन्होनें आश्वासन दिया कि ब्जिा आज ही हटाया जाएगा लेकिन आप वहीं नहीं जाएंगें। इसके पश्चात गांव वालों ने जाम खोल दिया।  इस मौके पर धर्मबीर भड़ाना, विजय फागना, बृजेश, जतन, बुद्वन, काका तुरमल सिंह, सिद्वराज, लीलू पहलवान, महेश फागना, प्रकाश हंसा, विक्रम लिखी, चरणी, रामसिंह, सुमेर सिंह, महेश व राजू सहित कई ग्रामीण मौजूद थे।  

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