Monday, October 2, 2017

पलवल में गिरफ्तार किए गए थे जलियांवाला बाग जाते समय महात्मा गांधी


पलवल-अंशुल गर्ग(abtaknews.com)02 अक्टूवर,2017; पलवल में 10 अप्रैल 1919 को चोरी छिपे जलियांवाला बाग में आयोजित एक सेमिनार में भाग लेने जा रहे गांधी जी को पलवल स्टेशन पर गिरफ्तार कर लिया गया और मुंबई ले जाकर छोड़ा गया। सरकार और प्रशासन ने उनकी याद में स्टेशन पर और माल गोदाम रोड पर 2 अक्तूबर 1938 को गांधी आश्रम का निर्माण करा दिया। इसी आश्रम में इस वक्त बापू से जुड़े दुर्लभ चित्रों का संग्रहालय है। संग्रहालय में गांधी जी के बचपन से लेकर उनके अंतिम सफर तक के हजारों चित्र हैं।

बापू के विविध रूपों के दर्शन कराते हैं चित्र ; गांधी सेवा आश्रम करीब पांच एकड़ क्षेत्र में स्थापित है। आश्रम के विशेष सभागार में मोहनदास कर्मचंद गांधी के बचपन से लेकर उनके निधन के बाद अंतिम यात्रा, अंतिम संस्कार से जुड़ी और देश-दुनिया की महान शख्सियत के साथ उनके ढेर सारे चित्रों का दुर्लभ संग्रह है। इनमें स्वतंत्रता संग्राम में उनके संघर्ष, विदेश यात्राओं, सादगी, दलितों से प्रेम, उनके लिए चंदा एकत्रित करना, आंदोलनों व यात्राओं में भाग लेने के जीवंत दृश्य देखने को मिलते हैं। इनमें कराची, फैजपुर, मुंबई, हरिपुरा, वर्धा में कांग्रेस अधिवेशन में भाग लेने के दौरान डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, पंडित मदन मोहन मालवीय, पंडित जवाहर लाल नेहरू, सी राज गोपालाचार्य के साथ उनके चित्र, सीमांत गांधी, अब्दुल गफ्फार खान, आचार्य संत विनोबा भावे, रविंद्र नाथ टैगोर, नेता जी सुभाष चंद्र बोस के साथ चित्र व दक्षिण अफ्रीका में उनकी गिरफ्तारी, सत्याग्रही के रूप में, दांडी यात्रा के चित्रों में आजादी के लिए किए गए संघर्ष की मुंह बोलती तस्वीरें हैं।

अन्ना हजारे भी पधारे आश्रम में ;20 फरवरी 2015 को आज के युग के गांधी यानी अन्ना हजारे के चरण भी गांधी आश्रम में पड़े। अन्ना हजारे राष्ट्रीय एकता परिषद व राष्ट्रीय भूमि सुधार परिषद के सदस्य गांधीवादी नेता राजगोपाल के नेतृत्व में शुरू हुई जन सत्याग्रह पदयात्रा को हरी झंडी दिखाने से पूर्व आश्रम आए थे और यहां से अहिंसा व शांति का संदेश दिया था। अन्ना हजारे ने यहां गांधी जी की स्मृति में पौधा भी लगाया था ।गांधी सेवा आश्रम ट्रस्ट अध्यक्ष  देवी चरण मंगला, ने बताया की  बापू के कारण ही पलवल का ऐतिहासिक महत्व है। आश्रम में ऐसे दुर्लभ चित्रों का संग्रह है, जो राजघाट या गांधी जी से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण केंद्रों पर देखने को नहीं मिलेंगे।

शहीद भगतसिंह पर पीएचडी करने वाले रिटायर्ड प्राध्यापक डॉ. रघुबीर सिंह ने बताया की  महात्मा गांधी से जुड़े दुर्भल चित्र पलवल के अलावा शायद ही कहीं हों, लेकिन अफसोस है कि लोगों को इसकी जानकारी नहीं है। यहां तक कि खुद पलवल में ही केवल गांधी जयंती पर कार्यक्रम होता है। बाकी दिन स्कूली बच्चे भी इसे देखने नहीं आते, जबकि ऐतिहासिक स्थलों पर दूर दूर तक चले जाते हैं।

loading...
SHARE THIS

0 comments: