Sunday, January 7, 2018

पलवल में साइको किलर द्वारा मारे गए मृतकों के आश्रितों को दिए गए मुआवजा राशि के चेक


 Check amount of compensation paid to dependents of dead killed by Psycho Killer in Palwal

​पलवल 07 जनवरी(abtaknews.com ): जिला विधिक सेवाएँ प्राधिकरण पलवल के तत्वावधान में हरियाणा पीड़ित मुआवजा योजना-2013 के तहत आज रविवार को माननीय जिला एवं सत्र न्यायाधीश मनीषा बत्रा ने साइको किलर द्वारा मारे गए मृतकों के आश्रितों को अंतरिम राहत के रूप में एक-एक लाख रुपये का मुआवजा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से गांव बूराका में जाकर मृतक अंजुम के आश्रित नाबालिक बच्चों के लिए उनके दादा दाउद खान को एक लाख रुपये का चेक अंतरिम राहत के तौर पर प्रदान किया। उनके साथ माननीय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट एंव सचिव डॉ कविता कांबोज भी मौजूद रहीं। माननीय न्यायाधीश श्रीमती मनीषा बत्रा मृतका अंजुम के आश्रित बच्चों से भी मिली और उन सभी को सांत्वना दी और उनके हाल-चाल से रूबरू हुई और मृतका अंजुम के परिवारजनों को ढांढस बंधाया। 

*मानवता के नाते पहली बार घर-घर जाकर एक सरल प्रक्रिया व निशुल्क तथा जनहित में मृतक के आश्रितों को सहायता राशि अंतरिम तौर पर घर पर  प्रदान कराना प्राधिकरण द्वारा हरियाणा में पहली बार ऐसा कदम उठाया गया है* प्राधिकरण की सचिव डॉ. कविता कांबोज ने जानकारी दी कि उक्त मामले में मुकदमा दर्ज होने के 24 घंटे के अंदर मामले की गंभीरता को देखते हुए संज्ञान लेते हुए पैनल अधिवक्ता जगत सिंह रावत व रण सिंह तेवतिया को आश्रितों को राहत देने के उद्देश्य से नियुक्त किया गया। पैनल अधिवक्ताओं ने नियुक्ति के तुरंत बाद अगले 24 घंटों के भीतर थाना शहर पलवल से सम्बन्धित दस्तावेज लेने के बाद घर-घर जाकर मृतकों के आश्रितों के पास बार-बार जाकर घर बैठे सारी प्रकियाएं निशुल्क व सरल कागजी प्रकिया के तहत सम्पूर्ण की गयी ताकि दुखी परिवारजनों को कुछ सहारा मिल सके। 

 अभी तक जिन चार आश्रित परिवारों को मदद दी गयी है, उनमें मृतक खेमचंद की पत्नी कमला जिसमें खेमचंद के आश्रितों में उनकी पत्नी, दो नाबालिग बेटी व एक बेटा है जो कि सभी पूरी तरह से मृतक खेमचंद पर निर्भर हैं, पत्नी खानादारी व बच्चे पढते हैं। उनकी जिंदगी बिल्कुल अंधकारमय है तथा आमदनी का केवल मृतक ही घर में कमाने वाला था। मृतक मुंशीराम की पत्नी रामवती, उम्र 55 वर्ष, खानादारी जिसके साथ नाबालिग बेटी आश्रित है, घर में मुंशी राम इकलौता कमाने वाला था। आमदनी का कोई जरिया नहीं है।                 

