Thursday, October 26, 2017

वाईएमसीए विश्वविद्यालय का नाम प्रसिद्ध वैज्ञानिक जगदीश चन्द्र बसु के नाम पर होगा


फरीदाबाद, 26 अक्तूबर,2017(abtaknews.com)हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल ने आज वाईएमसीए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, फरीदाबाद का नाम प्रसिद्ध वैज्ञानिक जगदीश चन्द्र बसु के नाम पर रखने की घोषणा की तथा कहा कि विश्वविद्यालय का विस्तार 60 से 65 एकड़ भूमि पर किया जायेगा। इसके लिए राज्य सरकार ने अपनी सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है।हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल आज वाईएमसीए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, फरीदाबाद द्वारा हरियाणा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में दो दिवसीय स्वर्ण जयंती विज्ञान सम्मेलन के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालय में 60 करोड़ रुपये की विभिन्न परियोजनाओं का उद्घाटन तथा शिलान्यास किया।

श्री मनोहर लाल ने कहा कि प्रसिद्ध भारतीय वैज्ञानिक जगदीश चन्द्र बसु का विज्ञान के क्षेत्र में अतुल्य योगदान रहा है। उन्हीं के नाम पर वाईएमसीए विश्वविद्यालय को ‘जे0सी0 बसु वाईएमसीए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय’ के नाम से जाना जायेगा। विश्वविद्यालय के नाम को लेकर अन्य औचारिकताओं को जल्द पूरा कर लिया जायेगा। विश्वविद्यालय द्वारा नये शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक पद सृजित करने तथा नये पाठ्यक्रमों के लिए बजटीय प्रावधान करने के आग्रह पर मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्वविद्यालय की सभी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जायेगा। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के कारण समय के आभाव का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री ने विश्वास दिलाया कि वे जल्द ही विश्वविद्यालय का पुनः दौरा करेंगे।
‘विज्ञान’ को आविष्कार की जननी बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार तकनीकी, प्रौद्योगिकी एवं मेडिकल शिक्षण संस्थान में सुविधाओं पर विशेष ध्यान दे रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा आने वाले दिनों में स्कूलों में विज्ञान की शिक्षा पर जोर दिया जायेगा तथा विज्ञान के शिक्षकों की भर्ती की जायेगी।
26 अक्तूबर को मौजूदा सरकार के तीन वर्ष पूरे होने पर शुभकामनाएं देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि विगत तीन वर्षाें में राज्य सरकार ने प्रत्येक क्षेत्र में कार्य किया है। विशेष रूप से शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया है। उन्होंने कहा कि शिक्षित एवं कुशल युवाओं से ही प्रदेश का विकास सुनिश्चित होगा।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. दिनेश कुमार ने विश्वविद्यालय की पृष्ठभूमि, चलाये जा रहे कार्यक्रमों तथा भावी योजनाओं का ब्यौरा प्रस्तुत किया। कुलपति ने मुख्यमंत्री को अवगत करवाया कि मात्र 20 एकड़ के परिसर एवं सीमित संसाधनों के बावजूद विश्वविद्यालय ने शिक्षा की उच्च गुणवत्ता को बनाये रखा है। कुलपति ने बताया कि विश्वविद्यालय की योजना नये पाठ्यक्रम शुरू करने की है। इसके साथ-साथ शिक्षकों की संख्या को 125 से बढ़ाकर 300 तक ले जाने तथा स्व-विपोषित पाठ्यक्रमों एवं शिक्षकों को नियमित करना भी विश्वविद्यालय की प्राथमिकताओं में से एक है। उन्होंने मुख्यमंत्री के समक्ष नये शिक्षण एवं गैर-शिक्षण पदों की स्वीकृति तथा विश्वविद्यालय के द्वितीय कैंपस के लिए फरीदाबाद-गुरूग्राम मार्ग पर चिन्हित लगभग 62 एकड़ भूमि आवंटित करने का आग्रह भी किया।
इससे पूर्व मुख्यमंत्री ने विज्ञान प्रदर्शनी अवलोकन किया। उन्होंने विद्यार्थियों द्वारा बनाये गये प्रोजेक्ट एवं मॉडल्स की जानकारी ली तथा सराहना की। कुलपति ने मुख्यमंत्री को पौधा भेंट कर उनका सम्मान किया तथा स्मृति स्वरूप उनका चित्र भेंट किया। इस अवसर पर वाईएमसीए विश्वविद्यालय पर आधारित एक वृत्तचित्र को भी प्रदर्शित किया गया। मुख्यमंत्री विज्ञान प्रदर्शनी में पुरस्कार प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित भी किया।
उल्लेखनीय है कि वाईएमसीए विश्वविद्यालय वर्ष 2019 में विश्वविद्यालय एक शिक्षण संस्थान के रूप में अपने 50 वर्ष पूरे करेगा। स्वर्ण जयंती वर्ष की तैयारियों के रूप में मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालय में नई परियोजनाओं का शुभारंभ किया, जिसमें एक करोड़ रुपये की लागत से निर्मित नये सभागार (ऑडिटोरियम) का उद्घाटन, 50 लाख रुपये की लागत से बनने वाले विश्वविद्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार जिसे ‘स्वर्ण जयंती द्वार’ का नाम दिया गया है, का शिलान्यास, तीन करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले एससी/एसटी कन्या छात्रावास का शिलान्यास, 36 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले कर्मचारियों के बहुमंजिला आवासीय परिसर का शिलान्यास तथा 18 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले नये अकादमिक (विज्ञान संकाय) खण्ड का शिलान्यास किया। विश्वविद्यालय द्वारा सभी नई परियोजनाओं को दो वर्ष के अंदर पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
दो दिवसीय विज्ञान सम्मेलन के दौरान फरीदाबाद तथा पलवल के लगभग 20 शिक्षण संस्थानों के एक हजार ज्यादा बच्चों ने हिस्सा लिया। इस दौरान 249 विद्यार्थियों ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पर आधारित अपने लगभग 100 प्रोजेक्ट एवं मॉडल्स प्रदर्शित किये। ये सभी मॉडल्य चयनित विषयों कौशल भारत, हरित भारत, डिजिटल इंडिया, स्वच्छ भारत, स्वदेशी भारत, स्वस्थ भारत, सुरक्षित भारत, शिक्षित भारत, सामर्थ भारत, विज्ञान गांव तथा मेक इन इंडिया पर आधारित थे। 

‘वाईएमसीए से रहा है पुराना नाताः मुख्यमंत्री’
फरीदाबाद। मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल ने कहा कि बेशक मुख्यमंत्री के रूप में पहली बार वाईएमसीए विश्वविद्यालय आये है। लेकिन वाईएमसीए से उनका पुराना नाता रहा है। वर्ष 1980-81 केे दौरान उनका यहां कई बार आना होता था और वे यहां नैतिक शिक्षा की क्लास लगाने आते थे। जर्मन संस्थान होने के कारण कई मौकों पर उन्हें संस्थान में प्रवेश करने में परेशानी का सामना भी करना पड़ता था लेकिन जब 1996 में सरकार ने इसे अपने आधीन ले लिया तो उनको ऐसी किसी दिक्कत का सामना करना नहीं पड़ा। उन्होंने कहा कि फरीदाबाद शहर के साथ उनकी पुराने यादें रहीं है।

विज्ञान प्रदर्शनी में पुरस्कार प्राप्त करने वाले प्रोजेक्ट एवं मॉडल्स के परिणाम इस प्रकार हैः
स्कूल (जूनियर) श्रेणी में विज्ञान पर आधारित प्रोजेक्ट्स के लिए मॉडन डीपीएस स्कूल के दीपक व विशाल कटियाल को उनके प्रदूषण मुक्त परिवहन प्रणाली के लिए पहला पुरस्कार, टैगोर अकादमी के मनन, लक्ष्य, मनीष, प्रशांत, प्रथम व अक्षित के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के प्रोजेक्ट को दूसरा पुरस्कार तथा डीपीएस ग्रेटर फरीदाबाद के लवन्या, अगस्त्या व अत्रिजा के प्रोजेक्ट को तीसरा पुरस्कार दिया गया।
इसी प्रकार, कॉलेज (सीनियर) श्रेणी में विज्ञान पर आधारित प्रोजेक्ट्स के लिए डीएवी कालेज, फरीदाबाद की नीलम, मीनाक्षी शर्मा, अभिषेक व विकास यादव को उनके प्लास्टिक फ्यूल मॉडल को पहला, जीजीडी एसडी कालेज, पलवल के पवन, प्रताप व हिमांशु को उनके स्वस्थ व जागरूक भारत प्रोजेक्ट के लिए दूसरा तथा केएल मेहता कालेज, फरीदाबाद की आकांक्षा व अंकिता को उनके एयर प्यूरिफायर प्रोजेक्ट के लिए तीसरा पुरस्कार दिया गया।
कॉलेज (सीनियर) श्रेणी में प्रौद्योगिकी पर आधारित प्रोजेक्ट्स के लिए वाईएमसीए विश्वविद्यालय के रिशभ व चेतन को रोबोटिक आर्म व मिनी क्रेन के लिए पहला, बीएसए अनंगपुरिया, फरीदाबाद के नीरज, सोनम, पंकज, शिखा व गजेन्द्र को टॉयलेट के रखरखाव को लेकर उनके प्रोजेक्ट के लिए दूसरा तथा श्रीराम कालेज, पलवल के नवीन व योगेश को उनके हाइड्रोलिक आर्म प्रोजेक्ट के लिए तीसरा पुरस्कार दिया गया है।

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