Friday, December 29, 2017

रैनबसेरों में नहीं है जगह बेसहारा लोग रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर सोने को मजबूर


 Ranbasar is not in place, destitute people forced to sleep on railway station platform

फरीदाबाद(Abtaknews.com) 29 दिसंबर,2017 ; बेघर और बेसहरा लोगो के लिये रैडक्रॉस द्वारा बनाये रैनबसेरों का रियलिटी चैक किया गया, जिसमें पाया गया कि दर्जनों लोग रैन बसेरों को छोडकर रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर सोने के लिये मजबूर थे,, कारण पूछने पर पता लगा कि कुछ लोगों को रैन बसेरों के बारे में पता ही नहीं था और जिन लोंगो को रैन बसेरे के बारे में मालूम था उनके लिये रैन बसेरे में रात काटने के लिये जगह नहीं थी यानि कि रैडक्रॉस द्वारा बनाये गये रैन बसेरे छोटे हैं जिनमें 8 से 10 लोग ही सो पाते हैं। इसलिये दर्जनों लोग रोजाना सर्द हवाओं के बीच प्लेटफॉर्म पर सोने के लिये मजबूर होते हैं।

फरीदाबाद में आधा दर्जन रैन बसेरे होने के बाद भी दर्जनों बेघर और बेसहारा लोग खुले में सोने के लिये मजबूर हैं इसका सच्चाई उस वक्त पता लगा जब रियलिटी चैक करने के दौरान ओल्ड फरीदाबाद रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर दर्जनों लोग सर्द हवाओं के बीच में सोते हुए दिखाई दिये। हलांकि रैडक्रॉस द्वारा ओल्ड रेलवे स्टेशन से मात्र 500 मीटर की दूरी पर यानि राष्ट्रीय राजमार्ग नम्बर 2 पर रैन बसेरा बनाया हुआ है, मगर हकीकत ये हैं कि ये रैन बसेरा छोटा है जिसमें 8 से 10 लोग ही आराम से सो पाते हैं।

इस बारे में प्लेटफॉर्म पर सो रहे बेघर और बेसहारा लोगों से बात की गई तो उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को रैन बसेरों के बारे में पता ही नहीं है और न ही आज तक किसी ने उन्हें रैन बसेरों के बारे में बताया, इसलिये मजबूरी में उन्हें प्लेटफॉर्म पर सोना पडता है। तो वहीं कुछ लोगों ने कहा कि उन्हें रैन बसेरों के बारे में मालूम तो है मगर क्या करें उनके लिये रैन बसेरों में जगह नहीं होती क्योंकि रैडक्रॉस द्वारा बनाये गये रैन बसेरों का एरिया छोटा है। इसलिये उनकी मांग है कि रैन बसेरों का एरिया बढाया जाये ताकि उन्हें भी छत मिल सके।


loading...
SHARE THIS

0 comments: