Wednesday, November 29, 2017

जाति विशेष के नेताओं की सरगर्मी से चर्चित हुई हरियाणा की सबसे बड़ी विधान सभा



फरीदाबाद (abtaknews.com -दुष्यंत त्यागी ) 29 नवंबर,2017; सूत न कपास जुलाहों  में लट्ठम लट्ठा वाली कहावत को चरितार्थ करते जाति विशेष के नेताओं के चलते हरियाणा की सबसे बड़ी विधान सभा चर्चा का विषय बनी हुई है। यहाँ के भावी विधायकों में घमाशान मचा हुआ है। चुनाव तो पहले हिमाचल और अब गुजरात में हो रहे हैं लेकिन सरगर्मी इस विधानसभा में कुछ ज्यादा ही हैं। मानो यहाँ चुनाव चल रहा हो, एक जाती विशेष के उक्त नेता गांव गांव ऐसे अभियान चलाये हुए है मानो हरियाणा में विधानसभा के चुनाव के लिए वोट मांगे जा रहे हों। विपक्षी पार्टी का वर्तमान विधायक जिसकी पॉवर गांव के पंचायत सदस्य जितनी भी  नहीं है, ईलाके के लोग अपना चुना हुआ जनप्रतिनिधि मानकर कार्य करवाने, समस्याएं सुलझवाने के लिए उनके पास जाते है लेकिन विधायक महोदय हाथ जोड़कर बोल देते है कि भाई मैं तो विपक्ष में हूँ मेरी तो कोई सुनता नहीं जब हमारी सरकार आएगी तब आना काम करवाने के लिए। आजकल उक्त जनप्रतिनिधि ने गांव गांव जाकर ग्रामीणों की समस्या सुनने का झूठा अभियान चलाया हुआ है जिसमे वह समस्या सुनने के नाम पर वर्त्तमान सरकार की बुराई कर अपने लिए आगामी चुनाव के लिए माहौल बना रहे है। दूसरे महानुभाव जो कि दूसरी पार्टी से आए रातों रात टिकट का जुगाड़ कर चुनाव लड़े पार्टी लहर के बावजूद कम अंतर से चुनाव हार गए क्योंकि जिंदगी में कभी चुनाव नहीं लड़ा  ना ही अपनी कोई टीम थी बिना अनुभव के चुनाव हारना ही था सो हार गए।  इन महाशय को वर्तमान मोदी सरकार के मंत्री जी को यह एक आंख नहीं भाता कारण स्पष्ट है कि उन्हें अपने बेटे को विधायक जो बनाना है। इसलिए बेटे को पहले पार्षद बनवाया और फिर वरिष्ठ उपमहापौर ताकि विधायक की टिकट मांगने के लिए एक बेहतर बेकग्रॉउंड तैयार हो जाये।

मंत्रीजी ने पार्टी के हारे हुए प्रत्याशी को दूध में गिरी मक्खी की तरह बाहर फैंक दिया लेकिन यह हारा हुआ प्रत्याशी भी हार मानने को तैयार नहीं और विपक्षी विधायक के जनसंपर्क अभियान की तर्ज पर गांव गांव भ्रमण पर निकल पड़ा है प्रतिएक रविवार अलग अलग गांव में सभा आयोजित कर अपने  राजनैतिक भविष्य को सँवारने की लड़ाई लड़ रहा है। पार्टी संगठन को अपनी जेब की बपौती समझने वाले पुत्र मोह में डूबे मंत्री को सिर्फ और सिर्फ अपना बेटा ही विधायक के रूप में इस विधानसभा से पार्टी का प्रत्याशी चाहिए जिसके लिए चक्रव्यूह तैयार कर लिया है पार्टी से कोई दूसरा दावेदार ना रहे इसलिए अन्य दावेदार कार्यकर्ताओं को खुड्डे लाइन लगा दिया गया।  बेटे को विधायक मानकर चल रहे इस नेता के चापलूसों ने सोशल मीडिया पर भावी विधायक की मुहिम शुरू की हुई है अपने खास पार्षदों से सभाओं में सार्वजनिक रूप से बेटे के पक्ष में दावेदारी के साथ साथ वोट भी मंगवाई जा रही है। जिसका उदाहरण अभी हाल ही में विधानसभा के अंतर्गत आने वाले एक पुल के उद्घाटन समारोह में देखने को मिली जहा एक एक पार्षद से हाथ उठवाकर कसम ली गई कि मंत्री पुत्र की ही दावेदारी का समर्थन करना है। इस विधानसभा से पार्टी के लिए सीट जीतकर लाने में सक्षम,जमीन से जुड़े मजबूत  व पुराने कार्यकर्ता अज्ञात वास में हैं। प्रदेश व देश में सत्तारूढ़ पार्टी जो वंशवाद का विरोध और पार्टी कार्यकर्त्ता को सम्मान देने के नाम पर सत्तारूढ़ हुई है भविष्य में समय बताएगा कि वंशवाद पर कब तक और कितना और चल पाती है। वर्तमान में इस विधानसभा की जनता स्वयं को उपेक्षित एवं असहाय महसूस करती है। कोई किसी की सुनने को तैयार नहीं समस्यायों के अंबार लगे हैं। पार्टी की गर्भ नाल से जुड़ा विश्व का सबसे बड़ा संगठन इस मामले में क्या और कितना सही फैंसला ले पायेगा यह आने वाला समय ही बताएगा।  

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