Wednesday, December 13, 2017

सशक्त और ईमानदार नेतृत्व के कारण तेजी से विकास कर रहा है हरियाणा प्रदेश


Haryana is developing rapidly due to strong and honest leadership.

चंडीगढ़ (मुकेश वशिष्ठ, स्वतंत्र पत्रकार- abtaknews.com) 13 दिसंबर,2017; देश के राज्यों में हो रहे विकास को मापने वाली प्रमुख रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने साल 2013 से 17 के लिए ''स्टेट्स ऑफ ग्रोथ'' नाम से 5 दिसंबर को जारी रिपोर्ट में हरियाणा को देश के सबसे तेज बढ़ते तीन राज्यों में शामिल किया है। क्रिसिल के मुताबिक हरियाणा के साथ गुजरात और मध्य प्रदेश का नंबर है। जबकि पंजाब, उत्तर प्रदेश और केरल तीन सबसे कम प्रगति करने वाले राज्य रहे है। रिपोर्ट के अनुसार निर्माण और मैन्यूफैक्चरिंग में जहां गुजरात पहले नंबर पर है, तो मैन्यूफैक्चरिंग, व्यापार, परिवहन और कम्यूनिकेशन सुविधाओं में छत्तीसगढ़ और हरियाणा शीर्ष पर हैं। ये तीनों राज्य रोजगार पैदा करने में भी सबसे ज्यादा कामयाब रहे। इन राज्यों में पिछले चार सालों में महंगाई, राष्ट्रीय औसत से भी कम रही। यह रिपोर्ट नोटबंदी के पहले के आंकड़ों पर आधारित है। इस रिपोर्ट ने एकबार फिर मनोहर सरकार की ईमानदारी छवि और सही दिशा को प्रमाणिक किया है। साथ ही अनुभवहीनता का आरोप जड़ने वाले विपक्षी दलों को भी आईना दिखाया है। साथ ही प्रदेश में विकास का दावा कर रही मनोहर सरकार के दावों को और मजबूती दी है।

रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने राज्यों का प्रदर्शन वृद्धि, मुद्रास्फीति और राजकोषीय स्वास्थ्य जैसे मानकों पर आंका है। रिपोर्ट के अनुसार, मैन्यूफैक्चरिंग के क्षेत्र में 9.7 प्रतिशत ग्रोथ के साथ हरियाणा गुजरात, महाराष्ट और कर्नाटक के बाद देश में चौथे क्रम पर है। यह ग्रोथ राष्ट्रीय दर 7.4 प्रतिशत से काफी अधिक है। रोजगार उपलब्धता की दृष्टि से हरियाणा छत्तीसगढ़ और गुजरात के बाद देश में तीसरे क्रम पर है और इस क्षेत्र में प्रदेश की ग्रोथ 8.2 प्रतिशत की दर से हो रही है जो कि काफी उल्लेखनीय है। व्यापार, परिवहन और कम्यूनिकेशन के क्षेत्र  में भी हरियाणा 10.1 प्रतिशत विकास दर के साथ देश में छठे स्थान पर है। जबकि लोगों से जुड़ी वित्तीय, रियल एस्टेट और व्यावसायिक सेवाओं में प्रदेश कर्नाटक के बाद दूसरे क्रम पर है। सही दिशा और कुल कार्यशैली के चलते प्रदेश में बीते 10 वर्षों में 31 फीसदी भ्रष्टाचार में कमी आई है। प्रदेश उन्नति के शिखर की ओर अग्रसर है।
दरअसल, अक्तूबर 2014 में पहली बार सत्ता में आई भाजपा सरकार शुरू से ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नक्शे कदम पर है। मोदी ने जैसे सख्त अंदाज में भ्रष्ट सरकारी बाबुओं को चेतावनी दी थी कि न मैं खाऊंगा और न ही किसी को खाने दूंगा व ‘न चैन से बैठूंगा, न चैन से बैठने दूंगा’। उसी तरह सीएम मनोहर लाल खट्टर ने भी सरकारी दफ्तरों में फैले भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए समय-समय पर प्रतिबद्धता जताई। हालांकि भ्रष्टाचार का दीमक व्यवस्था में इस तरह जड़ें जमा चुकी है कि उसके इलाज में कई बार सरकार भी असहज हुई। लेकिन मुख्यमंत्री मनोहर लाल की ईमानदार छवि से सरकार कठिन दौर से बाहर आई। जून महीने में भ्रष्टाचार के अड्डे बन चुके क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण (आरटीए) कार्यालयों में तैनात सभी एचसीएस अधिकारियों को एक आदेश में हटा देना, सबके लिए चैंकाने वाली बात थी। नियुक्तियों में भ्रष्टाचार का खात्मा कर सरकार इस राह पर पहले ही कदम बढ़ा चुकी है। इसके अलावा सरकार जनता से जुडी सौ से ज्यादा सेवाओं को आनलाइन कर चुकी है। सबसे ज्यादा भ्रष्ट माने जाने वाले पुलिस, राजस्व विभाग को सरकार पूरी तरह आनलाइन कर चुकी है। अब प्रदेश में रजिस्ट्री का गोरखधंधा काफी हद तक बंद हुआ है। पुलिस वेरिफिकेशन, चरित्र प्रमाण पत्र, पुलिस क्लीयरेंस के नाम पर लोग निर्धारित शुल्क देकर फायदा उठा रहे है। गांव में अटल सेवा केंद्र और शहर में वार्ड कार्यालय बनाकर सरकार सार्वजनिक सेवाओं से जनता को लाभांवित कर रही है। गुरुग्राम, फरीदाबाद और पंचकूला पुलिस कमिश्नरी में हथियारों और उनसे संबंधित 17 सेवाओं के लिए भी हरसमय पुलिस पोर्टल पर ऑनलाइन मिलती है। भ्रष्टाचार पर जीरो टाॅलरेंस नीति अपनाने हुए मनोहर सरकार ने तीन साल पूरे कर लिए है। 
आंकडों पर ध्यान दें तो पूर्व कांग्रेेसनीत हुड्डा सरकार के गत पांच वर्ष के कार्यकाल के दौरान जीएसडीपी विकास दर कभी भी नौ प्रतिशत तक नहीं पहुंच पाई। वर्ष 2010-11 में 7.4 प्रतिशत, 2011-12 में 8.0 प्रतिशत, 2012-13 में 7.7 प्रतिशत, 2013-14 में 8.2 प्रतिशत और 2014-15 में 5.7 प्रतिशत तक कम हो गई थी। ये ईमानदार मनोहर सरकार का ही कमाल  है कि वर्ष 2016-17 में भी सकल राज्य घरेलू उत्पाद 8.7 प्रतिशत रहा। सरकार वर्ष 2017-18 इसे नौ प्रतिशत से अधिक रहने का दावा कर रही है।
एजेंसी क्रिसिल ने जारी रेटिंग में हरियाणा को वित्तीय सुदृढ़ता की दृष्टि से सर्वश्रेष्ठ राज्य बताया है। इसका आंकलन मार्च मार्च में पेश हुए एक लाख करोड़ से ऊपर का प्लान बजट को देखकर किया जा सकता है। प्रदेश में ऐसा पहली बार हुआ है कि खाद्यान्न खरीद कार्यों को छोडकर बजट ने एक लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया है। वित्त वर्ष 2017-18 के लिए 102329.35 करोड़ रुपये के बजट का प्रस्ताव किया गया। जो 2016-17 के संशोधित अनुमान 90412.59 करोड़ रुपये में 13.18 प्रतिशत ज्यादा है। मनोहर सरकार जिस तरह से योजनाबद्व तरीके से सरकारी महकमों में व्याप्त भ्रष्टाचार पर सख्त हुई। उसके अब सफल परिणाम आने लगे है। सरकार जहां अधिकां सेवाओं को आॅनलाइन तरीके से मजबूती दे रही है। वहीं, घाटे में चल रहे सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को उबरने की कोशिश कर रही है।
ये प्रदेश सरकार की कार्य कुशलता है, जो घाटे में चल रहे सार्वजनिक क्षेत्र के छह उपक्रमों का घाटा लगातार कम हो रहा है। जो कांग्रेस सरकार के कार्यकाल वर्ष (2013-14) में जो घाटा में 3806.38 करोड़ रुपये था। वो मनोहर सरकार के कार्यकाल 2015-16 में 811.63 करोड़ रुपये रह गया है। इसीतरह सहकारी समिति अधिनियम के तहत पंजीकृत सार्वजनिक क्षेत्र के 19 उपक्रम घाटे का कम करने में सफल रही। इनका घाटा वर्ष 2013-14 में 435.39 करोड़ रुपये था, वह कम होकर 2015-16 में 407.70 करोड़ रुपये रह गया है। वहीं, सरकार लाभ कमाने वाले सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में व्याप्त भ्रष्टाचार को खत्म कर उन्हें आर्थिक रूप से स्वालंबी बना रही है। इसी कारण इन उपक्रमों का वर्ष 2015-16 में कुल संचित लाभ बढकर 468.02 करोड़ रुपये हो गया, जबकि 2013-14 में यह 451.07 करोड़ रुपये था। विशेष कानूनों के तहत पंजीकृत पांच सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के प्रदर्शन में भी काफी सुधार हुआ है। सरकार की चाल-ढाल को देखकर अब कहने में हिचक नहीं है कि प्रदेश को मुखिया के रूप में सशक्त और ईमानदार नेतृत्व मिला है। इसी कारण हरियाणा में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के न्यू इंडिया डीम में अपनी एक महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह करेगा।

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