 मृतक सीताराम की पत्नी द्रोपती, जोकि पूरी तरह से अपने पति की आमदनी पर निर्भर है।और अकेली रहती है और आमदनी का कोई साधन नहीं है। मृतका अंजुम की सभी बेटियां नाबालिक व सबसे छोटा बेटा एक साल का है, जो कि सभी बच्चे पूरी तरह से अपनी मां पर निर्भर थे। पूरी देखभाल उनकी मां अंजुम करती थी। अब दादा-दादी बेटियों की देखभाल कर रहे हैं। बेटियों के नाबालिग होने की वजह से मृतका अंजुम के ससुर दाऊद व उपरोक्त आश्रितों को सहायता राशि के चैक सौंपे गए। उन्होंने बताया कि उक्त चेक अंतरिम राहत के तौर पर प्रदान किये गये हैं। उक्त योजना के अंतर्गत कम- से-कम 3 लाख रुपये की राहत राशि मृतक के आश्रितों को मुकदमे के फैसले के बाद भी प्रदान की जा सकती है। इसके अलावा उन्होंने योजना के अंतर्गत यौन शोषित पीडिता, एसिड पीड़िता, शारीरिक क्षति, वे मामले जिनमें मुल्जिम गिरफ्तार न हुआ हो आदि मामलों में खुद पीडितों व मृतक के आश्रितों को मुआवजा प्रदान कराया जाता है, जिससे आश्रितों को उचित समय पर सहारा प्राप्त हो। उक्त योजना के बारे में अभी जागरूकता नहीं है। इसलिए उन्होंने समाज का हर जरूरतमंद व पीडि़त जागरूक हो और उसे सहारा मिल सके। मौके पर मौजूद लोगों को इस योजना के प्रचार - प्रसार के लिए भी प्रेरित किया। प्राधिकरण द्वारा उक्त मामले की गम्भीरता को देखते हुए मामले में मृतकों के आश्रितों के भारी दुख को कुछ बांटने के उद्देश्य से सारी प्रकियाओं को सुलभता से घर पर जाकर ही पूर्ण कराया गया। प्राधिकरण की इस विशेष पहल में दुखी परिवारजनों ने पूर्णरूप से सहयोग किया, और तुरंत मिली राहत से शुकून महसूस किया। इसके अलावा उन्होंने बताया कि मृतक सुरेंद्र के आश्रितों की से ली गयी दरख्वास्त में कुछ औपचारिकताएं बाकि रह गई हैं, तथा यूपी के शिकोहाबाद के मृतक शिवनाथ के आश्रितों से बातचीत चल रही हैं, उन्हें भी जल्दी ही सहायता राशि का चेक प्रदान किया जाएगा। उन्होंने चारों मृतकों के परिजनों को अंतरिम राहत के चैक सोंपते हुए कहा कि  उक्त योजना के तहत राहत प्राप्त करना उक्त दुखी परिवारों का हक है। अंतरिम राहत राशि आश्रितों व उनके बच्चों के लिए भविष्य में शिक्षा, पालन - पोषण व मृतक के आश्रित परिवारजनों के लिए राहत व मृतक के अंत्येष्टि सम्बन्धी खर्चों के लिए प्रदान किया गया। उन्होंने कहा कि समाज में सभी का कर्तव्य है कि वह एक-दूसरे का सहारा बनें और इस तरह की जन-उपयोगी योजनाओं के बारे में समाज में जागरूकता फैलाएं, और एक - दूसरे का सहारा बनने का प्रयास करें, जिससे अन्य जरूरतमंद को  भी प्राधिकरण व सम्बंधित योजनाओं के तहत उन्हें उनका हक प्राप्त हो  सके। उन्होंने मृतक के परिजनों  को भविष्य में पेंशन बनवाने, किसी अन्य सरकारी योजना से लाभ लेने की प्रकिया में मुफ्त सहायता प्रदान करने और उक्त मामले में कोर्ट में पैरवी के लिए मुफ्त सहायता देने बारे भी भरोसा दिया। माननीय न्यायाधीश ने दुखी आश्रित परिवारजनों की विभिन्न समस्याओं से रूबरू हुई और उनके दुख को बांटने का प्रयास किया। उन्हें उक्त मामले से सम्बन्धित कानूनी सलाह भी प्रदान की। उन्होंने पैनल अधिवक्ता जगत सिंह रावत व रण सिंह तेवतिया को मृतक के परिजनों को भविष्य में किसी भी विभागीय सहायता में किसी भी प्रकिया के लिए मुफ्त सहायता के लिए निर्देश भी दिए। माननीय न्यायाधीश के साथ पैनल अधिवक्ता जगत सिंह रावत व रण सिंह तेवतिया भी मौजूद रहे।मौके पर गणमान्य लोग भी उपस्थित रहे।

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