Monday, October 2, 2017

जातिगत एवं धर्म के आधार पर आरक्षण समाप्त करने के लिये मंत्री को सोंपा ज्ञापन


फरीदाबाद 2 अक्टूबर(abtaknews.com आरक्षण विरोधी पार्टी द्वारा आज 2 अक्तूबर 2017 को माननीय पूर्व प्रधान मंत्री श्री लालबहादुर शास्त्री जी एवं राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी के जन्म दिवस के अवसर पर "समानता के अधिकार" एवं "स्वस्थ्य प्रतियोगिता अधिनियम" का हनन करने वाले जातीय एवं धर्म आधारित कानून को समाप्त करने हेतु सरकार को ज्ञापन सौंपने का कार्यक्रम आयोजित किया गया है
आरक्षण विरोधी पार्टी जातिगत आरक्षण के विषय में कुछ विशेष बिन्दुओं पर आपका ध्यान आकर्षित करना चाहिती है
1. जबभी देश के सदन राज्यसभा या लोकसभा में जातिगत आरक्षण की समय सीमा बढ़ाने या नयी जातियां शामिल करने का बिल पेश होता है तब उस जाति में जनसँख्या के आधार पर गाँव या देहात क्षेत्र या किसी स्थान विशेष का जिक्र करते हुए आर्थिक रूप से पिछड़ा होने , शैक्षणिक रूप से पिछड़ा होने या सामजिक रूप से दबंगों द्वारा उनके लिए अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किये जाने को आधार बनाकर पुन: निर्धारण किया जाता है परन्तु जब आरक्षण लागू हो जाता है तो उस जाति के करोडपति, नेता, मंत्री क्लास वन अधिकारी अपने बच्चों एवं रिश्तेदारों को आरक्षण का भरपूर लाभ दिलवाते है और जिन लोगों की दुहाई आरक्षण की भीख मांगते समय दी जाती है उनको वंचित कर दिया जाता है
2. यदि आरक्षण का उद्देश्य गरीब दबे कुचले लोगों को मुख्य धारा से जोडऩा है तो एससी एवं एसटी वर्ग के लिए क्रीमी लेयर का बंधन लागू क्यों नहीं किया गया है
2(्र). जब किसी व्यक्ति को एक बार आरक्षण देकर मुख्य धारा में जोड़ दिया गया तो फिर उसी व्यक्ति के बच्चो को दोबारा आरक्षण का लाभ लेने से क्यों नहीं रोका जा रहा जिससे दोबारा मौका किसी अन्य व्यक्ति या अन्य परिवार को मिल सके
2(क्च). जब जातीय आरक्षण देने के पश्चात् किसी व्यक्ति को सरकारी अधिकारी बनाया जाता है तो वह निश्चित रूप से शैक्षणिक रूप से उस पद के लिए निर्धारित योग्यता प्राप्त कर चुका होता है अर्थात शैक्षणिक रूप से पिछड़ा नहीं होता है साथ ही सरकार उसको मासिक वेतन देती है इसलिए वह आर्थिक रूप से पिछड़ा भी नहीं रहता है एवं क्योंकि वह अपने पद पर कार्य करते हुए समाज में अपना एक सम्मानजनक स्थान प्राप्त कर लेता है इसलिए वह सामाजिक रूप से भी पिछड़ा नहीं रहता है तब उस व्यक्ति को पदोन्नति में आरक्षण देने का कोई औचित्य नहीं होना चाहिए 
3. यदि जातिगत आरक्षण का उदेश्य गरीब और पिछड़े लोगों को आगे लाना है तो अरक्षित वर्गों के लिए आवश्यक प्रतिबन्ध लागू किये जाने चाहिए
3(्र) क्रीमी लेयर की अधिकतम आय सीमा 2 लाख 50 हजार से अधिक नहीं होनी चाहिए
3(क्च) जिन परिवारों के सदस्य ्रष्ट गाडिय़ों में घूमते हैं या 200 वर्ग गज या उससे बड़े पक्के मकानों में    रहते हैं या उनको आरक्षण के लाभ से प्रतिबंधित किया जाना चाहिए
3(ष्ट) जिन परिवारों में घरेलु कार्य हेतु नौकर काम करते हैं उन परिवारों को आरक्षण के लाभ से वंचित किया जाना चाहिए
3(ष्ठ) जो व्यक्ति किसी भी राजनितिक दल से अथवा निर्दलीय रूप से ग्राम प्रधान, पार्षद, किसी विभाग के चेयरमेन, विधायिका या सांसद हेतु एक बार चुनाव प्रत्यासी के रूप में नामांकन करवाए उसे एवं उसके बच्चों को पूर्ण रूप से सक्षम मानते हुए आजीवन जातिगत आरक्षण के लाभ से वंचित किया जाना चाहिए
4. ऐसे कई मामले प्रकाश में आये हैं जहाँ एससी एवं एसटी वर्ग के लोगों ने एससी एट्रोसिटी एक्ट को कमाई का जरिया बना कर लाखों रुपये कमाए हैं इन मामलों की गंभीरता को संज्ञान में लेते हुए एससी एक्ट के तहत दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि को अविलम्ब समाप्त किया जाना चाहिए साथ ही यदि किसी महिला के साथ कोई दुव्र्यवहार होता है तो उसमे न्याय जातीय आधार पर नहीं बल्कि सामाजिक आधार पर सभीको सामान रूप से मिलना चाहिए आरक्षण विरोधी पार्टी प्रधान मंत्री जी द्वारा जांच की समय सीमा जातीय आधार पर किये जाने एवं जातीय आधार पर मेडिकल परिक्षण न करवाए जाने के आदेशों का घोर विरोध करती है
5. जातिगत आरक्षण के प्रावधान के तहत प्रतियोगी परीक्षाओं में निर्धारित से कम अंक प्राप्त करने वाले प्रतियोगियों को अधिकारी बनाकर देश को विध्वंश के मार्ग पर धकेला जा रहा है
5(्र) अयोग्य और नाकारा प्रतियोगियों को वैज्ञानिक बनाकर देश का समग्र विकास गोबर के उपले से लड़ाकू विमान बनाने के सामान है जिसका परिणाम सिर्फ बर्बादी है
5(क्च) प्रतियोगी परीक्षाओं में शून्य प्राप्त करने वाले इंजिनियर देश में सिर्फ हादसों को जन्म देंगे स्थाई इन्फ्रा-स्ट्रक्चर प्राप्त करने हेतु योग्यता को प्राथमिकता देना परम आवश्यक है
5(ष्ट) अयोग्य डाक्टर जो दवाओं का नाम भी ठीक से नहीं लिखना जानते उनको सरकारी अस्पतालों में न्युक्ति दे दी जाती है जो देश की जनता के लिए उचित इलाज के स्थान पर मौत बाँट रहे हैं
5(ष्ठ)देश में जातिगत आरक्षण के आधार पर ऐसे लोगो को शिक्षक , प्रोफेसर बनाया जा रहा है जो स्वयं उस परीक्षा को पास नहीकर सकते जिसे वे शिक्षा दे रहे होते हैं जो देश के भविष्य के लिए खतरा है


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