Wednesday, January 10, 2018

सेक्टर-23 बिजली दफ्तर पर बिजली कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर दिया धरना


Sector-23 electric office employees give their demands

फरीदाबाद (abtaknews.com) 10 जनवरी,2018; सेक्टर-23 बिजली दफ्तर पर अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करते बिजली विभाग के कर्मचारी। 
Sector-23 electric office employees give their demands
फरीदाबाद के सेक्टर 23 में बिजली बोर्ड के कार्यालय पर आज आल हरियाणा पवार कार्पोरेशन वर्कर यूनियन के बैनर टेल सैकड़ो की तादात में एकत्रित होकर बिजली कर्मचारियों ने सरकार पर वादा खिलाफी का आरोप लगाते हुए जमकर नारेबाजी की , कर्मचारियों ने सरकार विरोधी नीतियों को बाकायदा बैनर के माधयम से दर्शाने का काम करते हुए प्रदर्शन किया और चेतावनी देते हुए कहा की यदि उनकी मांगे नहीं मानी गई तो वह गाँव -गाँव शहर -शहर जा कर लोगो को इस सरकार की आम लोगो के पार्टी विरोधी नीतियों के बारे में बताएँगे जिसका खमियाजा सरकार को 2019 में आने वाले चुनावों में भुगतना पड़ेगा।  

खट्टर सरकार की  ठेकेदारों से यारी पड़ रही जनता को भारी - कच्चा रोजगार मामूली पगार सैकड़ो मरे घायल हजार - घाटा तो बहाना है ठेकेदारों का मुनाफ़ा बढ़ाना है- जनता से लूट जारी है और अब बड़ी लूट की तयारी है इसलिए हड़ताल मज़बूरी है जनता का शाहियोग जरुरी है।इस तरह के  स्लोगनों के बैनर के साथ सेकटर 23 बिजली बोर्ड कार्यालय में प्रदर्शन करते दिखाई दे रहे यह फरीदाबाद के बिजली कर्मचारी है जो अपनी कई मांगो को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे है.इनकी माने तो सरकार ने चुनाव के समय में जो वादे किये थे उनमे एक भी वादे को पूरा नहीं किया है उनकी मांग है की कच्चे कर्मचारियों को पक्का किया जाए ,सामान काम सामान वेतन का सरकार ने वादा किया लेकिन पूरा नहीं किया ,वही उन्होंने सरकार पर गंभीर आरोप लगते हुए कहा की सरकार कच्चे कर्मचारियों और पक्के कर्मचारियों को आपस में लड़वाने का काम कर फुट डालो और राज करो की निति अपना रही है जिसे वह कभी सफल नहीं होने देंगे और इसकी वह घोर निंदा करते है। उन्होंने कहा की सरकार लफ्फे दाए भाषण देती है और धरातल पर कुछ नहीं करती। वही उन्होंने इस प्रदर्शन के माध्यम से सरकार को चेतावनी देते हुए कहा की  यदि उनकी मांगे नहीं मानी गई तो वह गाँव -गाँव शहर -शहर जा कर लोगो को इस सरकार की आम लोगो के पार्टी विरोधी नीतियों के बारे में बताएँगे जिसका खमियाजा सरकार को 2019 में आने वाले चुनावों में भुगतना पड़ेगा।  

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