Monday, January 22, 2018

खेड़ी कलां श्री बालाजी मंदिर में भगवान परशुराम की मूर्ती प्राणप्रतिष्ठा

 Khedi Kalan Shri Balaji temple, idol of Pranuram


फरीदाबाद (abtaknews.com) 22 जनवरी।2018 ; खेड़ी कलां में आयोजित भगवान परशुराम की मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा समारोह का आयोजन किया गय। इससे पूर्व अखंड रामायण का पाठ रखा गया, तदुपरांत गांव की परिक्रमा करते हुए श्रद्धालु मूर्ति के साथ भजनो-कीर्तन और नृत्य करते हुए बाला जी मंदिर पहुंचे। मंत्रोचारण के साथ भगवान परशुराम की मूर्ति स्थापित की गई। सभी उपस्थितजनो ने पुष्प अर्पित कर आशीर्वाद लिया और भगवान परशुराम के बताये रास्ते पर चलने का संकल्प लिया। 
अखिल भारतीय ब्राह्मण सभा द्वारा सोमवार को गांव खेड़ी के बालाजी मंदिर में भगवान परशुराम की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की गई। इससे पूर्व अखण्ड रामायण पाठ का आयोजन किया गया, जिसके बाद ग्राम परिक्रमा की गई। मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा के बाद विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। इस मौके पर अखिल भारतीय ब्राह्मण सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पं. सुरेन्द्र शर्मा बबली ने कहा कि संस्था द्वारा अनेक स्थानों पर भगवान परशुराम की मूर्ति स्थापित कराई गई है और गांव खेड़ी के बाद साहुपुरा में भगवान परशुराम की मूर्ति स्थापित कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि गांव खेड़ी में पं. तेजपाल, सचिव, अखिल भारतीय ब्राह्मण सभा ने मंदिर मे भगवान परशुराम की मूर्ति स्थापना के लिए अनुमोदन किया। जिसके बाद हमने जयपुर से भगवान परशुराम की प्रतिमा मंगवाई गई और विधिपूर्वक मूति की स्थापना की गई। पं. सुरेन्द्र बबली ने बताया कि परशुराम त्रेता युग (रामायण काल) के एक मुनि थे। उन्हें भगवान विष्णु का छठा अवतार भी कहा जाता है। पौरोणिक वृत्तान्तों के अनुसार उनका जन्म भृगुश्रेष्ठ महर्षि जमदग्नि द्वारा सम्पन्न पुत्रेष्टि यज्ञ से प्रसन्न देवराज इन्द्र के वरदान स्वरूप पत्नी रेणुका के गर्भ से वैशाख शुक्ल तृतीया को हुआ था। वे भगवान विष्णु के आवेशावतार थे। पितामह भृगु द्वारा सम्पन्न नामकरण संस्कार के अनन्तर राम, जमदग्नि का पुत्र होने के कारण जामदग्न्य और शिवजी द्वारा प्रदत्त परशु धारण किये रहने के कारण वे परशुराम कहलाये। उन्होंने बताया कि शिवजी से भगवान परशुराम को श्रीकृष्ण का त्रैलोक्य विजय कवच, स्तवराज स्तोत्र एवं मन्त्र कल्पतरु भी प्राप्त हुए। चक्रतीर्थ में किये कठिन तप से प्रसन्न हो भगवान विष्णु ने उन्हें त्रेता में रामावतार होने पर तेजोहरण के उपरान्त कल्पान्त पर्यन्त तपस्यारत भूलोक पर रहने का वर दिया। इस मौके पर भाजपा महिला जिलाध्यक्ष अनीता शर्मा, अखिल भारतीय ब्राह्मण सभा के पं. एल आर शर्मा, पं. कृष्णकांत, पं. ललित, पं. रमण भारद्वाज, ललित बघौला, बंटी साहपुरा, मोहित साहपुरा, तेजपाल खेड़ीकलां, कृष्ण पाराशर, लक्ष्मण भारद्वाज, रामबीर गौड, ओ पी शास्त्री, तेजपाल शर्मा आदि मौजूद थे। 
रामेश्वर का पत्थर बना आकर्षण का केन्द्र :इस मौके पर रामेश्वर से लाया गया पानी में तैरने वाला पत्थर आकर्षण का केन्द्र बना, जोकि पानी में तैर रहा था। पंडित जी ने बताई थी, इस पत्थर की यह विशेषता है कि यह पानी में डूबता नहीं और तैरता है। भगवान राम के आशीर्वाद के कारण यह सब होता है।
प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर दिखा चमत्कार :भगवान परशुराम की मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा के अवसर गांव खेड़ी के लोगों को भगवान का चमत्कार देखने को मिला। गांव के बुजुर्ग गियासीराम ने बताया कि जब भगवान परशुराम की मूर्ति की स्थापना की जा रही थी और जैसे ही भगवान परशुराम की आंखों से पट्टी हटाई गई तो, एक लडक़ी के हाथ में रखा हुआ शीशा टूट गया। जो वास्तव में ही अद्भुत दृश्य था। 

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