Friday, December 1, 2017

बेटी बचाओ मुहिम में मनोहर सरकार का बडा कदम, मिस वर्ल्ड मानुषी छिल्लर करेंगी अगुवाई


Miss World Manishi Chillar will lead a big step in the campaign of daughter Bachao

चंडीगढ़ (मुकेश वशिष्ठ) 30 नवंबर,2017 ;हरियाणा सरकार ने बेटी बचाओ मुहिम को तेज करते हुए कुरूक्षेत्र में दो बड़ी  योजनाओं की घोषणा की। जिसके अंतर्गत प्रदेश सरकार अब प्रदेश की सभी स्कूली छा़त्राओं को फ्री सैनिटरी नैपकिन और एनीमिया ग्रस्त बेटियों को मुक्त दवा बांटेगी। दोपहर बाद अंर्तराष्टीय गीता महोत्सव में पहुंची विश्व सुंदरी का खिताब जीतने वाली मानुषी छिल्लर का सरकार ने भव्य स्वागत किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने मानुषी को एनीमिया मुक्त हरियाणा अभियान का ब्रांड एंबेसडर बनाने की घोषणा की। मुख्यमंत्री के इस सराहनीय कार्य के लिए मानुषी ने हरसंभव सहयोग करने का वायदा किया।  

हाल ही में जारी हुई एक ‘वैश्विक पोषण रिपोर्ट 2017’ में दावा किया गया है कि भारत कुपोषण की गंभीर समस्या से ग्रस्त है रिपोर्ट यह भी दावा करती है कि हमारे देश  जो महिलाएं कम उम्र में मां बनती हैं उनमें से लगभग आधी महिलाएं खून की कमी से पीड़ित है। वैश्विक पोषण रिपोर्ट में कुपोषण के तीन महत्वपूर्ण रुप सामने आए है।  कुपोषण के हाल ही में सामने आए आंकड़ों के अनुसार, पांच वर्ष से कम के लगभग 38 फीसदी बच्चे विकासहीनता से प्रभावित है। जिसमें यह बात निकलकर कर आई कि बच्चों की लंबाई पोषक तत्वों की कमी के कारण अपनी उम्र से कम रह जाती है और इससे उनकी मानसिक क्षमता पर बुरा प्रभाव पड़ता है इतना ही नहीं बल्कि रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि पिछले पांच वर्ष में करीब 21 फीसदी बच्चों में पोषक तत्वों की कमी के कारण विकास ही नहीं हो पाया। जिस वजह से उनका वजन और लंबाई उनकी उम्र के हिसाब से काफी कम रह गई इस रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि भारत में मां बनने की उम्र वाली करीब 51 फीसदी महिलाएं खून की कमी से पीड़ित हैं।  यह एक ऐसी समस्या है जिसमें दीर्घावधि में मां और बच्चे के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है। हरियाणा की बात करें तो पूर्ववर्ती सरकारों ने कभी इन समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया। जिसके कारण लगातार हालत खराब हुए। रिपोर्ट के मुताबिक इस रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि भारत में मां बनने की उम्र वाली करीब 51 फीसदी महिलाएं खून की कमी से पीड़ित हैं।  यह एक ऐसी समस्या है जिसमें दीर्घावधि में मां और बच्चे के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है। हरियाणा की बात करें तो पूर्ववर्ती सरकारों ने कभी इन समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया। जिसके कारण लगातार हालत खराब हुए। रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में 61 फीसदी महिलाओं में खून की कमी है।जो बेहद चिंताजनक है। इसकी माहवारी के वक्त बच्चियों के पास नैपकिन न होने के कारण उन्हें अभी भी स्कूली शिक्षा से महरूम होना पड रहा है। इन दोनों घोषणाओं ने मनोहर सरकार की संवेदनशीलता और आधुनिक सोच को साफ कर दिया है।

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