Wednesday, January 3, 2018

पलवल की 6 हत्याओं का जिम्मेदार सिविल अस्पताल या फिर पुलिस विभाग


फरीदाबाद 3 जनवरी। पलवल में लगातार एक के बाद एक हुई 6 हत्याओं का दोषी आखिर कौन है, जबकि आरोपी साइको किलर को आर्मीं से 60 प्रतिशत डिसेबल घोषित करके निकाला जा चुका था, कांग्रेस सरकार के शासनकाल साल 2006 में फिटनेस सर्टिफिकेट देने वाले अधिकारी और इंटरव्यू लेने वाले कृषि विभाग के अधिकारी क्यों नहीं भाँप पाए साइको किलर नरेश की मानसिक स्थिति को, इतना ही नहीं फरीदाबाद के सिविल अस्पताल से मेडिकल फिटनेस सटिज़्फिकेट मिलने  के बाद ही कृषि विभाग में एडीओ के पद पर आरोपी को तैनाती मिली थी सरकारी नौकरी पाने के लिए होने वाली पुलिस वेरिफिकेशन पर भी सवाल उठना लाजमी है। एक के बाद एक 6 हत्याओं से पूरा शहर ही नहीं पूरा प्रदेश ही सकते में है।आरोपी साइको किलर नरेश जो कि पृथला विधानसभा क्षेत्र के गांव मछगर का रहने वाला है और जिसे फरीदाबाद के सिविल अस्पताल से मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट मिलने  के बाद ही कृषि विभाग में एडीओ के पद पर तैनाती मिली थी तो क्या इन सभी हत्याओं का दोषी सिविल अस्पताल के उन अधिकारियों को मानना चाहिए जिन्होंने मेडिकल फिटनेस का सटिज़्फिकेट जारी किया था, या फिर कृषि विभाग के वो अधिकारी जिन्होंने इस साइको किलर का इंटरव्यू लेने में चूक दिखाई या फिर वो पुलिस कमीज़् जिन्होंने अपनी वेरिफिकेशन में इतनी बड़ी सच्चाई को दरकिनार कर दिया और 6 घरों के चिराग एक बड़ी लापरवाही का शिकार होकर बुझ गए। पृथला विधानसभा क्षेत्र के गांव मछगर में रहने वाला नरेश पढऩे लिखने में होशियार और मिलने जुलने वालों को सटीक राय देने वाला था, नरेश के परिजनों और आस-पड़ोस में रहने वालों की माने तो नरेश एक के बाद एक 6 हत्याओं को अंजाम देगा, इन बातों और इस हादसे ने मानों उन्हें हिला सा दिया है और सहसा माना नहीं जा सकता था, अगर वो सीसीटीवी कैमरे की जद में न आ पाता। मिलिट्री का रिटायर्ड नरेश कृषि विभाग में एसडीओ रहा है। आपको बता दें कि नरेश ने1999 में सेना में लेफ्टिनेंट के रूप में ज्वाइनिंग की। सेना में रहते हुए एक हादसे में आरोपी नरेश के दिमाग का ऑपरेशन हुआ मगर सेना के लिए मेडिकल फिट ना होने पर नरेश को मेडिकल ग्राउंड पर 60 प्रतिशत डिसेबल होने सर्टिफिकेट देकर सेना से रिटायर कर दिया गया, मिलिट्री से रिटायर होने के बाद कृषि विभाग में एडीओ के पद पर वर्ष 2006 में भर्ती हुआ और बाद में प्रमोशन पाकर एसडीओ बना।

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