Sunday, November 5, 2017

नए तेवर नए क्लेवर में चर्चा का विषय बन चुके है राहुल गाँधी, सेल्फी के लिए क्रेज़ी हो रहे युवा


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नई दिल्ली (Abtaknews.com) 05 नवंबर,2017 ; राहुल गांधी अब तथाकथित ''पप्पू '' नहीं है। राहुल का नया तेवर -नया क्लेवर आज सोशल मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं प्रिंट मीडिया की सुर्ख़ियों में रहता है। नए राहुल की लोकप्रियता में दिन-ब-दिन तेजी से बढ़ रही है आज हर तरफ राहुल गांधी के ही चर्चे है।  राहुल या तो ट्विटर पर ट्रेंड कर रहे होते हैं, या उनका कोई बयान गूगल पर हेडलाइन बना होता है।  देखते ही देखते राहुल की एक एक बात आज चर्चा का विषय बनी हुई है।  युवक -युवतियां उन्हें अपना आईकोन समझ कर उनके साथ सेल्फी ले रहे हैं। युवा और जोशीली लड़की की मासूमियत, राहुल की शर्मीली मुस्कुराहट और लड़की के वैन से सुरक्षित उतरने को लेकर राहुल की चिंता उस घटना और उसके वीडियो को बहुत खास बना देती है. राहुल उस लड़की का हाथ तब तक थामे रहे जबतक कि वो सुरक्षित वैन से उतर नहीं गई. राहुल की ये दरियादिली और अपनापन लोगों के दिल को छू गया.

राहुल गांधी का व्यक्तित्व कि एक एक बात उनके अंदर छिपे दयालु इंसान, सभी के लिए चिंतित रहने वाले और एक भरोसेमंद नेता की झलक दिखाता है।  आज राहुल को अपने घर बुलाकर उनकी दावत करना उनके साथ सेल्फी खिचवाना चाहता हैं। 

राहुल इंसानो से प्यार करने के अलावा पालतू जानवरों से भी प्यार करते है, और खेल-कूद में रुचि रखते हैं. लोग ये भी समझ गए हैं कि राहुल जितने शर्मीले हैं, उतने ही संवेदनशील भी हैं. राहुल ने जिस तरह से खामोशी के साथ निर्भया के परिवार की मदद की, उससे लोगों को ये भी पता चल गया है कि राहुल अपने अच्छे कामों का ढिंढोरा पीटने में यकीन नहीं रखते.

राहुल की रीब्रांडिंग काम आएगी?   राहुल की रीब्रांडिंग अपना पूरा असर दिखा रही है। यकीनन उनकी एक संवेदनशील और मानवीय छवि पेश की जा रही है. राहुल की ये छवि, भले ही विशेषज्ञों के जरिए बनाई गई हो, या ये खुद राहुल की अपनी कोशिशों का नतीजा हो, उससे राहुल की संवेदनशीलता पर कोई फर्क नहीं पड़ता. लेकिन राहुल की असल परीक्षा अब शुरू हुई है, क्योंकि अब हर कोई ये जानना चाहता है कि अपने नए अवतार के जरिए क्या राहुल मतदाताओं को लुभा पाएंगे? क्या वो राज्य दर राज्य जीत दर्ज कर रही बीजेपी की रफ्तार पर ब्रेक लगा पाएंगे? लोग ये भी जानने को बेताब है कि क्या राहुल मोदी की चमक फीकी कर पाएंगे? क्योंकि अब देश का माहौल बदल चुका है, अब वो वक्त नहीं रहा जब मरणासन्न कांग्रेस को पटखनी देकर मोदी दिल्ली की सत्ता पर काबिज हुए थे. अब कांग्रेस के लिए हवा कुछ-कुछ माफिक हो चली है. ऐसे में लोगों को राहुल से उम्मीदें बढ़ गई हैं.

गुजरात के चुनावी माहौल में राहुल गांधी के रोड शो और जनसभाओं में उमड़ी भीड़ देखकर लगता है कि लोग अब कुछ नया और कुछ अलग सुनना चाहते हैं. राहुल को मिल रहे भारी जनसमर्थन से ये भी लगता है कि, लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन की बात से अब ऊब चुके हैं, और अब वो दूसरे लोगों के मन की बात सुनना चाहते हैं। आज मतदाताओं के मन में उथल-पुथल मची हुई है, उनके अंदर कुछ पक रहा है. ऐसे में राहुल सरकार की नीतियों और फैसलों से नाखुश जनता की आवाज बनकर उभर कर सामने आ रहे हैं. राहुल अब लोगों की नब्ज पकड़ना बखूबी सीख गए हैं, जिसने उन्हें सही मायनों में जननेता बना दिया है। अब उन्हें '' पप्पू '' कहना बेवकूफी होगी 
राहुल गांधी ने ट्वीट किया है कि महंगी गैस, महंगा राशन
बंद करो खोखला भाषण, दाम बांधो, काम दो,वर्ना खाली करो सिंहासन सोशल मीडिया की सुर्खियां बना हुआ है। 

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