Wednesday, December 20, 2017

विद्यार्थियों को औद्योगिक चुनौतियों को समझने के लायक बनाये शिक्षकः डॉ. मन्ना


फरीदाबाद, 20 दिसम्बर - वाईएमसीए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, फरीदाबाद द्वारा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, केन्द्र सरकार के सहयोग से ‘उद्यमिताः उद्योग में सुधार के लिए एक प्रभावी उपकरण - संस्थागत परिचर्चा’ विषय पर दो सप्ताह का संकाय विकास कार्यक्रम आज संपन्न हो गया। कार्यक्रम के दौरान 20 से ज्यादा विशेषज्ञ सत्र आयोजित किये गये तथा ‘उद्यमिता से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई।
    कार्यक्रम के समापन सत्र में अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद् के निदेशक डॉ. मनप्रीत सिंह मन्ना मुख्य अतिथि रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. दिनेश कुमार ने की। कार्यक्रम में अधिष्ठाता संस्थान डॉ. संदीप ग्रोवर भी उपस्थित थे।
    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. मन्ना ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम संकाय सदस्य के लिए तभी लाभकारी हो सकते है, जब कार्यक्रमों का लाभ विद्यार्थियों तक पहुंचे। भूतपूर्व विद्यार्थियों के साथ संस्थान के जुड़ाव को अहम बताते हुए उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय से निकलकर उद्यम स्थापित करने वाले विद्यार्थी ही भविष्य में रोजगार प्रदाता बनेंगे और भावी उद्यमियों को प्रेरित करेंगे। इसलिए, भूतपूर्व विद्यार्थियों के साथ निरंतर जुड़ाव बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को उद्योग की चुनौतियों को समझने लायक बनाये तथा शिक्षक से बढ़कर  मार्गदर्शक की भूमिका निभाये।
    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. दिनेश कुमार ने कहा कि वाईएमसीए संस्थान को रोजगार देने वाले संस्थान के रूप में जाना जाता है। फरीदाबाद के औद्योगिक विकास में वाईएमसीए संस्थान का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में उद्यमिता अध्ययन का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र बन गया है तथा इसे रोजगार सृजन एवं उत्पाद एवं सेवाओं प्रदाता क्षेत्र में नये विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। इसके दृष्टिगत संकाय सदस्यों के ज्ञानवर्धन के लिए ऐसे कार्यक्रम का आयोजन सराहनीय पहल है।
    इससे पूर्व कार्यक्रम के संयोजक डॉ वासुदेव मल्होत्रा ने दो सप्ताह के कार्यक्रम का लेखाजोखा प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किये गये।

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