Thursday, October 5, 2017

भारत की वर्तमान शिक्षा पर चिंतन; - प्रो एम पी सिंह

prof-m-p-singh-faridabad

 फरीदाबाद (abtajbews.com ) 05 अक्टूबर,2017 ; शिक्षा नीति पर चर्चा शिक्षा के चार स्तंभ होते हैं पहला शिक्षक दूसरा शिक्षार्थी तीसरा पाठ्यक्रम चौथा बुनियादी जरूरत इनमें से कोई भी स्तंभ कमजोर होता है तो शिक्षा में गिरावट आती है डॉक्टर MP सिंह प्रसिद्ध शिक्षाविद दार्शनिक व साहित्यकार है और अनेकों पुस्तकों के लेखक है जिसमें सफलता का रहस्य गणित जल्दी कैसे सीखें कैरियर चयन प्राथमिक सहायता सड़क सुरक्षा नागरिक सुरक्षा आपदा प्रबंधन डॉक्टर MP सिंह स्पीक्स गृह परिचर्या आदि पुस्तकें पॉपुलर है डॉक्टर MP सिंह का चिंतन है कि भारत में शैक्षणिक वातावरण व शिक्षा नीति अनुकूल नहीं है हमारे देश में शिक्षा के सुधार के लिए विदेशों की शिक्षा को मापदंड मानकर समय-समय पर अनेकों नीतियां बनाई जाती रही है लेकिन भारतीय भूल जाते हैं कि भारत देश अनेकों प्रांतों सुबह व कस्बों में बटा हुआ है जहां पर स्थानीयबाद का बहुत चलन है इसलिए डॉक्टर एम पी सिंह का कहना है कि इसको प्रयोगशाला न बनाकर बेहतर शिक्षा नीति देकर भारत को सुदंर बनाने में हर भारतीय नागरिक व शिक्षा शास्त्री को अपनी अहम भूमिका निभानी चाहिए अन्यथा यह देश फिर से गुलाम हो सकता है माना लोकतंत्र में पार्टी बदलती रहती हैं और शिक्षा मंत्री भी बदलते रहते हैं थोड़ा सा समय मंत्री महोदय को मिल पाता है उतने समय में समझ नहीं आता कि क्या बेहतर है और क्या बदतर क्या उचित है और क्या अनुचित है क्योंकि पैसे वालों के अधिकारियों के राजनेताओं के अधिकतर बच्चे तो विदेशों में पढ़ रहे होते हैं उन्हें सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के बारे में पता ही नहीं होता है फिर उनके मंत्रालय भी बदलते ही रहते हैं कई बार अशिक्षितों व अनुभवहीन नेताओं को भी शिक्षा मंत्री बना दिया जाता है यह देश का सौभाग्य है या दुर्भाग्य यह निर्णय आप लोगों पर ही है प्रोफ़ेसर MP3 अनेकों महाविद्यालयों में पढ़ा चुके हैं और लगभग 25 साल का अनुभव है इसलिए उनका मानना है कि विद्यार्थियों को बुनियादी ज्ञान व जीवन उपयोगी शिक्षा अवश्य मिलना चाहिए उन्हें अपने प्रांत पूर्वजों व राष्ट्र निर्माण की भी जानकारी अवश्य देनी चाहिए नागरिकता का ज्ञान नैतिक चारित्र ज्ञान ब्रह्मचर्य ज्ञान का बोध भी अवश्य है कराना चाहिए उन्हें अपने महापुरुषों के बारे में धार्मिक व सामाजिक व्यवस्था के बारे में वह परिवार की संरचना में उनकी क्या अहम भूमिका है उसका ज्ञान अवश्य होना चाहिए सफलता के लिए व्यावहारिक ज्ञान होना बहुत जरूरी है इससे आगे अगले अंक में पढ़े अपनी प्रतिक्रिया 98 10566 553 पर दे सकते हैं

loading...
SHARE THIS

0 comments: