Tuesday, October 24, 2017

फरीदाबाद के खराब परीक्षा परिणाम की वजह अध्यापकों की कमी;- सतेंद्र कौर वर्मा


फरीदाबाद(abtaknews.com)हाल ही में राज्य शैक्षिक अनुसंधान प्रशिक्षण यानि कि एससीईआरटी द्वारा प्राथामिक और मिडिल की अगस्त में हुई मंथली असेसमेंट रिपोर्ट जारी होने के बाद जिन जिलों का शिक्षा स्तर प्रतिशत में कम आया है उन जिलों के शिक्षा अधिकारियों ने कमर कस ली है, 60 प्रतिशत पर सिमटा फरीदाबाद का शिक्ष स्तर आने वाले महीनों में टॉप पर होगा ऐसा वायदा और दावा फरीदाबाद की जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी सतेन्द्र कौर वर्मा ने किया है,, खराब रहे परिणाम के पीछे अधिकारी ने अध्यापकों की कमी बताया और कहा कि अब वो नई निति के अनुसार फरीदाबाद से अच्छे परिणाम देंगी।

हरियाणा सरकार सरकारी स्कूलों में पढने वाले बच्चों के शिक्षा स्तर को जानने के लिये प्रति महीने मंथली परीक्षा करवा रही है,, जिसमें प्राथमिक और मिडिल क्लासों में पढने वाले बच्चों को परीक्षा देनी होती है और उसका परिणाम अगले में महीने में जारी करके पत लगाया जाता है कि किस जिले में शिक्षा का स्तर कम है,, इसी कडी में हाल ही में राज्य शैक्षिक अनुसंधान प्रशिक्षण यानि कि एससीईआरटी ने  प्राथामिक और मिडिल की अगस्त में हुई मंथली असेसमेंट रिपोर्ट  जारी की है जिसमें महेन्द्रगढ जिले ने 69 प्रतिशत लेकर बाजी मारी है तो वहीं फरीदाबाद 60 प्रतिशत पर ही सिमिट गया है, और यमुनानगर मेवात और पलवल फिसड्डी रहे हैं। 

फरीदाबाद में आये कम प्रतिशत के बारे में फरीदाबाद की जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी सतेन्द्र कौर वर्मा से बात की गई तो उन्होंने कहा कि कम प्रतिशत आना जिले में अध्यापकों की कमी का कारण है, क्योंकि पिछले कई सालों से उनके पास पर्याप्त अध्यापक नहीं थे जिसके चलते बच्चों की सही तरीके से पूरी पढाई नहीं हो पा रही थी अब अध्यापक पूरे हो चुके हैं और जल्द ही वो नई निति तैयार कर रही है जिसके बाद फरीदाबाद टॉप पर नजर आयेगा,, जिसके लिये शिक्षा अधिकारी ने वायदा और दावा बडे ही मजबूती से किये हैं।

वहीं फरीदाबाद में शिक्षा के क्षेत्र में जन सेवा वाहिनी संस्था के पदाधिकारी और शिक्षाविद् दिवाकर मिश्रा ने अबतक न्यूज़ पोर्टल टीम को बताया कि स्कूलों में शिक्षा के आ रहे कम प्रतिशत का जिम्मेदार सिर्फ और सिर्फ सरकार है।  उन्होंने बताया कहा कि सरकारें बच्चों को इमारतें देती है, खाना देती हैं कपडे देती हैं मगर पढाने के लिये अध्यापक नहीं देती जिसके चलते शिक्षा का स्तर लगातार गिरता जा रहा है,, वहीं उन्होंने कहा कि जो शिक्षक स्कूलों पढा रहे हैं उन्हें भी पढाने नहीं दिया जाता है उनको पढाई के अलावा अन्य  सरकारी कार्यक्रमों में लगा दिया जाता है जिसे बंद कर दिया जाये तो शायद शिक्षा का स्तर बढ सकता है।


loading...
SHARE THIS

0 comments: